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योगी के गढ़ में एक गांव ऐसा भी, जहां बड़ी संख्या में रहस्यमय तरीके से दिव्यांग हो रहे लोग

600 घरों वाले इस गांव में करीब 4200 व्यस्क और 1260 अव्यस्क व बच्चे हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 15, 2017, 10:31 AM IST
इस टोले के 104 बच्‍चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। इस टोले के 104 बच्‍चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं।

गोरखपुर. सीएम योगी के शहर गोरखपुर में एक ऐसा गांव है, जहां एक टोले में हर दूसरा परिवार का कोई न कोई मेंंबर दिव्यांग है। यहां हर दूसरे घर में जिंदगी घिसट रही है। गोरखपुर के जैतपुर गांव के गौसपुर टोले का हर दूसरे घर में ये दर्द है। इस टोले के 104 बच्‍चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। हर दूसरे घर में एक दिव्यांग

- गांव के अल्पसंख्यक बाहुल्य गौसपुर टोले में एवरेज हर दूसरे घर में एक, दो से चार दिव्यांग मिल जाएंगे। कुछ चल नहीं पा रहे है। कुछ बोलने और कुछ रोजमर्रा जिंदगी का काम नहीं कर पाते हैं।

-जैतपुर गांव की कुल आबादी करीब 5460 है। 600 घरों वाले इस गांव में 1260 नाबालिगों की संख्या है, जबकि 4200 की आबादी बाकी लोगों की है। हेल्थ विभाग की टीम ने गांव के 350 घरों का अब तक सर्वे किया है। इस सर्वे में 104 दिव्यांगों की पहचान की गई है। गांव के 250 घरों में अब तक सर्वे टीम नहीं पहुंची है।


मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हैं दोनों बेटे

-मजदूरी करने वाले हबीबुल्लाह के बेटे करीम खान और सफल खान मानसिक रूप से बीमार हैं। दोनों की शादी की उम्र हो गई, मगर वह मां-बाप के सहारे ही जिन्दा हैं। दोनों बेटों से बड़ी बेटी जोहरा दाएं पैर से दिव्यांग है। तीन साल पहले उसका निकाह हुआ। ससुराल वालों को जब पता चला, तब वो जोहरा को मायके पहुंचा गए। उसके बाद से पिता हबीबुल्‍लाह दिल के मरीज हो गए हैं।

-हबीबुल्‍लाह ने बताया- "आज तक इनके दर्द को समझने के लिये कोई नहीं आया। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से इनको कोई सुविधा मिली। घर में जितने रूपये थे वह बच्‍चों के इलाज में खर्च हो गये लेकिन बच्‍चे ठीक नहीं हो सके। दिव्यांगता ने इस गांव की खुशियों को छीन लिया है।"

-कुछ ऐसी ही दास्‍तां इसी गांव की रहने वाली सलीमुन्निशा की भी है। सलीमुन्निशा के घर के तीन बच्‍चे दिव्यांग हैं। इनकी दो नतिनी शारिरिक रूप से विकलांग हैं और एक पौत्र मानसिक रूप से। चलने-फिरने में पूरी तरह से असमर्थ यह बच्‍चे किसी तरह से अपनी जिंदगी काट रहे हैं। इनकी उम्र 10 से 12 साल की है।

-घरवालों के पास जितने पैसे थे वह इनके इलाज में खर्च कर दिये पर बच्‍चे ठीक नहीं हो पाये। आज तक किसी तरह की कोई सरकारी योजना का लाभ इस परिवार को नहीं मिल सका है। इसी गांव की मरजीना के दो बच्‍चे भी दिव्यांगता का अभिशाप झेल रहे हैं। इनकी 10 साल की बेटी आसना और 5 साल का बेटा मुंतजीर दोनों मानसिक रूप से दिव्यांग हैं।

मासूम से लेकर बुजुर्ग तक दिव्यांग

-इस गांव में दो साल के बच्चे से लेकर 30 साल के युवा दिव्यांग हैं। इस वजह से कई परिवारों का सामाजिक रुप से बहिष्कार कर दिया गया है। युवक-युवतियों की शादी नहीं हो पा रही है।

प्रधान ने शुरू किया सर्वे

-गांव का ये आंकड़ा जब पता चला तब प्रधान पति और समाजसेवी उपेन्‍द्र कुमार ने गांव में स्‍कूल नहीं जाने वाले बच्‍चों का सर्वे कराना शुरू किया। कई घरों में जब सर्वे करने पहुंचे तो पता चला कि बच्‍चे दिव्यांग होने की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।


नहीं मिली सरकारी सुविधाएं

-उपेन्‍द्र ने यह रिपोर्ट जिले के अफसरों को दी है। गांव पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि इस गांव में दिव्यांग बच्‍चों और बड़ों को अभी तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। इस संबंध में सीएमओ रविन्‍द्र कुमार का कहना है- "मैंने अपनी टीम भेजकर जांच कराई है। इतने बड़े गांव में दिव्‍यांगों की यह संख्‍या सामान्‍य है।"

एक्सपर्ट ने कहा- जांच होनी चाहिए

-जैतपुर गांव में दिव्यांगता के बारे में डॉ आर एन सिंह ने कहा, "ये जांच का विषय है।आखिर क्यों उस टोले में इनकी संख्या ज्यादा है। डॉक्टरों की एक बड़ी टीम जांच के लिए गांव में भेजकर जांच करानी चाहिए। ये दिव्यांगता न तो पानी से हो रहा है, न गंदगी। ये जांच का विषय है।

कुछ चलने में असमर्थ है तो कुछ बोलने और खुद की रोजमर्रा की जिंदगी का भी काम नहीं कर पाते हैं। कुछ चलने में असमर्थ है तो कुछ बोलने और खुद की रोजमर्रा की जिंदगी का भी काम नहीं कर पाते हैं।
गांव में सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। गांव में सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है।
104 people Divyaag in a village in Gorakhpur
104 people Divyaag in a village in Gorakhpur
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इस टोले के 104 बच्‍चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं।इस टोले के 104 बच्‍चे मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं।
कुछ चलने में असमर्थ है तो कुछ बोलने और खुद की रोजमर्रा की जिंदगी का भी काम नहीं कर पाते हैं।कुछ चलने में असमर्थ है तो कुछ बोलने और खुद की रोजमर्रा की जिंदगी का भी काम नहीं कर पाते हैं।
गांव में सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है।गांव में सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है।
104 people Divyaag in a village in Gorakhpur
104 people Divyaag in a village in Gorakhpur
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