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रिटायर CMO ने खुद को मारी गोली, जा चुकी है 10 से अधिक जानें

गोरखपुर अपने आवास पर पूर्व CMO ने खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया।

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2018, 07:20 PM IST
परिजनों ने बताया -पीके श्रीवास परिजनों ने बताया -पीके श्रीवास

गोरखपुर (यूपी). यहां बुधवार को गोरखनाथ इलाके में हेल्थ विभाग ने रिटायर्ड सीएमओ ने खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया। मृतक डॉ. पीके श्रीवास्तव के खिलाफ एनआरएचएम घोटाले मामले में सीबीआई जांच कर रही थी। पुलिस ने रिटायर्ड सीएमओ की डेडबॉडी को शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।ये है पूरा मामला...

- डॉक्टर पीके श्रीवास्तव कई जगह सीएमओ रह चुके थे। डॉ. पीके 2010 में हेल्थ डिपार्टमेंट में सीएमओ पद से रिटायर हो गए थे। उस वक्त सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। इसी बीच एनआरएचएम घोटाले में इनका नाम आया और तभी से सीबीआई इनसे पूछताछ कर रही थी।

- बहू एकता ने कहा, ''पूछताछ के दौरान इनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। सीबीआई भी बार-बार पूछताछ के लिए बुलाती रही। 15 जनवरी को इन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तभी से ये डिप्रेशन में थे।''
- एसपी सिटी विनय कुमार सिंह ने कहा, ''घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई। डेडबॉडी के पास से लाइसेंसी बंदूक भी मिला है। डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।''

घर पर मौजूद थे बेटा-बहू और पौत्र
- डॉ. पीके श्रीवास्तव के 3 बच्चे हैं। एक बेटा और दो बेटी। सभी की शादी हो गई है। बेटा पंकज दंत चिकित्सक और बरगदवा के विकास नगर तथा हुमायूंपुर के सुभाष नगर में देवास डेंटल क्लीनिक चलाते हैं।
- घटना के वक्त वह क्लीनिक जाने की तैयारी कर रहे थे जबकि बहू एकता ससुर के लिए नाश्ता बना रही थी। पंकज के दोनों बेटे घर पर अपने कमरे थे। इस बीच गोली की आवाज पर सभी कमरे की ओर दौड़ पड़ें। तब मामले की जानकारी हुई।

क्या है NRHM घोटाला
- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) योजना में यूपी में करीब 8657 करोड़ का फंड दिया था। लेकिन इस पैसे में से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, डॉक्टरों ने 5 हजार करोड़ आपस में ही बंदरबांट कर दिए।
- इस बात का खुलासा कैग की रिपोर्ट में हुआ। कैग की रिपोर्ट में बड़ा घोटाला होने की आने के बाद इस घोटाले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई। इसके बाद घोटाले में मंत्री,नेता और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी सामने आए। घोटाले से जुड़े 3 एमएमओ सहित तकरीबन 10 लोगों की जान जा चुकी है।

कैग रिपोर्ट में उजागर हुआ घोटाला
- कैग की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2005 से मार्च 2011 तक एऩआरएचएम में 8657.35 करोड़ का फंड मिला था। जिसमें 4938 करोड़ रुपये नियमों की अनदेखी कर खर्च किए गए थे।
- इस घोटाले पर कैग की करीब 300 पेज की रिपोर्ट में 1085 करोड़ रुपेय का भुगतान बिना किसी हस्ताक्षर के दिया गया। 1170 करोड़ का ठेका चहेते लोगों को दिया गया। पैसे के खर्च से जुड़े सीवीसी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया।
- केंद्र से मिले 358 करोड़ और ट्रेजरी में जमा कराए गए 1768 करोड़ रुपेय का सीएजी को कोई हिसाब नहीं मिला था। सीएजी ने 23 जिलों में एनआरएचएम घोटाले की जांच की थी। एनआरएचएम घोटाले में नर्से और स्टाफ भर्ती, जननी सुरक्षा योजना, एंबुलेंस खरीद में घोटाला हुआ है।

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