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12 की उम्र में बचाई थी 14 लोगों की जान, आज अपना दर्द बताने को मजबूर

बस्ती के भीमसेन ने नवंबर 2014 में नाव पलटने पर 14 लोगों की जान बचाई थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 26, 2018, 11:26 AM IST

    • 14 लोगों की जान बचाने पर PM ने वीरता पुरस्कार दिया था।

      बस्ती (यूपी).यहां बहादुर बेटे भीमसेन महज 12 साल की उम्र में घाघरा नदी में नाव पलटने पर 14 लोगों की जान बचाई थी। उस समय वह क्लास 7 का स्टूडेंट था। इस काम के लिए उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे 26 जनवरी 2015 को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था। सम्मान पाने के बाद अधिकारियों ने गांव में जरूरी सुविधाएं दिलाने का वादा किया था लेकिन आज तक कोई काम नहीं हो सका।

      14 लोगों की बचाई थी जान...

      - नवंबर 2014 में घाघरा नदी में नांव पलटने गई। इस दौरान कलवारी थाना क्षेत्र के डकही गांव के भीमसेन ने नदी में कूद कर 14 लोगों की जान बचाई थी। उस वक्त इसकी उम्र महज 12 साल थी।
      - लोगों की जान बचाने के कारण प्रधानमंत्री ने भीमसेन को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके बाद डीएम ने गांव का दौरा किया और मलभूत सुविधा देने का वादा किया।
      - 3 साल गुजर जाने के बाद भी आज गांव की हालत वैसे की वैसे है। भीम का परिवार आज भी गरीबी की वजह से छप्पर के मकान में रहने को मजबूर है। पात्र होने के बावजूद भी उसे सरकारी आवास तक नहीं दिया गया।

      अधिकारियों के ऑफिस लगा रहा चक्कर
      - भीम आवास और अन्य सुविधाओं के लिए पिछले 2 साल से अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहा है, लेकिन कोई सुविधा नहीं मिल रही है। घर की आर्थिक स्थि‍ति ठीक न होने के कारण सही से पढ़ाई भी नहीं कर पा रहा है।
      - छप्पर के मकान में गैस चूल्हा न होने की वजह से चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर है। परिजनों का कहना है, ''जब मेरे लड़के को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया तो बहुत से अधिकारी घर आए थे।''
      - ''अधिकारी बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए आश्वासन भी दिया, लेकिन आज तक कोई सरकारी लाभ नहीं मिला।''

      गांव में नहीं कोई सुविधा
      - भीमसेन ने कहा, ''राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। घर पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। आजादी के बाद से आज तक बिजली की गांव में सप्लाई नहीं पहुंची।''
      - ''शुद्ध जल के लिए सरकारी हैंड पंप तक नहीं है, पूरा गांव दूषित जल पीने को मजबूर हैं। सरकारी राशन भी समय पर नहीं मिलता है। गांव में टॉयलेट न होने के कारण लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।''

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      भीमसेन के गांव में मूलभूत सुविधा का अभाव है।
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