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इस कुएं में नहाने से दूर होती है लाइलाज बीमारी, कभी इसलिए आए थे राम-सीता

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2018, 09:00 PM IST

चित्रकूट में मकर संक्रांति के मौके पर भरतकूप में लाखों श्रद्धालू स्नान करते हैं।

मान्यता है कि कुएं के जल में नहाने से असाध्य रोग (लाइलाज बीमारियां) भी दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि कुएं के जल में नहाने से असाध्य रोग (लाइलाज बीमारियां) भी दूर हो जाते हैं।

चित्रकूट(यूपी). 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर भरतकूप में 5 दिन तक लाखों श्रद्धालू स्नान करते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से विश्व के समस्त तीर्थ का पुण्य मिलता है। साथ ही असाध्य रोग (लाइलाज बीमारियां) भी दूर होती हैं। इस कुएं में भरत जी ने समस्त तीर्थ के जल को लाकर डाला था, जो वे भगवान राम के राज्याभिषेक के लिए लाए थे। यहां जो भी मकर संक्रांति पर स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ती होती है। राज्याभिषेक के लिए ले थे सभी तीर्थों का जल...

- पुजारी पंडित राम दास ने बताया, ''भरतकूप मंदिर में एक कुंआ (कूप) है, जिसका धार्मिक महत्व तुलसीदास की रामचरित मानस में भी किया गया है।''
- ''जब भगवान राम 14 साल के वनवास काटने के लिए चित्रकूट आए थे। उस समय भरत जी को माता कैकेयी के क्रियाकलाप कर काफी दुख हुआ था।''
- ''वे अयोध्या की जनता के साथ राम जी को मनाने चित्रकूट आए थे। साथ में उनका राज्याभिषेक करने को समस्त तीर्थों का जल भी लाए थे।''
- ''भगवान राम के साथ न लौटने पर भाई भरत ने दुखी होकर राज्याभिषेक का जल और सामग्री को इसी कुएं में छोड़ दिया था। फिर भगवान राम की खड़ाऊ लेकर लौट गए थे।''


यहां विराजमान हैं राम-सीता की मूर्तियां
- यहां पर बना भरतकूप मंदिर भी अत्यंत भव्य है। इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन की मूर्तियां विराजमान है।
- सभी प्रतिमाएं धातु की है। वास्तुशिल्प के आधार पर मंदिर काफी प्राचीन है। माना जाता है कि बुंदेल शासकों के समय में मंदिर का निर्माण हुआ था।

कुएं में नहाने से असाध्य रोग हो जाते हैं दूर
- पुजारी पंडित राम दास बताते हैं, ''इस कुएं में स्नान से समस्त तीर्थों का पुण्य तो मिलता ही है। साथ की शरीर के असाध्य रोग भी दूर होते हैं।''
- ''भगवान राम के चरणों के प्रताप से मृत्यु के पश्चात स्वर्गगामी होता है और मोक्ष को प्राप्त करता है।''

मकर संक्रांति में आते हैं लाखों लोग
- मकर संक्रांति के मौके पर यहां 5 दिन मेला लगता है, जिसमें बुंदेलखंड के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- इस कुएं में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। वैसे हर अमावस्या में भी यहां पर श्रद्धालु स्नान करने के बाद चित्रकूट जाते है और फिर मंदाकिनी में स्नान कर कामदगिरि की परिक्रमा लगाते हैं।
- बता दें, मकर संक्रांति मेला में यहां पर सुरक्षा और प्रशासनिक पुख्ता इंतजाम किए जाते है। मजिस्ट्रेट की तैनाती के साथ उच्चाधिकारियों की मेला पर निगाह रहती है।
- साथ ही एनएच से लेकर भरतकूप मंदिर तक दोनों ओर दुकाने सजती है। जिसमें 5 दिन काफी चहल-पहल देखी जाती है।​

राम जी को मनाने भाई भरत चित्रकूट पहुंचे। साथ में राज्याभिषेक करने को समस्त तीर्थों का जल भी लाए थे। राम जी को मनाने भाई भरत चित्रकूट पहुंचे। साथ में राज्याभिषेक करने को समस्त तीर्थों का जल भी लाए थे।
भगवान राम के साथ न लौटने पर भाई भरत ने दुखी होकर राज्याभिषेक का जल और सामग्री को इसी कुएं में छोड़ दिया था। भगवान राम के साथ न लौटने पर भाई भरत ने दुखी होकर राज्याभिषेक का जल और सामग्री को इसी कुएं में छोड़ दिया था।
14 साल के वनवास काटने के लिए भगवान राम चित्रकूट आए थे। 14 साल के वनवास काटने के लिए भगवान राम चित्रकूट आए थे।
इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन की मूर्तियां विराजमान है। इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन की मूर्तियां विराजमान है।
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मान्यता है कि कुएं के जल में नहाने से असाध्य रोग (लाइलाज बीमारियां) भी दूर हो जाते हैं।मान्यता है कि कुएं के जल में नहाने से असाध्य रोग (लाइलाज बीमारियां) भी दूर हो जाते हैं।
राम जी को मनाने भाई भरत चित्रकूट पहुंचे। साथ में राज्याभिषेक करने को समस्त तीर्थों का जल भी लाए थे।राम जी को मनाने भाई भरत चित्रकूट पहुंचे। साथ में राज्याभिषेक करने को समस्त तीर्थों का जल भी लाए थे।
भगवान राम के साथ न लौटने पर भाई भरत ने दुखी होकर राज्याभिषेक का जल और सामग्री को इसी कुएं में छोड़ दिया था।भगवान राम के साथ न लौटने पर भाई भरत ने दुखी होकर राज्याभिषेक का जल और सामग्री को इसी कुएं में छोड़ दिया था।
14 साल के वनवास काटने के लिए भगवान राम चित्रकूट आए थे।14 साल के वनवास काटने के लिए भगवान राम चित्रकूट आए थे।
इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन की मूर्तियां विराजमान है।इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघन की मूर्तियां विराजमान है।
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