गोरखपुर / संघ प्रमुख मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा, कहा- देश हमें बहुत कुछ देता है, हम देश को क्या दे सकते हैं इसपर विचार करना चाहिए

ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते संघ प्रमुख मोहन भागवत ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते संघ प्रमुख मोहन भागवत
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ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते संघ प्रमुख मोहन भागवतध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते संघ प्रमुख मोहन भागवत

  • आरएसएस के उप्र पूर्वी क्षेत्र की बैठक में हिस्सा लेने के लिए गोरखपुर पहुंचे हुए हैं भागवत
  • कहा- अनुशासन  के दायरे में होंगे तभी देश के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों का सपना पूरा हो सकेगा 
  • संघ प्रमुख ने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को राजा बनाया है, राजा के पास अपने अधिकार होते हैं लेकिन उसके साथ अपने कर्त्वय का भी पालन करना चाहिए

दैनिक भास्कर

Jan 26, 2020, 01:35 PM IST

गोरखपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश पूर्वी क्षेत्र के कार्यकर्ता बैठक में हिस्सा पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में झंडारोहण किया। इस अवसर पर उन्होंने तिरंगे के केसरिया रंग को श्रेष्ठता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह त्याग का रंग है। यह रंग हमें भारत को निरन्तर प्रकाश में बनाये रखने की प्रेरणा देता रहता है। भागवत ने कहा कि देश हमें बहुत कुछ देता है, लेकिन हम देश को क्या दे सकते हैं, इसपर हमें विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसके लिए स्वयसेवकों और बच्चों को संकल्प भी दिलाया। सफेद रंग को उन्होंने शुद्धता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक बताया। कहा कि तिरंगे का सफेद रंग हमें पवित्र भाव से सबके कल्याण की प्रेरणा देता है। हरे रंग को उन्होंने समृद्धि का प्रतीक बताया।

कर्त्वय और अनुशासन के दायरे में रहकर ही पूरा होगा क्रांतिकारियों का सपना

भागवत ने कहा समृद्धि अहंकार के लिए नहीं बल्कि विश्व कल्याण के लिए होनी चाहिए। देश के संविधान ने सभी नागरिकों के अधिकार और कर्त्तव्य तय किये हैं। लेकिन यह अधिकार और कर्तव्य अनुशासन के दायरे में होंगे तभी देश के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों का सपना पूरा हो सकेगा और उनके सपनों के भारत का निर्माण हो सकेगा। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश हमें बहुत कुछ देता है तो हमें भी देश को देना सीखना चाहिए। हमारे अंदर देने की इतनी इच्छा होती है कि वह खत्म नहीं होती है। जैसे की कहा गया है कि तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं। यानी सबकुछ देने के बाद भी देने की इच्छा शेष रह जाती है।

संविधान ने हर नागरिक को राजा बनाया है

उन्होंने कहा कि संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है। राजा के पास अधिकार हैं, लेकिन अधिकारों के साथ सब अपने कर्तव्य और अनुशासन का भी पालन करें। तभी अपने बलिदान से देश को स्वतंत्र कराने वाले क्रांतिकारियों के सपनों के अनुरूप भारत का निर्माण होगा। ऐसा भारत जो दुनिया और मानवता की भलाई को समर्पित है।

भगवा देखते ही मन में सम्मान का भाव आता है

संघ प्रमुख ने कहा कि ये रंग ज्ञान, कर्म, भक्ति का कर्तव्य बताने वाले हैं। सबसे ऊपर भगवा रंग त्याग का, बीच का सफेद रंग पवित्रता और हरा रंग मां लक्ष्मी यानी समृद्धि का प्रतीक है। भगवा रंग देखते ही मन में सम्मान पैदा होता है। यह बताता है कि हमारा जीवन स्वार्थ का नहीं परोपकार का है। हमें कमाना है दीन दुखियों, वंचितों को देने के लिए। इतना देना है कि सबकुछ देने के बाद भी देने की इच्छा रह जाये। पवित्रता और शुद्धता जीवन में ज्ञान, धन और बल के सदुपयोग के लिए जरूरी है।

रावण के पास भी ज्ञान था लेकिन मन शुद्ध नहीं था

भागवत ने कहा कि ज्ञान तो रावण के पास भी था लेकिन मन मलिन था। शुद्धता रहेगी तो ज्ञान का प्रयोग विद्यादान, धन का सेवा और बल का दुर्बलों की रक्षा के लिए होगा। हरा रंग समृद्धि का प्रतीक है। हमारा देश त्याग में विश्वास करता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यहां दारिद्र्य रहेगा। समृद्धि चाहिए लेकिन हमारी समृद्धि अहंकार के लिए नहीं दुनिया से दुख और दीनता खत्म करने के काम आएगी। इस समृद्धि के लिए  परिश्रम करना होगा। जैसे किसान परिश्रम करता है तभी अच्छी फसल पाता है, वैसे ही सब परिश्रम करेंगे तो देश आगे बढ़ेगा। भारत बढ़ेगा तो दुनिया बढ़ेगी। 

तपस्वी और विद्वान नेताओं ने दिया संविधान

संघ प्रमुख ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश के स्वतंत्र होने के बाद देश के तपस्वी और विद्वान नेताओं ने भारत को उसके अनरूप तंत्र देने के लिए संविधान बनाया। 26 जनवरी 1950 को इसे लागू कर तय कर दिया गया कि भारत चलेगा तो अपने तंत्र से चलेगा। बाबा साहब ने संसद में संविधान को रखने के समय दो भाषण दिए जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमें किस प्रकार अनुशासन में रहना है।

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