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8Yr की उम्र में लड़के ने बचाई थी 8 बच्चों की जान, अब इस वजह से है परेशान

गोरखपुर के रहने वाले ओम प्रकाश ने अपने खेलने कूदने वाले उम्र में 8 जिंदगियों को बचाई थी।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 03:02 PM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से अवॉर्ड लेते हुए। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से अवॉर्ड लेते हुए।

गोरखपुर. 26 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देश के 18 बच्चों को राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। इस अवसर पर एक शख्स ऐसा है, जिसने 11 साल की उम्र में 8 बच्चों की जान बचाई थी। जिसके लिए उसे पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के हाथों वीरता पुरस्कार भी मिला चुका है। दरअसल, आजमगढ़ जिले के रहने वाले ओम प्रकाश के पास राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लगाए तमाम ऐसे लोगों के हाथों सम्मानित सर्टिफिकेट और गोल्ड मैडल है, जो आज उनके किसी काम के नहीं। DainikBhaskar.com से बातचीत के दौरान ओम प्रकाश ने बताया कैसे बचाई थी बच्चों की जिंदगियां। जलती गाड़ी को छोड़ भाग गया था ड्राइवर...


- ओम प्रकाश यादव का जन्म आजमगढ़ के एक छोटे से गांव में हुआ हैं। ओम के पिता लाल बहादुर यादव गुजरात में ऑटो चला के अपने परिवार का भरण-पोषण करते है।
- उन्होंने बताया कि घटना 4 सितंबर 2010 की है। जब वह क्लास 7th में पढ़ते थे। स्कूल की छुट्टी के बाद वैन से घर जा रहे थे। उस समय वैन में ड्राइवर समेत 9 बच्चे थे।
- वैन एलपीजी गैस और पेट्रोल दोनों से चल रही थी। वैन जैसे ही मेरे घर के पास पहुंची उसमें एकाएक लीकेज होने लगा और धुंआ निकलने लगा। देखते ही देखते उसमे आग लग गई।
- गाड़ी में आग लगते ही ड्राइवर वैन छोड़कर भाग गया। इसके बाद मैं तुरंत गाड़ी से बाहर निकला और जल्दी-जल्दी सभी बच्चों को उसमें से बाहर निकाला।
- उस दौरान मेरा चेहरा और शरीर काफी जल गया था। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मुझे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से डॉक्टरों ने मुझे बीएचयू रेफर कर दिया।
- पापा ऑटो चलाते थे इसलिए उनके पास मेरे इलाज के लिए पैसे नहीं थे तो उन्होंने ढाई लाख का लोन भी लिया था।
- वहीं, इस पूरी घटना के बाद एमपी और एमएलए मुझसे मिलने अस्पताल भी आए थे और इलाज का आश्वासन देकर गए थे। लेकिन शासन और प्रशासन की तरफ से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली थी, बस अवार्ड दे दिया गया।


आगे पढ़िए किस वजह से परेशान है ओम प्रकाश...

- ओम प्रकाश गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय में बीटेक फस्टियर के स्टूडेंट हैं। कॉलेज में एडमिशन तो भारत सरकार के कोटे से हुआ, लेकिन फीस नॉर्मल बच्चों की तरह लगता है। फीस के पैसों को जुटा पाना दूर की कौड़ी साबित हो रही है।
- उन्होंने बताया कि साल 2010 में मैं जला और 2012 में मुझे अवार्ड दिया गया। उस समय स्टेट में सपा की सरकार थी, उससे भी गुहार लगाया लेकिन कुछ भी मदद नहीं मिली।

-  इसके बाद मैंने भिक्षाटन का कदम उठाया तो डीएम ने एक टीम को गठित किया। उस टीम में सीडीओ और तमाम तरह के अधिकारी मेरे घर पाए और मुझसे पूरी जानकारी लेकर गए, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। आज पढ़ाई के लिए मेरे पास पैसे नहीं है।

 

 

आगे कि स्लाइड्स में पढ़िए क्या कहता है कॉलेज प्रशासन

ओम प्रकाश मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं। ओम प्रकाश मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं।


- वहीं, मदन मोहन मालवीय इंजीनियर कॉलेज के कुलपति ने कहा, "हमारे यहां हर बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था है। जो भी स्टूडेंट स्कॉलरशिप का फार्म भरता है तो उस फार्म के सत्यापन के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग से उसे पैसे मिलते हैं। उनमे से कुछ पैसे उसकी ट्यूशन फीस हो जाएगी और कुछ स्कॉलर फीस मिल जाएगी, जो उसके लिए लाभदायक होगा। ओम प्रकाश के लिए सरकार से बात करके और जितनी मदद हो सकता है मैं करूंगा।"