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विवादों में आई 'मणिकर्णिका', मौत से पहले दिए थे जिंदगी जीने के ये TIPS

झांसी की महारानी और वीरांगना लक्ष्मी बाई की लाइफ पर बन रही फिल्म 'मणिकर्णिका' कॉन्ट्रोवर्सी में फंस गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 07, 2018, 05:42 PM IST

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    झांसी.'पद्मावत' के बाद वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की लाइफ पर बन रही फिल्म 'मणिकर्णिका' भी विवादों में घिर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म में लक्ष्मी बाई की लाइफ के कुछ फैक्ट्स को तोड़-मरोड़कर दिखाया गया है। लक्ष्मी बाई एक ऐसी योद्धा थीं, जिनके बचपन से लेकर शहादत तक आज की जनरेशन नई सीख ले सकती है। DainikBhaskar.com कुछ ऐसे ही फैक्ट्स अपने रीडर्स को बता रहा है।

    ऐसी थीं महारानी लक्ष्मीबाई

    - मणिकर्णिका उर्फ मनु का जन्म 19 नवंबर 1827 को महाराष्ट्रियन कराडे ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब वो चार साल की थीं, तभी उनकी मां भागीरथी का निधन हो गया।
    - पत्नी के निधन के बाद मोरोपंत तांबे मनु को लेकर बाजीराव पेशवा के यहां बिठूर आए थे। सन् 1842 में रानी का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव से हुआ।
    - सन 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम दामोदर राव रखा गया। 3 माह बाद ही बेटे का भी निधन हो गया।

    - बेटे के निधन से दुखी गंगाधर राव बीमार हो गए। 20 नवंबर, 1853 में गंगाधर राव ने दत्तक पुत्र को गोद लिया।
    - उन्होंने अपने दत्तक पुत्र का नाम भी दामोदर राव रखा और गोद लेने के एक दिन बाद ही राजा गंगाधर राव का निधन हो गया।
    - पति के निधन के बाद लक्ष्मी बाई ने राजपाठ संभाला, लेकिन अंग्रेजों को उनका नेतृत्व पसंद नहीं आया। लक्ष्मी बाई ने सन् 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों से लड़ते हुए शहादत हासिल की।

    आगे जानें, रानी लक्ष्मी बाई ने मौत से पहले दिए थे जिंदगी जीने के कौन-से टिप्स...

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    'मैं कर सकता/सकती हूं का एटीट्यूड'

    - रानी लक्ष्मी बाई का एटीट्यूड आज की जनरेशन के लिए सबक है।
    - इनका बेटा जन्म के कुछ महीनों बाद मर गया था। उसके दो साल बाद उनके पति राजा गंगाधर राव की बीमारी के कारण मौत हो गई।
    - अंग्रेज उनका राज्य हथियाने की कोशिशों में जुट गए थे, लेकिन ऐसे में उन्होंने सत्ता अपने हाथ में लेकर दुनिया को दिखाया कि एक महिला भी शासन संभाल सकती है।
    - उनका यही 'मैं कर सकती हूं' वाला एटीट्यूड अंग्रेजों के खिलाफ हर जंग में नजर आया।

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    मौत से पहले लड़ो (Do before you die)

    - रानी लक्ष्मी बाई के सामने 'सती' और 'जौहर' जैसे कई उदाहरण थे, जिन्हें उनसे पहले की वीरांगनाएं फॉलो करती आई थीं।
    - मणिकर्णिका ने इन प्रथाओं को अपनाने की जगह Do before you die का कॉन्सेप्ट अपनाया। वो एक योद्धा की तरह अंग्रेजों से टकराईं और मैदान-ए-जंग में शहीद हुईं।

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    मुश्किल वक्त में हिम्मत न हारें



    - रानी लक्ष्मी बाई के बचपन की यह घटना सिखाती है कि हमें मुश्किल वक्त में हिम्मत नहीं हारना चाहिए।
    - एक बार वो नाना साहिब के साथ घुड़सवारी के लिए गई थीं। उस दौरान अचानक नाना घोड़े से गिरकर घायल हो गए।
    - मणिकर्णिका उनसे बहुत छोटी थीं, लेकिन उनकी चोट देखकर वो रोयी या घबराई नहीं।
    - उन्होंने नाना साहिब को संभाला और घोड़े पर बैठाकर महल तक वापस ले गईं। एक बच्ची द्वारा इतनी हिम्मत दिखाना तारीख के काबिल है।

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    अपने अधिकारों के लिए लड़ो

    - रानी लक्ष्मी बाई ने अपनी लाइफ में कई लड़ाइयां लड़ीं। कुछ मैदान-ए-जंग में थीं तो कुछ पर्सनल लेवल पर।
    - उन्होंने देश की आजादी के साथ ही महिलाओं के लिए जंग लड़ने का राइट, सत्ता संभालने का राइट और बच्चा गोद लेने का राइट दिलाने के लिए संघर्ष किया।

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