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IPS ने ऐसे चेंज किया सरकारी स्कूल का लुक, हर हफ्ते खुद जाकर लेता है क्लास

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 10, 2017, 06:34 PM IST

गोरखपुर से 14 किमी दूर बसे गांव के स्कूल को आईपीएस मोहित ने किया है अडॉप्ट।
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    स्कूल के रेनोवेशन का काम इन्होंने डोनेशन के पैसों से किया है।
    गोरखपुर. शहर से लगभग 14 किमी दूर बसे जीतपुर गांव का प्राइमरी स्कूल अब हाइटेक नजर आता है। सीएम आदित्यनाथ योगी और अपने पिता से मोटिवेट होकर गोरखपुर आईजी पुलिस मोहित अग्रवाल ने इस स्कूल को अडॉप्ट किया। दो बिजनेसमैन और कुछ समाज सेवी संगठनों की हेल्प से उन्होंने स्कूल को शहर के कॉन्वेंट स्कूलों जैसा लुक दे दिया है। DainikBhaskar.com अपने रीडर्स को आईजी मोहित की इस पहल के बारे में बता रहा है।

    योगी और पापा से मिला मोटिवेशन, अडॉप्ट किया स्कूल

    - गोरखपुर के पिपरौली थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल में 8वीं क्लास तक की पढ़ाई होती है, जिसमें 500 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। आईजी मोहित अग्रवाल बताते हैं, "मैं मूलतः बरेली का रहनेवाला हूं। मेरे पिता वहां के फरीदपुर गांव के सरकारी स्कूल में मैथ्स टीचर थे। शुरुआत से ही मुझे टीचिंग में इंटरेस्ट था। इसी साल सीएम आदित्यनाथ योगी ने एक मीटिंग के दौरान सीनियर अधिकारियों द्वारा सरकारी स्कूल अडॉप्ट करने की बात कही। उनका कहना था कि ऐसे स्टेट की प्राइमरी एजुकेशन में सुधार लाया जा सकता है। मुझे उनका सजेशन अच्छा लगा और मैंने इस डायरेक्शन में काम शुरू कर दिया।"
    - "जीतपुर गोरखपुर से ज्यादा दूर नहीं है और यहां के स्कूल की हालत सच में काफी खराब थी। मुझे लगा कि इसी स्कूल से शुरू करना चाहिए। लगभग 18 मई को मैंने ऑफिशियली स्कूल को अडॉप्ट किया।"

    टूटे-फूटे फर्श से कलरफुल क्लासेस तक, ऐसा रहा ट्रान्सफॉर्मेशन

    - मोहित बताते हैं, "मैं जब पहली बार यहां आया तो यहां सिर्फ अंधेरा था। स्कूल में लाइट नहीं थी, फर्श भी टूटा-फूटा था। बच्चे जमीन पर बैठकर क्लास अटैंड करते थे। आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी काफी कम थी।"
    - "मेरे इस मिशन में यहां की लोकल बेकरी 'क्रेजी ब्रेड' के मालिक नवीन अग्रवाल और गोरखपुर के होटल क्लार्क के मालिक पवन बथवाल ने बहुत हेल्प की। इन दोनों ने मिलकर लगभग 6-7 लाख रुपए कॉन्ट्रिब्यूट किए। इन्ही पैसों से स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारा गया।"
    - "सबसे पहले पूरी बिल्डिंग के फर्श और कुछ दीवारों पर टाइल्स लगाए गए। दीवारों को डिफ्रेंट कलर्स से पेंट किया गया। एक दीवार ग्रीन दो दूसरी येलो कलर की पेंट की गई। बेंच और चेयर भी कलरफुल मंगवाई गईं, जिससे कॉन्वेंट जैसा लुक आए। जब काम शुरू किया तब स्कूल में गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं। छुट्टियों के दौरान ही रेनोवेशन का काम करवाया गया।"
    - "स्कूल के एक्सटीरियर को भी टाइल्स और पेंट की मदद से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की थीम पर बनवाया गया। टीचर्स के स्टाफ रूम भी नए सिरे से बनाए गए। स्कूल का लुक चेंज होने से स्टूडेंट्स और टीचर्स का इंटरेस्ट भी स्कूल की तरफ बढ़ने लगा।"
    - "स्कूल में टॉयलेट की व्यवस्था भी नहीं थी। इनर व्हील क्लब नाम के एनजीओ ने अपनी तरफ से टॉयलेट्स बनवाए। उन्होंने स्टूडेंट्स के बीच टी-शर्ट और लोअर भी डिस्ट्रीब्यूट किए।"

