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सबसे पहले यहीं हुआ था होलिका दहन, रानी लक्ष्मीबाई के शहर से जुड़े हैं ये Facts

होली के त्योहार की शुरुआत रानी लक्ष्मीबाई के शहर झांसी से हुई थी।

राम नरेश यादव | Last Modified - Feb 27, 2018, 10:56 AM IST

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    झांसी.होली का त्‍योहार 2 मार्च को मनाया जाएगा। हर कोई रंगों से सराबोर होने की तैयारी में है, लेकिन सभी को ये नहीं पता कि इस रंग-बिरंगे उत्सव की शुरुआत कहां से और कैसे हुई थी। DainikBhaskar.com अपने रिडर्स को होली से जुड़े कुछ ऐसे ही इंट्रेस्‍ट‍िंग फैक्‍ट्स बता रहा है। रानी लक्ष्मीबाई के शहर से हुई थी होली की शुरुआत...

    - लोक संस्क्रति के जानकार और बौद्ध सोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने बताया, जिस होली के त्योहार को पूरे देश में मनाया जाता है, उसकी शुरुआत रानी लक्ष्मीबाई के शहर झांसी से हुई थी।

    - सबसे पहली बार होलिका दहन झांसी के प्राचीन नगर एरच में ही हुआ था। झांसी में एक ऊंचे पहाड़ पर वो जगह आज भी मौजूद है, जहां होलिका दहन हुआ था।

    - इस नगर को भक्त प्रहलाद की नगरी के नाम से जाना जाता है। झांसी से एरच करीब 80 किलोमीटर दूर है।

    हिरणयकश्यप ने एरच को बनाया था अपनी राजधानी

    - पुराणों के मुताबिक, होली मनाए जाने के पीछे की घटना भक्त प्रहलाद से जुड़ी हुई है। सतयुग में हिरण्यकश्यप राक्षस का राज था। हिरण्यकश्यप का भारत में एक छत्र राज था।

    - झांसी के एरच को हिरण्यकश्यप ने अपनी राजधानी बनाया। घोर तपस्या के बाद उसे ब्रह्मा से अमर होने का वरदान मिल गया। इससे वह अभिमानी हो गया।

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    बेटे का मारना चाहता था हिरणयकश्यप

    - हिरण्यकश्यप खुद को देवता मानने लगा और उसने प्रजा को अपनी पूजा कराने से मजबूर कर दिया, लेकिन हिरण्यकश्यप की यह बात उसके ही पुत्र भक्त प्रहलाद ने नहीं मानी और उसकी पूजा करने से इनकार कर दिया।

    - प्रहलाद भगवान विष्‍णु की पूजा-अर्चना करने लगा। इससे हिरण्यकश्यप नाराज हो गया। उसने प्रहलाद को मारने का षड़यंत्र रचना शुरू कर दिया।

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    बेटे को हाथी से कुचलवाया

    - हिरण्यकश्यप ने बेटे प्रहलाद को मारने की कोशिश की। उसने प्रहलाद को हाथी से कुचलवाया। इसके असफल होने के बाद उंचे पहाड़ से बेतवा नदी में धक्का दिया, लेकिन प्रहलाद बच गए। जहां प्रहलाद नदी में गिरे, वह जगह भी मौजूद है।

    - कहा जाता है कि हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को जिस जगह बेतवा नदी में फेंका था, उस जगह पाताल जैसी गहराई है। आज तक उस जगह की गहराई की पता नहीं लगाया जा सका है।

    - यहां पहाड़ पर स्थित नर सिंह भगवान की गुफा में तपस्या करने वाले जागेश्वर महाराज बताते हैं कि कई प्रयास विफल होने के बाद हिरण्यकश्यप ने होलिका के सहारे प्रहलाद को मारने का षड़यंत्र रचा।

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    होलिका ने कर दी थी ये भूल

    - होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी। उसे वरदान था कि उसे अग्नि नहीं जला सकती। यह भी था कि जब होलिका अकेली अग्नि में प्रवेश करेगी, तभी अग्नि उसे नुकसान नहीं पहुंचायेगी।

    - वहीं, हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को लेकर अग्नि में प्रवेश करने को कहा। वो अपने वरदान के बारे में भूल गई कि यदि किसी और के साथ जाएगी तो खुद ही जल जाएगी और हिरण्यकश्यप की बातों में आ गई।

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    प्रहलाद के बचने की खुशी में लगाया गया रंग

    - एरच के ग्राम ढिकौली से बने उंचे पहाड़ पर अग्नि जलाई गई। होलिका भक्त प्रहलाद को लेकर इसी अग्नि में प्रवेश कर गई। इससे वो उस आग में जलकर खाक हो गई, जबकि भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। इसके बाद आसपास क्षेत्र में भीषण आग फैल गई।

    - इससे बौखलाए हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को झांसी के एरच में स्थित जहां उसकी बहन होलिका जली, वहीं एक खम्भे से बांध कर मारना चाहा। तभी भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध कर डाला।

    - उसी दिन से होलिका को जलाने और भक्त प्रहलाद के बचने की खुशी में अगले दिन रंग गुलाल लगाए जाने की शुरुआत हो गई।

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    ये कहते हैं जानकार

    - एरच को भक्त प्रहलाद की नगरी के रूप में ही जाना जाता है। सिक्कों के संग्रह में से एक दुर्लभ सिक्का भी है, जिसमें एरच का नाम ब्रह्म लिपि में एरिकच्छ लिखा है और नृत्य करती हुई मोरनी बनी हुई है।

    - दतिया जिले में प्राप्‍त अशोक के शिलालेख में लिखी लिपि का तरीका एक जैसा है। इससे प्रतीत होता है कि भक्त प्रहलाद की नगरी में यह सिक्का में लगभग 2300 साल पहले चलता था।

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