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इस मंदिर में कुंती ने की पहली बार पूजा, अब लगती है भक्तों की भीड़

संतकबीर नगर में बाबा तामेश्वरनाथ का धाम का मंदिर है।

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 03:08 PM IST

संतकबीर नगर (यूपी). गोरखपुर से 60 किमी दूर खलीलाबाद में बाबा तामेश्वरनाथ का धाम का मंदिर है। मान्यता है कि जंगल के बीच बसा ये मंदिर सभी की मनोकामनाएं पूरी करता है। बाबा के दर्शन मात्र से ही भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान के इस जगह पर उत्पत्ति के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है।

कुंती ने की थी सबसे पहले शिवलिंग की पूजा...


- द्वापर युग में पांडवों को लाक्षागृह में जलाकर मारने की कोशिश नाकामयाब हो गई थी। पांडव अपना अज्ञातवास पूरा करने के लिए विराटनगर जा रहे थे। तभी यहां पर आकर उन्‍होंने आराम किया था।
- पांडवों की मां कुंती महादेव की भक्त थीं। उन्होंने यहां पर प्राकृतिक रूप से निकले शिवलिंग की पूजा की और बेटों के लिए प्रार्थना की। उसी समय से यहां पर भगवान तामेश्वर की पूजा-अर्चना की जाती है, जो आज भी जारी है।

ऐसे पड़ा तामेश्वरनाथ धाम का नाम
- मंदिर के पुजारी शिवदत्त भारती ने कहा, ''भगवान शिव का नाम तामेश्वर इसलिए पड़ा, क्योंकि आदिकाल में ये नगर ताम्रगढ़ के नाम से जाना जाता था।''
- ''औरंगजेब के शासनकाल में जब हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाने लगा तो लोग यहां से भागकर नेपाल चले गए। जो बच गए, वे बाबा की शरण में आ गए। इसके बाद शिवजी ने उनकी रक्षा की। इसी वजह से उन्हें तामेश्वरनाथ के नाम से जाना जाने लगा।''

सरयू नदी से जल लेकर करते हैं जलाभिषेक
- शिवभक्त सावन और शिवरात्री के महीने में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। श्रद्धालु 40 किमी दूर सरयू नदी से जल लेते हैं और ब्रह्ममुहूर्त में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।
- भोलेनाथ के दर्शन मात्र से भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है। लोग यहां पर घंटे चढ़ाते हैं और रामायण पाठ भी कराते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अकाल या सूखा पड़ने पर लोग यहां शिवलिंग पर दूध चढ़ाते हैं। इसके बाद बाबा की कृपा से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

सरोवर में स्नान करने बाद करते हैं बाबा के दर्शन
- इस मंदिर के पास करीब एक दर्जन शिव मंदिर हैं। साथ ही परिसर के पास विशाल सरोवर भी है। इसमें स्नान करने के बाद ही भक्त बाबा के दर्शन करने जाते हैं।
- सावन, शिवरात्रि और नागपंचमी के मौके पर यहां काफी तादाद में शिवभक्त आते हैं। भारत के अलावा नेपाल और दूरदराज से भी लोग यहां आकर बाबा के दर्शन कर आर्शीवाद लेते हैं।''