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बैंडिट क्वीन डाकू से बनी सांसद, अब ब्रिटेन में पढ़ाया जाऐगा फूलन देवी का इतिहास

2 वक्त के खाने के लिए तरस रही फूलन देवी की मां, ब्रिटिस प्रोफेसर कर रहे हैं शोध।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 05, 2018, 08:17 AM IST

    • फूलन देवी ने बनाया था अपना गिरोह।

      जालौन. डाकू से सांसद बनीं फूलन देवी का इतिहास अब ब्रिटेन के लोगों को पढ़ाया जाएगा। यूनिवर्सिटी ऑफ इंस्टागिलियर के प्रोफेसर ने फूलन के इतिहास को ब्रिटेन में पढ़ाने को लेकर उनकी फैमिली से मुलाकात की। लेकिन 'बैंडिट क्वीन' की मां का गुस्सा प्रोफेसर पर ही फूट पड़ा। नाराज होकर उन्होंने खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी।

      प्रोफेसर ने फूलनदेवी के परिवार को दी आर्थिक सहायता...

      - भारतीय मूल के ब्रिटिश प्रोफेसर मुकुल लाल फूलन देवी (बैंड‍िट क्वीन) पर शोध कर रहे हैं।

      - उन्होंने बताया, मैं और मेरे साथी सब्बरवाल मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। हम फूलन के बारे में जानने के लिए इंग्लैंड से आए। गुरुवार को पुलिस की मदद से हम फूलन के परिवार से मिलने बीहड़ स्थित शेखपुर गुढ़ा गांव गए थे।

      - वहां पहुंच जैसे ही मैं फूलन की मां मुला देवी से मिला और उनकी बेटी के बारे में जिक्र किया, तो वह गुस्सा हो गईं। मेरे ऊपर पर ही बरस पड़ीं।
      - बड़ी मुश्किल से पुलिस और गांववालों ने उन्हें समझाया। आख‍िर में फूलन की बहन रामकली ने मुझसे बात की और बैंड‍िट क्वीन की बीहड़ से लेकर संसद तक के सफर की पूरी कहानी बताई। बाद में हमने परिवार को आर्थिक सहायता भी दी।

      - परिवार से बातचीत के अलावा मैंने किताबों और न्यूज पेपर से फूलन के बारे में जानकारी इक्ट्ठा की है। कभी जिस डाकू का नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे, आज उसी की मां दाने-दाने को तरस रही है।
      - एक समय ऐसा था जब फूलन की एक आवाज पर लोगों के घरों में अनाज पहुंच जाता था, भूखों के पेट भरते थे। आज उसी के घर के हालात बहुत खराब हैं।

      डकैत की मां कहकर लोग मारते हैं ताने
      - गुढ़ा गांव में एक कच्चे, झोपड़ीनुमा घर में फूलन की बूढ़ी मां मूला देवी (76), उसकी बहन रामकली और उसका बेटा रहता है।
      - मूला ठीक से बात भी नहीं कर पाती। लोग कहते हैं कि अब उनका दिमाग ठीक से काम नहीं करता। कुछ भी पूछने पर वो गांव के ही कुछ लोगों द्वारा कब्जाई गई जमीन के बारे में बताने लगती हैं।
      - वो कहती हैं, मैं पिछले कई सालों से 2 वक्त के खाने को भी तरस रही हूं। कुछ समाजसेवी संगठन के लोग चावल, आटा, दाल आदि दे जाते हैं। एक समय ऐसा था जब मेरी बेटी की एक बात पर भूखों के घर में खाना पहुंच जाता था।
      - जब फूलन थी तब भी सुख नहीं मिला। उसके डकैत बनने के बाद लोग मुझे डकैत की मां कहकर ताना देने लगे। पुलिस पूछताछ के नाम पर टॉर्चर करती थी। जब बेटी सांसद बनी, तब भी उसने हमारे लिए कुछ नहीं किया।
      - उसके मरने के बाद दबंगों ने हमारी जो 4-5 बीघा जमीन थी, उसपर कब्जा कर लिया। सांसद बनने के बाद फूलन को जो कुछ भी मिला था, उसे उसके पति उमेश सिंह ने ले लिया।
      - मैं इस लायक नहीं हूं कि मेहनत मजदूरी करके पैसे कमा सकूं और घर चला सकूं। पति के छोड़ने के बाद बेटी रामकली की दिमागी हालत ठीक नहीं। वहीं, उसका बेटे को लकवा मार गया है, वो हमेशा बिस्तर पर ही लेटा रहता है।
      - कभी कुछ समाजसेवी लोग आते हैं और अनाज देकर चले जाते हैं, जिससे हमारा पेट भरता है।
      - पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने एक लाख रुपए का चेक भेजा था। स्थानीय सपा नेताओं द्वारा मुझे ये चेक मिला।

