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इस शख्स को काइट्स उड़ानें में है महारत हासिल, रखें हैं ऐसे कलेक्शन

झांसी में एक शख्स पतंग का 1 लाख रुपए का कलेक्शन रखा हुआ है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 14, 2018, 04:12 PM IST

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    झांसी के जगदीश प्रसाद 12 साल की उम्र से पतंग उड़ा रहे हैं।

    झांसी (यूपी). यहां बीआइएस कॉलोनी में रहने वाले जगदीश प्रसाद के पास 1 लाख रुपए की पतंगो का कलेक्शन है। इन्हें कई पतंग प्रतियोगिता में कई सम्मान मिल चुके हैं। इतना ही नहीं ये कई पतंगों को जोड़कर उड़ाने में माहिर हैं।

    12 साल की उम्र से उड़ा रहे हैं पतंग...

    - जगदीश ने बताया, ''मैं जब 12 साल का था तब मेरे चाचा पतंग उड़ाते थे। उन्हें देखकर मुझे पतंग उड़ाने का शौक हुआ। 2000 से मैं बिसाती बाजार स्थित चमन उस्ताद की दुकान से पतंगों का कलेक्शन कर रहा हूं।''
    - ''12 साल की उम्र में मैं बुंदेलखंड की ओर से कई प्रतियोगिताओं में पतंगबाजी कर चुका था। चंदेरी, ललितपुर, जालौन, मथुरा, ग्वालियर, बरूआसागर आदि कई महोत्सव में पतंग पतंग प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया है।''
    - ''अभी हाल में ही ललितपुर में हप्पू सिंह दरोगा के नाम से प्रचलित टीवी कलाकार द्वारा मुझे सम्मान मिला था। अब तक मेरे पास 1 लाख रुपए से ज्यांदा की पतंगों का कलेक्शन हो गया है।''
    - ''मैं पतंगों के कलेक्शन के लिए पतंग की मंडी गुजरात भी गया था और वहां से स्टाइलिस पतंग बनाना सीखकर आया हूं। मैंने कुछ पतंगे ऐसी भी बनाई हैं, जो समाज को संदेश देने का काम भी करती है। उनमें से 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' है।''
    - ''मैं अपने जीवन यापन के लिए पतंग के अलावा इंवर्टर बनाने का काम करता हूं। जिससे मेरी रोजी रोटी चलती है।''

    ऐसे हुई पतंग की शुरुआत
    - भारत में पतंग उड़ाने का शौक हजारों साल पुराना है। बताया जाता है कि चीन के बौद्ध तीर्थयात्रियों के द्वारा पतंगबाजी का शौक भारत पहुंचा। यहां पतंग परंपरा की शुरुआत शाह आलम के समय 18वीं सदी में की गई।
    - भारतीय साहित्य में पतंगों की चर्चा 13वीं सदी से ही की गई है। मराठी संत नामदेव ने अपनी रचनाओं में पतंग का जिक्र किया है। देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने का शौक लोग रखते हैं। गुजरात में इसे मुख्य खेल के रूप में जाना जाता है।
    - भारत, चीन, इंडोनेशिया, थाइलैंड, अफगानिस्तान, मलेशिया जापान और अन्य एशियाई देशों तथा कनाडा, अमेरिका, फ्रांस,स्विटजरलैंड,हालैंड, इंग्लैंड आदि देशों में भी पतंग उड़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

    ऐसा मानते हैं लोग
    - प्राचीन काल में जापान के लोगों में विश्वास था कि पतंगों की डोर वह जरिया है जो पृथ्वी को स्वर्ग से मिलाती है।
    - चीन के लोगों में विश्वास है कि अगर पतंग उड़ाकर छोड़ दी जाए तो पतंग छोड़ने वाले का दुर्भाग्य आसमान में गुम हो जाएगा।
    - यदि कोई कटी हुई पतंग उनके घर में प्रवेश करती है तो यह उनके लिए शुभ होगा।

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    जगदीश ने घर की दीवारों पर पतंग टांग रखा है।
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    जगदीश बताते हैं कि घर में एक लाख रुपए की पतंग का कलेक्शन है।
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Web Title: Makar Shankarnti Spical Stroy In Jhansi
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