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बिना सरकारी मदद के इस शख्स ने बदल दी गांव की किस्मत, आज बना मिसाल

महराजगंज में एक गांव का मुख‍िया गांव को शौच मुक्त बना दिया है।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 01:23 PM IST

महराजगंज. यहां मोहद्दीनपुर के ग्राम प्रधान योगेंद्र यादव ने बिना किसी सरकारी मदद से लगभग हर घर में शौचालय बनवाकर मिशाल पेश की है। गांव के लोगों को प्रत्साहित करके उनसे श्रमदान करवाते हैं। आज गांव की महिलाएं भी लोगों को खुले में शौच करने से रोकती है।

ऐसी थी गांव की हालत...

- यहां पनियरा ब्लॉक का मोहद्दीनपुर गांव की आबादी लगभग 1600 की है। पहले गांव की सड़क पर इतनी गंदगी होती थी कि आने जाने वाले को कूद-कूद जाना पड़ता था।
- आज ग्राम प्रधान योगेंद्र की पहल से गांव की कायाकल्प ही बदल गई है। योगेंद्र पहले इस बात से परेशान होते थे कि गांव की बहू-बेटियां घर से बाहर शौच के लिए जाती है।
- ऐसे में किसी शुभचिंतक ने उन्हें गांव की प्रधानी लड़ने की सलाह दी। अपने कार्यों व प्रयासों के बल पर ये प्रधान बन गए। प्रधान बनने के बाद बिना किसी सरकारी मदद से अपने गांव के लोगो को समझाया कि खुले में शौंच न करें, कूड़े को इधर-उधर न फेंके।
- इन्होंने लोगों शौचालय बनावाने के समझाया, जिनके पास पैसे नहीं थे, उनके लिए चंदा इकट्ठा कर उनकी मदद की। सफाई पर काम करने का असर भी हुआ, अब इस गांव में साफ सफाई दिख रही है, लगभग हर घर मे शौचालय बन गया है। इस गांव के लोग सफाई के लिए रोज एक घंटा श्रमदान करते हैं।
- महराजगंज जिला पूर्वांचल के अति पिछड़े इलाके में आता है। यहां जापानी बुखार से पीड़ित मरीज की संख्या ज्यादा है। ऐसे में ग्राम प्रधान ने अपने प्रेरणा से गांव के हर घर में शौचालय निर्माण कराके जापानी बुखार से लड़ने के लिए अच्छा उदाहरण पेश किया है।

लोगों ने क्या कहा
- प्रधान, योगेंद्र यादव ने कहा, ''पढ़ाई के दौरान से ही मुझे गांव की स्थ‍िति बहुत दयनीय लगती थी। प्रधान बनाने के बाद मुझे मौका मिला, हमनें लोगों को प्रत्साहित करके श्रमदान करने को कहा। गांव के लोग तैयार भी हुए, जिससे गांव में सफाई अभियान शुरू हो गया।''
- स्थानीय निवासी, पुष्पा देवी ने कहा, ''पहले गांव में बहुत गंदगी होती थी। जबसे योगेंद्र प्रधान बनें है तबसे गांव में बहुत सफाई रहती है। हम लोग खुद लोगों को सीटी बजाकर खुले में शौच करने से रोकते हैं।''
- महराजगंज, डीपीआरओ मनोज त्यागी ने कहा, ''योगेंद्र अपने गांव के बहुत अच्छे प्रधान हैं, रोज सुबह 30-35 लोगों को लेकर गांव में झाडू लगाते है। पहले गांव में जाने का रास्ता नहीं होता था, गंदगी के कारण गांव में कूद-कूद कर जाना पड़ता था। आज उस रास्ते पर बैठकर खाना खा सकते हैं।''
- ''इन्होंने गांव के लोगों प्रेरित करके घर-घर में शौचालय बनावाया, इसके लिए इन्हें सरकार से एक रूपए नहीं मिला है।''