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गैंगरेप के बाद प्राइवेट पार्ट में डाला रॉड, सात दिन तक पुलिस ने छिपाई वारदात

जिला अस्पताल के डॉक्टरों के कहने के बाद हुई एफआईआर, पीड़िता को भी पुलिस ने भिजवा दिया था घर।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 28, 2015, 03:29 PM IST

  • गोरखपुर. सहजनवां इलाके के समाधिया चौराहे पर 23 साल की एक मंदबुद्धि युवती से गैंगरेप के बाद आरोपियों ने उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाल दी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दाखिल युवती की हालत गंभीर है। पुलिस को वारदात की जानकारी तुरंत हो गई थी, लेकिन उसने इसे छिपा लिया। पीड़िता के घरवालों को भी पुलिसवालों ने समझा-बुझाकर घर भेज दिया था। मीडिया के लोगों को जब घटना की जानकारी मिली तो पुलिस से सवाल जवाब शुरू हुए। उसके बाद वारदात के आठवें दिन शनिवार को एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पुलिस रेप करने वालों को पकड़ने की कोशिश करती नहीं दिख रही है। वहीं, आला अफसर भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
    युवती सहजनवां इलाके के ही एक गांव की है। उसकी शादी साल 2012 में गोरखपुर के ही एक गांव में हुई थी। शादी के कुछ महीने बाद वह मानसिक रोगी हो गई। इस पर ससुरालवालों ने उसे मायके पहुंचा दिया। कुछ दिन पहले वह अपने ननिहाल गई थी। 20 जून की शाम वह अचानक लापता हो गई। घरवालों ने तलाश की, लेकिन युवती नहीं मिली। युवती के लापता होने की जानकारी पुलिस को भी दे दी गई थी। 21 जून के तड़के युवती समाधिया चौराहे पर बेहोश मिली।

    गैंगरेप के बाद दरिंदगी
    युवती को उस दिन देखने वालों के मुताबिक उसके शरीर पर खून लगा था। उसके प्राइवेट पार्ट के आसपास कपड़े खून से तर थे। शरीर को नोचा-खरोंचा गया था। जानकारी मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और युवती को सहजनवां के पीएचसी में दाखिल कराया। यहां डॉक्टरों को उसके प्राइवेट पार्ट में स्टिच भी लगानी पड़ी। खास बात ये कि पुलिस ने गैंगरेप पीड़िता के घरवालों को उसके इस हालत में मिलने की जानकारी भी नहीं दी। घरवालों को जब किसी तरह पता चला तो वे अस्पताल में उसे देखने पहुंचे। हालत देखते ही उन्हें रेप का शक हुआ।
    पुलिस ने दर्ज नहीं होने दी एफआईआर
    पीड़िता के पिता के मुताबिक युवती से उसकी चाची ने घटना के बारे में पूछा। उसके प्राइवेट पार्ट में हुआ घाव देखा और फिर घरवालों ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझा-बुझा दिया और एफआईआर दर्ज नहीं की। यहां तक कि पीड़िता को भी घर भिजवा दिया। युवती की हालत जब शुक्रवार को बिगड़ी तो घरवाले उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने कहा कि ये पुलिस केस है और वे एफआईआर कराएं। घरवाले फिर पीड़िता को लेकर सहजनवां थाने गए और मीडिया ने जब सवाल खड़े किए तो एफआईआर दर्ज हुई।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, पुलिस के अफसर भी हैं चुप...
  • पुलिस के अफसर भी हैं चुप
    युवती की हालत गंभीर है, लेकिन सात दिन तक मामला छिपाने के बाद एफआईआर दर्ज करने वाली पुलिस अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। यहां तक कि पुलिस के आला अफसर भी इस मामले में कुछ नहीं कह रहे हैं। इस गंभीर घटना के आरोपियों को पकड़ने में पुलिस ढुलमुल रवैया अपना रही है। एक बार भी कोई पुलिसवाला पीड़िता के ननिहाल नहीं गया है। वहीं, सवाल सहजनवां पीएचसी के डॉक्टरों पर भी है। पीड़िता को जब वहां लाया गया था तो आखिर उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का दवाब क्यों नहीं डाला।
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