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लालू यादव को सजा सुनाने में डर गया था ये जज, शेयर किया एक्सपीर‍ियंस

जज शि‍वपाल सिंह ने DainikBhaskar.com से विशेष बातचीत की और लालू यादव केस से जुड़ी अनटोल्ड स्टोरी बताई।

आदित्य मिश्रा| Last Modified - Jan 09, 2018, 12:03 PM IST

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Justice Shivpal Singh interview Who Punished For Lalu Yadav In Fooder Scam
लालू को सजा सुनाने वाले जज श‍िवपाल सिंह यूपी के जालौन के शेखपुरा खुर्द गांव के रहने वाले हैं।

जालौन. चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को सजा सुनाने वाले जस्टिस शिवपाल सिंह खुद यूपी के जालौन में आला अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने इसकी शिकायत जालौन के तहसीलदार से लेकर उपजिलाधिकारी से की है। इसके बाद भी उनकी समस्या पर अफसरों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस वजह से उनका परिवार परेशान है। मंगलवार को उन्होंने बताया, खबर मीड‍िया में आने के बाद पुलिस पर दबाव बना है। इसके बाद एसडीएम और संबंध‍ित अध‍िकारी एक्शन में आए हैं। सभी गांव पहुंचकर मामले को सुलझाने की कोशि‍श कर रहे हैं।

 

ये है मामला....

- दरअसल, जस्टिस शिवपाल सिंह जालौन जिले के शेखपुर खुर्द गांव के रहने वाले हैं। उनकी जमीन इसी गांव में है। जस्टिस शिवपाल सिंह के भाई सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया, ''उनके भाई शिवपाल की जमीन शेखपुर खुर्द में अराजी नंबर-15 और 17 है।''
- ''इस जमीन पर पूर्व प्रधान सुरेंद्र पाल सिंह ने कार्यकाल के दौरान बिना किसी अधिकार के चकरोड बनवा दिया। जबकि सरकारी कागजों में चकमार्ग गाटा संख्या- 13 है।  पूर्व प्रधान ने चकमार्ग गाटा संख्या- 13 की तरफ से रास्ते को बंद कर अपने खेत में शामिल कर दिया।" 


हमारी शिकायत पर किसी ने नहीं दिया ध्यान 
- सुरेंद्र पाल ने बताया कि कई बार उनके भाई जस्टिस शिवपाल सिंह तहसीलदार से लेकर जालौन के डीएम से मिले। आला अफसरों ने हमारी शिकायत का कोई हल नहीं निकाला।


राजस्व टीम ने की थी पैमाइश: तहसीलदार 

- वहीं, तहसीलदार जितेंद्र पाल सिंह का कहना है, "उनके पास शिकायत आई थी। उनकी बात सुनने के बाद राजस्व टीम को मौके पर भेजा गया था। पैमाईश भी कराई गई थी। उसके बाद उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। जहां चकरोड है, वहीं पर चकरोड बनाया जाएगा। पैमाइश के दौरान निशान लगवाए गए थे।

 

DM बोले- पहले कानून पढ़ के आइए

- जस्टिस शि‍वपाल सिंह के मुताबिक, ''मैं लगातार 11 साल से इस विवाद काे लेकर परेशान चल रहा हूंं। कई बार जिले के डीएम और एसपी के पास श‍िकायत लेकर गया था, लेकिन जिला से मुझे कोई मदद नहीं मिली। 12 अक्टूबर 2017 में तत्कालीन DM मन्नान अख्तर को जब मैंने अपना परिचय दिया तो उसने बोला- आप जाइए पहले कानून का पाठ पढ़ के आइए, तो मुझसे बात कीजिएगा।''

- ''मुझे बहुत बुरा लगाा, लेकिन कुछ कहे बगैर मैं वहां से चला आया।''

 

क्या है देवघर ट्रेजरी केस और क्या है लालू पर आरोप ?

- बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे, जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।
- बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इंक्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।

 

 

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लालू प्रसाद यादव पर ट्रेजरी से गैरकानूनी ढंग से पैसा निकालने के मामले की जांच की फाइल बेवजह अटकाने का जुर्म साबित हुआ।
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जज शि‍वपाल के मुताबिक, सजा सुनने के बाद लालू चुप हो गए थे और उनकी आंखें झुक गई थीं।
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