    खुद लेते हैं दो वीकली क्लास और टेस्ट, वाइफ भी देती हैं साथ

    - आईजी गोरखपुर अपने बिजी शेड्यूल से इस स्कूल के लिए टाइम निकालते हैं। पर्सनल इन्वॉल्वमेंट पर उन्होंने बताया, "मैं यहां वीक में दो बार आता हूं। विजिट्स के दौरान हम सभी टीचर्स के साथ मीटिंग करके बच्चों की प्रॉग्रेस ट्रैक करते हैं। हम टीचर्स को बच्चों को पढ़ाने के क्रिएटिव आइडियाज देते हैं। नेक्सट वीक कौन-से चैप्टर्स पढ़ाए जाने हैं, इस पर डिस्कशन होता है। साथ ही प्रीवियस वीक में पढ़ाए गए चैप्टर्स पर बेस्ड स्टूडेंट्स के टेस्ट लेते हैं। इससे स्टूडेंट्स और टीचर्स दोनों का टेस्ट हो जाता है।"
    - "मेरी वाइफ प्रेरणा अग्रवाल टीसीएस के लखनऊ ऑफिस की एचआर हेड हैं। टेस्ट पेपर बनाने में वो मेरी हेल्प करती हैं। साथ ही स्कूल में बच्चों से क्या एक्टिविटीज करवानी हैं, इसके आइडियाज भी वो देती हैं। उन्हीं के सजेशन पर हम स्कूल की लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग की प्लानिंग कर रहे हैं।"

    ऐसे मोटिवेट होते हैं बच्चे

    - आईजी गोरखपुर ने जीतपुर प्राइमरी स्कूल की हर क्लास में दो स्पेशल बोर्ड लगवाए हैं। पहले बोर्ड पर बच्चों के नाम के साथ 1-30 कॉलम बनाए गए हैं। डेली एक्टिविटीज और टेस्ट परफॉर्मेंस के आधार पर बच्चों को स्टार दिए जाते हैं। मंथ के एंड में सबसे ज्यादा स्टार हासिल करने वाले तीन बच्चों को सर्टिफिकेट और मेडल दिए जाते हैं।
    - दूसरा बोर्ड अटैंडेंस का है। सबसे ज्यादा अटैंडेंस हासिल करने वाले बच्चों को भी सर्टिफिकेट मिलता है। इससे बच्चे मोटिवेटेड रहते हैं।
    - इस स्कूल में हर शनिवार सिर्फ एक्टिविटी होती हैं। कभी रंगोली कॉम्पिटीशन, तो कभी मेहंदी प्रतियोगिता। 18 नवंबर को यहां पहली बार स्पोर्ट्स-डे मनाया जाएगा, जहां बच्चों के पेरेंट्स भी इन्वाइटेड हैं। ऐसे इवेंट्स देखकर वे बच्चों की प्रॉग्रेस खुद देख सकते हैं।
    - मोहित बताते हैं, "हमने गोरखपुर के बेस्ट स्कूल 'मे फ्लॉवर' से टाइ-अप किया है। यह सरकारी स्कूल 8वीं तक है। 8वीं में सबसे ज्यादा मार्क्स लाने वाले टॉप 5 बच्चों को 'मे फ्लॉवर' स्कूल 12वीं तक फ्री एजुकेशन देगा। बच्चों का खर्च स्कूल ने देने का फैसला किया है। यह बच्चों के लिए एक और मोटिवेशन है, जिससे सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए ज्यादा से ज्यादा नंबर लाने की कोशिश करेंगे।"
    आगे क्लिक कर PHOTOS में देखिए बदहाल स्कूल की कैसे आईपीएस ने बदली तस्वीर...
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    जीतपुर के सरकारी स्कूल के बच्चे महज 6 महीने में फर्श की जगह कलरफुल टेबल-चेयर पर बैठने लगे हैं।
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    आईपीएस मोहित अग्रवाल ने जीतपुर के सरकारी स्कूल की बाहरी दीवारों को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की थीम पर बनवाया है।
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    गोरखपुर के आईजी मोहित अग्रवाल ने क्लास-रूम्स की दीवारें अलग-अलग कलर्स में पेंट करवाई हैं।
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    जीतपुर के सरकारी स्कूल में अब हर वीकेंड एक्स्ट्रा-कर्रिकुलर एक्टिविटीज होती हैं, जैसे- रंगोली-मेहंदी कॉम्पिटीशन।
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    जीतपुर के सरकारी स्कूल के बच्चों को गोरखपुर के एनजीओ इनर व्हील क्लब ने बच्चों को टी-शर्ट और लोअर दिए हैं। कॉन्वेंट स्कूल्स की तरह बच्चों को चार हाउस में डिवाइड किया गया है- रेड, ब्लू, ग्रीन और येलो।
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    आईपीएस मोहित अग्रवाल के इस इनिशिएटिव के बाद जीतपुर के सरकारी स्कूल के बच्चे स्पोर्ट्स से लेकर स्टडीज तक, हर फील्ड में इंटरेस्ट लेते हैं।
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    जीतपुर के सरकारी स्कूल को इम्प्रूव करने में आईपीएस मोहित अग्रवाल की वाइफ प्रेरणा भी मदद करती हैं। वो बच्चों के लिए टेस्ट पेपर तैयार करती हैं।
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    जीतपुर के सरकारी स्कूल का 6 महीने पुराना लुक।
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    जीतपुर के सरकारी स्कूल के बच्चे 6 महीने पहले ऐसे क्लास-रूम में बैठते थे।
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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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