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20 साल बाद योगी के हाथ से निकला गोरखपुर, SHOCKING हार के 5 कारण

5 बार से लगातार सांसद रहने के बाद भी योगी अपनी सीट बचाने में असफल रहे।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 06:00 PM IST

गोरखपुरः 5 बार से लगातार सांसद रहने के बाद भी योगी गोरखपुर सीट नहीं बचा पाए। सपा के प्रवीण निषाद ने 21,881 वोटों से जीत दर्ज की। प्रवीण को कुल 4,56,513 वोट जबकि बीजेपी प्रत्याशी उपेन्द्र दत्त शुक्ल को 4,34,632 वोट मिले। भाजपा प्रत्‍याशी ने कहा, ऐन मौके पर सपा-बसपा के गठबंधन के कारण हार हुई है। वे इसे स्‍वीकार करते हैं। बता दें, गोरखपुर में योगी ने 17 जनसभाएं कीं। इतना ही नहीं, 14 मंत्री, 8 सांसद और 10 विधायक भी CM सिटी में डटे रहे। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव ने यहां एक जनसभा की थी। dainikbhaskar.com ने सीनियर जर्नलिस्ट प्रदीप कपूर, श्रीधर अग्निहोत्री और गोरखपुर के जर्नलिस्ट रशाद लारी से हार के कारणों को जाना...।

योगी के हाथ से क्यूं निकल गया गोरखपुर, ये हैं 5 बड़े कारण

कारण नं. 1- गोरखपुर वीआईपी सीट से ज्यादा मठ से आए योगी की सीट मानी जाती रही है। ऐसे में योगी खुद चुनाव लड़ते तो मठ के प्रति लोगों की आस्था होती लेकिन किसी दुसरे कैंडिडेट के प्रति वह दिखाई नहीं दिया। जनता का यह रुझान मतदान के दिन ही साफ हो गया था जब 43% वोटिंग हुई।


कारण नं. 2- गोरखपुर में ठाकुर और ब्राह्मणों के बीच का वैमनस्य भी नहीं छुपा है। ब्राह्मणों को मानाने के उद्देश्य से उपेन्द्र दत्त शुक्ला को उतारा तो लेकिन वह रिस्पांस नहीं मिला जो योगी को मिलता था।


कारण नं. 3- लोकल मुद्दों पर सिर्फ बयानबाजी ने भी बीजेपी को नुकसान पहुंचाया। जैसे- मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी से हुई बच्चों की मौत। उसपर बीजेपी नेताओं की गलत बयानबाजी के साथ अभी तक एम्स प्रोजेक्ट की शुरुआत भी नहीं हो पाई। इतना ही नहीं, फर्टिलाइजर फैक्ट्री का भी कहीं पता नहीं है। हालांकि, सीएम योगी एम्स और फर्टिलाइजर फैक्ट्री को उपलब्धियों में गिनाते रहे हैं।


कारण नं. 4- ओवरकॉन्फिडेंस के चक्कर में बीजेपी ने कोई स्ट्रेटजी नहीं बनाई थी। जब योगी चुनाव लड़ते थे तो उनके पर्चा भरने से पहले ही मान लिया जाता था कि वह जीत जाएंगे। इस बार भी योगी वन मैन आर्मी बनकर चुनाव जिताने उतरे थे। गोरखपुर में जब सपा ने निषाद पार्टी और पीस पार्टी से एलायंस किया तो बीजेपी को सवर्ण कैंडिडेट नहीं उतारना चाहिए था क्योंकि 1998 के बाद पहली बार जनता के बीच चर्चा हो गई कि अबकी बार सपा और बीजेपी में लड़ाई है, जिसका नतीजा सामने है।


कारण नं. 5- बीएसपी के साथ-साथ निषाद पार्टी और पीस पार्टी से गठजोड़ से सपा को फायदा हुआ। गोरखपुर में निषाद 18.37% हैं, जबकि मुस्लिम 10.50% । सपा का माने जाने वाला मुस्लिम वोट बैंक के अंदर भी सब कास्ट अंसारी हैं। यह गोरखपुर में पीस पार्टी का वोट बैंक माना जाता है, चूंकि कांग्रेस लड़ाई से बाहर थी तो मुस्लिम वोटों का बिखराव भी नहीं हुआ, जिसका फायदा सपा को मिला।

क्यों हुए गोरखपुर-फूलपुर सीट पर चुनाव?

गोरखपुर: योगी आदित्यनाथ यहां से लगातार 5 बार सांसद चुने गए। यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 21 सितंबर, 2017 को सीट छोड़ दी।


गोरखपुर में किनके बीच हुआ मुकाबला?

बीजेपी उम्मीदवार - उपेंद्र दत्त शुक्ल, केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ला के करीबी।
सपा+बसपा का उम्मीदवार - प्रवीण निषाद, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे हैं।

नोट- पिछली बार इस सीट पर बीजेपी के योगी आदित्यनाथ जीते थे। योगी 1998-99, 1999-2004, 2004-2009, 2009-2014, 2014-2017 लगातार 5 बार सांसद रहे।