माघ मेला-2020 / अधूरी तैयारियों के बीच संगम की रेती पर श्रद्धा की धूनी रमाने पहुंचने लगे कल्पवासी

संगम की रेती बसा तंबुओं का शहर। संगम की रेती बसा तंबुओं का शहर।
माघ मेले के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू। माघ मेले के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू।
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संगम की रेती बसा तंबुओं का शहर।संगम की रेती बसा तंबुओं का शहर।
माघ मेले के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू।माघ मेले के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू।

  • पांच पांटून पुलों में से तीन पर प्रशासन ने आवागमन रोका, श्रद्धालुओं की मुसीबत बढ़ी
  • बिजली, पानी से लेकर चकर्ड प्लेट बिछाने तक का कार्य अधूरा

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2020, 06:34 PM IST

प्रयागराज. गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम की नगरी प्रयागराज में वर्ष 2019-20 का कल्पवास पौष पूर्णिमा यानी 10 जनवरी से शुरू हो जाएगा। कल्पवासियों का आना प्रारंभ हो गया है। लेकिन माघ मेले की तैयारियां अभी आधी अधूरी हैं। कल्पवासियों, साधु-संतों और अन्य श्रद्धालुओं के साथ व्यापारी तबके के लोग भी आधी अधूरी तैयारियों के बीच माघ मेले में श्रद्धा की धूनी जलाने के लिए जुटने लगे हैं। वह भी तब जबकि मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन तक इस माघ मेले को कुम्भ मेले की तर्ज पर कराने का दावा कर चुके हैं। 

मेला शुरू होने में मात्र 2 दिन का समय बाकी है। 7 जनवरी को माघ मेला प्रशासन ने मेला क्षेत्र में बनाए गए पांच पांटून पुलों में से तीन पर आवागमन बंद कर दिया है। जिसकी वजह यह बताई गई है कि गंगा में प्रवाह अधिक होने की वजह से पीपा के पुलों के बहने का डर है। ऐसी व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं को मुसीबत से रूबरू होना तय है। गंगा की तेज धारा की वजह से हो रही कटान और दलदली जमीन के चलते इस बार अधिकांश मेला झूसी क्षेत्र में बसाया गया है। जहां तक जाने के लिए पांटून पुल ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में श्रद्धालुओं साधु-संतों और अन्य लोगों को अपने तपस्थल पर पहुंचने के लिए पांटून पुलों की ज्यादा जरूरत पड़ रही है, लेकिन प्रशासन ने 7 जनवरी को 3 पुल बंद करके श्रद्धालुओं की मुसीबत बढ़ा दी है। 

इन पांटून पुलों पर रोका गया आवागमन

गंगा पर निर्माणाधीन त्रिवेणी पांटून पुल पर रविवार शाम को एक ट्रैक्टर ट्राली पलट गया था। इस दौरान कुछ मजदूरों को मामूली चोटें भी आई थी। वही गंगा में तेज प्रवाह और कटान के चलते त्रिवेणी समेत तीन पुलों पर आवागमन बंद कर दिया गया। इसी क्रम में काली पांटून पुल धंसने से कई जगह टेढ़ा हो गया है और टापू उभर आए हैं। त्रिवेणी पांटून पुल पर मिट्टी की ढुलाई के दौरान ट्रैक्टर ट्राली पलट गया था। संयोग अच्छा था कि रेलिंग से टकराकर ट्राली लटक गई थी। जिसकी वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया था।

सहायक अभियंता सत्येंद्रनाथ ने बताया कि कार्य के दौरान संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर ट्राली पलटा था, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। अभियंताओं के अनुसार पुलों पर क्लैपिंग कराई जा रही है। अभी 40 क्लैपिंग बाकी है। इस वजह से आवनगमन रोका गया है। दूसरी तरफ महावीर पांटून पुल का दायरा संत गोपाल दास महाराज के अयोध्या मणिराम दास की छावनी तक पहुंचने से यहां रह रहे लोग सकते में आ गए हैं। इस पुल पर आवागमन ठप कर दिया गया है। इसी तरह काली पांटून पुल से भी कटान और धसान हो रही है।जिससे पांटून पुल पर कई श्रद्धालु फिसल कर गिर जा रहे थे। इसके चलते इस पुल पर भी आवागमन बंद कर दिया गया है।


