गोरखपुर

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गोरखपुर: शिक्षक दिवस पर अनुदेशकों का धरना, महिलाओं ने कटवाई चोटी तो पुरुषों ने कराया मुंडन; ज्ञापन लेने तक नहीं पहुंचे अधिकारी

अनुदेशकों का कहना है कि शिक्षक वर्ग सबसे ज्यादा बीजेपी सरकार में परेशान हो रहा है।

Dainik Bhaskar

Sep 05, 2018, 05:31 PM IST
teachers protest against bjp government in gorakhpur

गोरखपुर. यहां शिक्षक दिवस के मौके पर अपनी मांगों को लेकर अनुदेशकों ने अनोखा प्रदर्शन किया। महिला अनुदेशकों ने जहां अपनी छोटी कटवाई तो वहीं पुरुषों ने मुंडन कराया। बेसिक शिक्षा विभाग के दफ्तर पर इतना बड़ा धरना होने के बावजूद कोई भी अधिकारी उनका ज्ञापन लेने तक नहीं पहुंचा। अनुदेशकों का कहना है कि शिक्षक वर्ग सबसे ज्यादा बीजेपी सरकार में परेशान हो रहा है। जायज मांगों को लेकर उन्हें लाठियां खानी पड़ रही है। जबकि महिलाओं को अपना श्रृंगार तक उतारना पड़ रहा है।

क्या है मामला: प्रदेश के पूर्व माध्‍यमिक विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार-2009 एक्‍ट के तहत साल 2013 में सपा सरकार ने अनुदेशकों को 8,470 रुपए मानदेय पर पूर्व माध्‍यमिक विद्यालयों में नियुक्‍त किया था। इसके लिए सितम्‍बर 2009 में सर्वे किया गया। प्रदेश में 13,709 पूर्व माध्‍यमिक विद्यालय हैं। प्रत्‍येक में 3 अनुदेशक (खेल, कला और कम्‍प्‍यूटर) नियुक्‍त हुए। गोरखपुर मंडल 2000 अनुदेशक और जिले में 539 अनुदेशक तैनात हैं। नियुक्ति के समय से ही अनुदेशकों ने मानदेय बढ़ाने के लिए आवाज उठाई। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पिछले साल भाजपा की सरकार आने के बाद अनुदेशकों में उम्‍मीद जगी। प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने खुद पहल की। जिसके बाद विभाग ने अनुदेशकों का मानदेय 17,000 रुपए करने के लिए प्रस्‍ताव केन्‍द्र सरकार को भेज दिया। केन्‍द्र सरकार की ओर से 15 मई 2017 को प्रस्‍ताव पास भी कर दिया। अनुदेशकों को उम्‍मीद जगी कि अब उनका मानदेय बढ़ा दिया जाएगा और उनके आर्थिक हालत भी सुधर जाएंगे लेकिन, प्रदेश सरकार ने ऐसा नहीं किया। उसके बाद से अनुदेशक लगातार धरना और प्रदर्शन कर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

क्या कहते हैं संघ के पदाधिकारी: उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्‍यक्ष विक्रम सिंह कहते हैं कि आज अनुदेशकों का मानदेय केन्‍द्र सरकार की ओर से बढ़ाए जाने के बाद भी उन्‍हें योगी सरकार उनका मानदेय 17000 रुपया नहीं दे रही है। 17 से 18 महीने होने के बाद भी उनका बढ़ा हुआ मानदेय नहीं दिया गया। उन्‍होंने बताया कि इसके बावजूद 31 अगस्‍त को बेसिक शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में कहा कि 17000 नहीं 9800 रुपए देने जा रही है। वे बताते हैं कि उनके दस साथियों ने आत्‍महत्‍या कर लिया लेकिन यूपी सरकार के कानों में जूं नहीं रेंग रही है। इसलिए उन लोगों ने अनुदेशक शिक्षक दिवस पर मुंडन कराकर पूरे प्रदेश के 75 जिलों में विरोध जता रहे हैं। महिला साथियों ने भी बाल न्‍योछावर करके झांसी की रानी की तरह वीरता दिखाई है। उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने 9 तारीख तक सरकार को अल्‍टीमेटम दिया है। सरकार ने उनकी बात नहीं मानीं, तो 10 तारीख को यूपी के मुखिया योगी आदित्‍यनाथ के आवास पर जाकर ब्रह्मभोज का कार्यक्रम भी करेंगे। वहीं महिला अनुदेशक सुशीला और रचना का कहना है कि चोटी औरत का श्रृंगार होता है और वे अपना श्रृंगार उतारकर विरोध जता रही हैं। उनका कहना है कि जब तक उन्‍हें सम्‍मानजनक मानदेय नहीं मिलेगा, वे शिक्षक दिवस का बहिष्‍कार करते हैं।

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