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पहले खुद को बोझ समझते थे ये दिव्यांग, आज चलाते है एेसी कंपनी

11 दिव्यांगों ने मिलकर अंश लघु कृषक उत्पादक लिमिटेड नामक कंपनी की स्थापना की है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 30, 2017, 03:16 PM IST

    • यह लोग प्राकृतिक खेती के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए नजीर बनते जा रहे हैं।

      महराजगंज. यहां कुछ दिव्यांगों ने अपनी मेहनत और लगन की दम पर एक शानदार मिसाल पेश की है। दरअसल, यहां के 11 दिव्यांगों ने मिलकर अंश लघु कृषक उत्पादक लिमिटेड नामक कंपनी की स्थापना की है। जिसमें उन्होंने अपने साथ 450 किसानों को भी जोड़ा लिया है। यह जैविक कृषि को आधार बनाकर कृषि उत्पाद तैयार करते हैं। जहां से उत्पाद, आटा, मसाले, चावल को सुव्यवस्थित पैकेजिंग के बाद बाजार में उतार दिया जाता है। जैविक खेती के माध्यम से ये दिव्यांग जहां एक तरफ आर्थिक मजबूती पा रहे हैं। वहीं, इनको देख कर जिले के अन्य किसान अब जैविक खेती की तरफ अपना रूख करने लगे हैं। दिव्यांग महिलाएं भी करती है काम...

      - ये दिव्यांग भले ही शारीरिक रूप से सामान्य न हों लेकिन इनकी इक्षाशक्ति ने समाज के अन्य लोगों को प्रेरणा देने का काम किया है। इनके साथ दिव्यांग महिलाएं भी काम कर रही हैं।
      - इन 11 दिव्यांगों ने मिलकर जैविक खेती शुरू की और आज इनके उत्पाद की मांग जोरों पर है।
      - इन उत्पादों में गेंहूं, धान, हल्दी और धनिया समेत अन्य मसाले शामिल हैं। फसली उत्पादों की कीमत अन्य रासायनिक खादों की अपेक्षा ज्यादा होने के नाते इनका मुनाफा भी ज्यादा हो रहा है।
      - यह लोग प्राकृतिक खेती के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए नजीर बनते जा रहे हैं।

      अब चलाते है घर खर्च
      - दिव्यांग रामप्रीत ने बताया कि यहां पर 11 लोग काम करते हैं। सब दिव्यांग है, जैविक खेती से उत्पन्न चावल, गेहूं, धनिया, हल्दी मसाला की पिसाई करने के बाद पैकिंग किया जाता है। फिर उसे मार्केट में बेचा जाता है।
      - इससे हम बहुत खुश हैं। पहले हम कुछ काम नहीं कर पाते थे और आज 400 से 500 रुपए कमाकर अपने परिवार का खर्चा भी चला लेते हैं। अब हमारे साथ किसान भी जुड़े हुए हैं।

      "पहले हम अपने को बोझ समझते थे"

      - वहीं, दिव्यांग संजय का कहना है कि पहले हम घर पर रहकर कुछ नहीं कर पाते थे। कुछ लोग हमारे पास आए और जैविक खेती के बारे में बताया। उसके बाद हम गांव से धान, हल्दी, धनिया, गेहूं, और मसाला खरीद कर लाए और साफ सुथरा करके उसे मार्केट में बेचा। जिसका रिस्पांस हमें बहुत अच्छा मिला।
      - हमें जैविक खेती से फायदा मिल रहा है। इससे लोगों को बीमारियां नहीं होती और यह शुद्ध होता है। जैविक खेती के वाले सामान को मार्केट में हम 2 रुपए महंगा भी बेचते हैं।
      - हमारे पास इस समय बहुत अच्छा ऑर्डर भी आया है। लोगों को हमारा समान पसंद भी आ रहा है। इसे हम और बड़ा करने की सोच रहे हैं। इससे पहले हम अपने को बोझ समझते थे, लेकिन अब हमें एक मुकाम मिल गया है जिससे हमें और बढ़ाना है।

      सामाजिक संगठन भी दे रहा साथ

      - इन 11 दिव्यांग महिला और पुरूषों ने एक कंपनी भी बना ली है और इनको बाजार से अच्छा आर्डर मिल रहा है। इनकी लगन से प्रभावित होकर कुछ सामाजिक संगठनों ने भी हौसला आफजाई के लिए हाथ बढ़ाया है।

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      इनके साथ दिव्यांग महिलाएं भी काम कर रही हैं।
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      जैविक कृषि को आधार बनाकर कृषि उत्पाद तैयार करते हैं।
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      विक खेती के माध्यम से ये दिब्यांग जहां एक तरफ आर्थिक मजबूती पा रहे हैं।
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      उन्होंने अपने साथ 450 किसानों को भी जोड़ा लिया है।
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