सोमवार शाम से ही कल्पवास क्षेत्र में पहुंचने लगे श्रद्धालु

मंगलवार से पंडो, तीर्थ पुरोहितों और साधु-संतों के शिविरों में श्रद्धालु और अधिक संख्या में पहुंचने लगे। बुधवार को प्रदोष व्रत होने की वजह से संगम स्नान करने वालो की संख्या और बढ़ने की उम्मीद से ज्यादा होने की आशंका है। करीब ढाई हजार बीघे में रैली तंबुओं की नगरी में फिलहाल बिजली, पानी से लेकर पांटून पुल और चकर्ड प्लेटों के बिछाने का कार्य भी अभी अधूरा है। रास्ते पर चकर्ड प्लेट न बिछाए जाने की वजह से श्रद्धालुओं को वहां तक पहुंचने में ज्यादा दिक्कत होगी। प्रयागवाल तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि अभी 100 से अधिक तीर्थ पुरोहितों को जमीन ही नहीं मिली है। जहां शिविर लग भी गए हैं, वहां अभी बिजली पानी की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में अगर जल्द इंतजाम पूरे नहीं किए गए तो श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।

मुख्य स्नान पर्वो पर जगह जगह तैनात रहेंगे मजिस्ट्रेट
माघ मेले में प्रमुख स्नान पर्वों पर निगरानी के लिए मजिस्ट्रेटो की तैनाती की गई है। स्नान पर्वों के 2 दिन पहले और 2 दिन बाद तक खास सतर्कता बरती जाएगी। इस दौरान यातायात व्यवस्था भी लागू रहेगी। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि पुल, होल्डिंग स्थल, पार्किंग, घाट कंट्रोल रूम, हॉस्पिटल, अस्थाई बस स्टेशनों आदि स्थानों पर मजिस्ट्रेटो की तैनाती की गई है। उन्होंने अफसरों से अपने-अपने क्षेत्रों का भ्रमण करने का निर्देश दिया है। मजिस्ट्रेटो को पुलिस के साथ सामंजस्य बनाकर एवं नियंत्रण में लगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अस्पताल, रोडवेज, अस्थाई बस स्टेशन, आदि की पूरी जानकारी रखने को कहा गया है, ताकि दूरदराज से अनभिज्ञ श्रद्धालुओं को सही जानकारी दी जा सके।


अव्यवस्था को लेकर बिफरे तीर्थ पुरोहित, दी धरना प्रदर्शन की चेतावनी

माघ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर तीर्थ पुरोहितों में गहरा आक्रोश है। तीर्थ पुरोहितों ने आंदोलन की धमकी दी है। उसके बाद प्रशासन की नींद खुली। सोमवार और मंगलवार की सुबह प्रयाग बाल सभा के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर एडीएम सिटी और मेला प्रभारी अधिकारी ने दिन भर का समय मांगा। दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में सेक्टर 5 ओल्ड जीटी रोड पर करीब 85 तीर्थ पुरोहितों को जमीन आवंटित की गई। अभी करीब 40 से 50 तीर्थ पुरोहितों को जमीन नहीं मिल पाई है। जिससे तीर्थ पुरोहित नाराज हैं। नाराज तीर्थ पुरोहितों ने माघ मेला प्रभारी कैंप कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया प्रभारी मेला अधिकारी रजनीश कुमार मिश्रा ने तीर्थ पुरोहितों के साथ बैठक कर सारी समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया है।
 

माघ मेला 2020 की 10 बड़ी बातें- 

  • अब तक के सबसे बड़े क्षेत्रफल  2500 बीघे में बसाया जा रहा माघ मेला।
  • पूरे मेला क्षेत्र में लगाई जा रही 13000 एलईडी लाइट।
  • 350 किलोमीटर विद्युत लाइनों का बिछाया गया जाल।
  • 100 किलोमीटर एरिया में बिछाई गई चकर्ड प्लेटें।
  • 22 उप केंद्र 210 केवीए के और 11 केंद्र 100 केवीए के बनकर हुए तैयार।
  • पूरे मेला क्षेत्र में बनाए गए 16 स्नान घाट।
  • संगम नोज पर 5 किलोमीटर लंबा स्नान घाट बनाया गया।
  • हर 2 मिनट पर 13 से 14 हजार स्नान आरती कर सकेंगे स्नान।
  • पूरे मेला क्षेत्र में बनाए गए 5 पांटून पुल फिलहाल तीन पर आवाजाही रोकी गई।
  • कल्प वासियों और श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए 15 हॉस्पिटल।

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