      डाकू से ऐसे रहा संसद तक का सफर

      - फूलन का जन्म एक मल्लाह के घर हुआ था। 11 साल की उम्र में शादी हुई, लेकिन पति ने छोड़ दिया।
      - कई तरह की प्रताड़ना के बाद फूलन का झुकाव डकैतों की तरफ हुआ। धीरे-धीरे फूलन ने खुद का एक गिरोह खड़ा कर लिया और उसकी नेता बनी।
      - आमतौर पर उनको रॉबिनहुड की तरह गरीबों का पैरोकार समझा जाता था। 1981 में वो उस समय सुर्ख‍ियों में आईं जब उन्होंने ऊंची जाती के 22 लोगों की एक साथ हत्या कर दी थी।
      - इंदिरा गांधी की सरकार ने 1983 में उनसे समझौता किया कि उन्हें मृत्यु दंड नहीं दिया जाएगा। इस शर्त के तहत अपने 10 हजार समर्थकों के साथ फूलन ने सरेंडर कर दिया।

      - 11 साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया। फूलन ने अपनी रिहाई के बौद्ध धर्म में अपना धर्मातंरण किया।

      - 1996 में उन्होंने यूपी के भदोही सीट से चुनाव जीता और संसद पहुंची। 25 जुलाई, 2001 को दिल्ली में आवास पर फूलन की हत्या कर दी गई। 1994 में शेखर कपूर ने फूलन पर आधारित एक फिल्म बैंडिट क्वीन बनाई, जो काफी चर्चित और विवादित रही।

      ...इस कांड से इंटरनेशनल लेवल पर फेमस हुईं थीं फूलन

      - फूलन देवी ने अपनी ऑटोबाईग्राफी में उनके साथ हुई ज्यादतियों की दास्तां बयां की थी। उसमें लिखा है, डकैत गिरोह का मुखिया विक्रम मल्लाह फूलन देवी से प्यार करता था।
      - फूलन ने अपनी किताब में विक्रम मल्लाह के साथ बिताई अंतिम रात और उनके साथ हुए गैंगरेप की डिटेल्स बताई थीं।
      - किताब में लिखा है- "पहली बार मैं विक्रम के साथ पति-पत्नी की तरह सोई थी। गोली चलने की आवाज से नींद खुली।''
      - श्रीराम (मल्लाह और श्रीराम में फून को लेकर विवाद हुआ था) ने विक्रम मल्लाह को गोलियों से भून डाला और उनको साथ ले गया। उन्होंने किताब में कुसुम नाम की महिला का जिक्र किया है, जिसने श्रीराम की मदद की थी।
      - ''उसने मेरे कपड़े फाड़ दिए और आदमियों के सामने नंगा छोड़ दिया। श्रीराम-उसके साथी फूलन को नग्न अवस्था में ही रस्सियों से बांधकर नदी के रास्ते बेहमई गांव ले गए।''
      - "सबसे पहले श्रीराम ने मेरा रेप किया। फिर बारी-बारी से गांव के लोगों ने मेरे साथ रेप किया। वे मुझे बालों से पकड़कर खींच रहे थे।"
      - इसके बाद 14 फरवरी 1981 को बेहमई में फूलन ने अपना बदला लेने के लिए 20 लोगों की हत्या कर दी थी। जिससे वो इंटरनेशनल लेवल पर सुर्ख‍ियों में आईं थीं।

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      आत्मसमर्पण के दौरान जनता को संबोधित करतीं फूलन देवी।
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      प्रेमी विक्रम मल्लाह के साथ फूलन देवी।
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      पति उमेद सिंह के साथ फूलन देवी।
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      फूलन की मां मूला देवी कहती हैं, बेटी के मरने के बाद दबंगों ने हमारी जो 4-5 बीघा जमीन थी, उसपर कब्जा कर लिया।
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      1996 में फूलन ने यूपी के भदोही सीट से चुनाव जीता और संसद पहुंची।
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      मूला देवी कहती हैं, घर में 2 वक्त का चूल्हा भी मुश्किल से जलता है।
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