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इस मंदिर में 400 साल से जल रही अखंड ज्योति, देशी धी से भरा हुआ है 7 कुंआ

झांसी के उनाव बालाजी मंदिर में लोगों का खास आस्था है।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Jan 15, 2018, 11:16 AM IST

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Makar Sankranti special story in jhansi
इस मंदिर में लगातार 400 साल से अखंड ज्योति जल रही है।

झांसी (यूपी). शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर दतिया जिले में स्थित उनाव बालाजी मंदिर भक्तों की प्रमुख आस्था का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में लगातार 400 साल से अखंड ज्योति जल रही है। फेस्टिवल में चढ़ने वाले घी को रखने के लिए 9 कुएं बनाए गए हैं। भक्त मानते है कि मकर संक्रांति को यहां आने से कई गंभीर बीमारियां दूर हो जाती है और जो दंपति नि:संतान होते हैं, वह यहां आकर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भागृह में स्थित भगवान की मूर्ति पर पड़ते ही दर्शन करते हैं तो उनको संतान की प्रप्ति होती है। 

 

कुंड में नहाने से असाध्य रोग होते हैं ठीक...

 

- मंदिर के पास से पहूज नदी निकली है, उसी नदी में एक कुंड है। जिसमें संक्रांति के दिन दूर-दूर से लोग नहाने पहुंचते हैं। यहां दूर-दूर से असाध्य रोग के मरीज आते है। 
- लोग पहुज नदी के कुंड में स्नान करते है और भगवान भास्कर को जल चढ़ाते हैं। जिससे उनका गंभीर असाध्य रोग भी ठीक हो जाता है।

 

ये है मंदिर की विशेषता 
- यूपी और एमपी की सरहद पर पहुंज नदी के किनारे पर स्थित इस सूर्य मंदिर पर सूर्योदय की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भागृह में स्थित मूर्ति पर पड़ती है।
- मंदिर के पुजारी रामाधार पांडे ने बताया, ''मंदिर में 400 सालों से रोजाना आठ किलो घी से अखंड ज्योति जलाई जाती है। यहां मंदिर में सूर्य यंत्र स्थापित है। ऐसा ही एक यंत्र पेरू ( दक्षिण अमेरिका) में स्थापित है।

 

घी को रखने के लिए खोदे गए 9 कुएं
- ''मकर संक्रांति और अन्य फेसिटवल में इतना देसी घी चढ़ाया जाता है कि उसे रखने के लिए मंदिर के अंदर 9 कुएं बनाए गए है। पहले घी रखने के लिए पहले जमीन में लोहे के टैंक की तरह 7 कुएं बनवाए गए। हर कुएं की लंबाई-चौड़ाई 7 फीट और गहराई 8 फीट थी।''
- ''जब सातों कुओं में पूरी तरह से घी भर गया तब मंदिर के अंदर बने प्राचीन कुएं को पक्का करके उसमें घी भरा गया। जब ये कुंआ भी भर गया तो 20 फीट गहरा और 10 फीट लंबा-चौड़ा एक और कुंआ खोदा गया और घी उसमें रखा जाने लगा।''
- ''मंदिर के पास से बह रही पहूज नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देव की प्रतिमा पर जल चढ़ाने से चर्म रोग से छुटकारा मिल जाता है। माना जाता है कि मंदिर में सूर्य की पहली किरण के साथ यहां स्थित मूर्ति के दर्शन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।''

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सूर्य की किरण मंदिर के गर्भागृह से गिरकर शरीर पर पड़ती है तो संतान की प्राप्ति‍ होती है।
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मंदिर में श्रद्धालुओं की जमकर भीड़ लगती है।
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इस मंदिर में 7 कुंओ में देशी घी रखा हुआ है।
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मंदिर के कुंड में नहाने से रोग दूर हो जाते हैं।
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