दलित आंदोलन से हार गया बुजुर्ग, बेटे ने 500 मीटर कंधे पर उठाया, जाम में देरी से हुई मौत

4 वर्ष पहले
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बिजनौर. एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने सोमवार को भारत बंद के दौरान जम कर हिंसा की। इसी सियासी दलित आंदोलन की चपेट में एक बुजुर्ग भी आया जिसे अपनी जान देनी पड़ी। दरअसल, जिस समय बिजनौर में दलितों का बवाल चल रहा था उसी समय बीमार बुजुर्ग को उसके परिजन एम्बुलेंस से डॉक्टर के पास लेकर जा रहे थे लेकिन उपद्रवियों ने एम्बुलेंस को रास्ता नहीं दिया। चालक ने बीमार व्यक्ति को चौराहे पर ही उतार दिया और बीमार के परिजन उसको कंधे पर लेकर निजी डॉक्टर के पास जाने लगे तो रास्ते मे ही बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। उसके बाद डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों का सड़क पर ही रो रोकर बुरा हाल रहा।

 

क्या है पूरा मामला?

 

-कोतवाली देहात थाना के गाँव बरुकी का रहने वाले लोकमन सिंह (60) को सोमवार को सीने में दर्द की परेशानी हुई थी तो परिजनों ने लोकमन सिंह को जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन तबियत में सुधार नही हुआ। 
-जिला अस्पताल में मरीज की अनदेखी को देखते हुए लोकमन का बेटा राजू उन्हें एम्बुलेंस से प्राइवेट डॉक्टर के पास ले जा रहा था। 
-बिजनौर में जजी चौराहे पर एम्बुलेंस दलितों के आंदोलन के जाम में फंस गयी। 
-राजू और उसकी मां प्रदर्शनकारियों के सामने एम्बुलेंस ले जाने के लिए मनुहार करते रहे लेकिन वे नहीं माने। फिर एम्बुलेंस चालक ने मरीज को गाड़ी से उतार दिया।
-कोई रास्ता न देख लोकमन के बेटे राजू ने अपने बाप को कंधे पर लेकर 500 मीटर दूर तक निजी डॉक्टर के पास लेकर गया।   लेकिन लोकमन ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। 

 

जाम नहीं होता तो बच जाती जान 

 

-इस दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने मोबाइल से राजू की तस्वीरे बना ली जिसमे वह अपने पिता को कंधे पर ले जा रहा है। 
-राजू ने बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि 500 मीटर की दूरी भी उसने आधे घंटे से ज्यादा समय में तय की। उसने बताया कि हम जब डॉक्टर के पास पहुंचे तो काफी देर हो चुकी थी। उसने बताया मेरी माँ का रो रो कर बुरा हाल है।
-वहीं लोकमन की पत्नी विमला ने बताया कि अगर जाम नहीं लगा होता तो मेरे पाती की जान बच जाती। उन्होंने बताया कि आंदोलन के जाम ने मेरे पति की जान ले ली है। विमला ने बताया कि उसके तीन बेटे हैं। जिसमे से मौके पर दो ही मौजूद थे। लोकमन अंतिम सफ़र में अपने मंझले बेटे से नहीं मिल सके। बता दे कि लोकमन के राजू, रघुवर और विकास 3 बेटे हैं।  
 

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