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दोनों पैर हैं बेकार, लोग उड़ाते थे मजाक-अब देश के लिए जीता सिल्वर मेडल

सूर्य प्रताप शर्मा ने पोलैंड में आयोजित आर्म रेसलिंग वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीता है।

आदित्य कुमार मिश्र | Last Modified - Feb 02, 2018, 12:59 PM IST

    • 24 साल के सूर्य प्रताप शर्मा इंटरनेशनल लेवल के पैरा आर्म रेसलर हैं।

      गोरखपुर. यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले 24 साल के सूर्य प्रताप शर्मा इंटरनेशनल लेवल के पैरा आर्म रेसलर (पंजा कुश्ती) हैं। उन्होंने 22 नवंबर 2017 को पोलैंड के रूमिया शहर में आयोजित पैरा आर्म रेसलिंग वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीता है। इस इवेंट में 85 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। सूर्य ने उन्हें हराते हुए ये पदक अपने नाम किया। दोनों पैर नहीं करते काम...

      बता दें कि सूर्य प्रताप दोनों पैर से दिव्यांग हैं। लखनऊ के शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई कर चुके सूर्य ने DainikBhaskar.com से खास बातचीत की और अपने लाइफ के स्ट्रगल और अचीवमेंट्स को शेयर किया। सूर्य प्रताप ने बताया कि कैसे लोग उन्हें बचपन में विकलांग कहकर मजाक उड़ाते थे और कोई भी अपनी बच्चे को उनके साथ खेलने नहीं देता था।

      बचपन में हुआ पोलियो

      - सूर्य बताते हैं- "मेरा जन्म 15 जनवरी 1994 को देवरिया के मुराडीह गांव में हुआ था। पिता मुनीब प्रसाद गन्ना अनुसंधान संस्थान में क्लर्क थे। 2015 में उनकी डेथ हो गई थी।

      - "मां सावित्री हाउस वाइफ हैं। मेरे पांच भाई-बहनों मैं सबसे छोटा हूं। मैं जब डेढ़ साल का था तब मुझे बुखार हुआ। इसके बाद दोनों पैर में पोलियो हो गया। दस साल तक वाराणसी के बीएचयू हॉस्पिटल में इलाज चला, लेकिन पैर ठीक नहीं हो पाए।"

      आगे की स्लाइ़ड्स में जानें क्यों सूर्य प्रताप को छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई और फिर कैसे हासिल किया ये मुकाम...

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      बचपन में छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई

      - सूर्य प्रताप शर्मा ने बताया कि- "9वीं तक पढ़ाई काफी मुश्किल हालत में हुई। चलने-फिरने में काफी मुश्किल होती थी। दूसरे बच्चों की तरह प्रैक्टिकल और अन्य कामों में ठीक से पार्टीसिपेट नहीं कर पा रहा था। इस कारण मैंने 2009 में दसवीं की पढ़ाई छोड़ दी।"

      - "घरवालों ने मेरा काफी हौसला बढ़ाया, तब मैंने अपनी विकलांगता को इग्नोर कर एक साल बाद 2019 में 10वीं में अपना एडमिशन कराया और बोर्ड का एग्जाम दिया। मैं सेकेंड डिविजन से पास हो गया।"

      लोगों उड़ाते थे मजाक

      सूर्य प्रताप बताते हैं- "बचपन में मेरा मन अन्य बच्चों के साथ खेलने को करता था, लेकिन चाहकर भी उनके साथ खेल नहीं पाता था। मुझे सभी लोग अपने बच्चों के साथ खेलने से मना कर देते थे।"

      - "मैं जब कोई भारी-भरकम काम किसी के सामने करने की इच्छा व्यक्त करता था तब लोग मुझे विकलांग कहकर मेरा मजाक उड़ाते थे। मुझें तब बहुत दुःख होता था।"

      - "मेरे घरवाले मुझे कभी निराश नहीं होने देते थे। वे मोटिवेशनल बातों से मेरा हौसला बढ़ाते रहते थे। वहीं से मैंने तय किया कि मैं दिन-रात कड़ी मेहनत करूंगा और अपने आप को साबित करूंगा।"

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      ऐसे मिला खेलने का मौका

      - सूर्य ने बताया- "इंटर की पढ़ाई करने के बाद मैं एक जॉब फेयर में गया हुआ था। वहां, कई स्पोर्ट्स के प्लेयर आए हुए थे। उनके साथ कोच भी थे। एक कोच ने मेरी बॉडी देखी और काफी तारीफ की। उन्होंने मेरा मोबाइल नंबर लिया और वहां से चले गये। बाद में उन्होंने मुझे दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 2014 में होने वाले पैरा आर्म रेसलिंग में ट्रायल देने के लिए बुलाया।"

      - "मैंने उसमें ट्रायल दिया और मेरा नेशनल गेम्स में खेलने के लिए सिलेक्शन हो गया। 2014 में ही पैरा आर्म रेसलिंग में पार्टिसिपेट किया और मुझे नेशनल लेवल के गेम्स में पहली बार गोल्ड मेडल मिला।"

      लोगों से मदद लेकर पहुंचे विदेश

      सूर्य बताते हैं- "मैं पहली बार 2016 में यूरोप के बुल्गारिया शहर में खेलने के लिए गया था। उस टाइम मेरे पिता की डेथ हो चुकी थी। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।"

      - "उस समय मैंने कई लोगों से आर्थिक मदद मांगी थी। लखनऊ के तत्कालीन डीएम राजशेखर ने तब 1 लाख 6 हजार रुपए मदद के तौर पर दिए थे। उसके बाद मैं यूरोप में खेलने के लिए जा पाया था।"

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      पैरा आर्म रेसलिंग में जीते ये अवॉर्ड

      -2014 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।

      -2015 में दिल्ली के खेल गांव में आयोजित पैरा आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मिला जीता।

      -2016 में नागपुर में आयोजित पैरा आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया।

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