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पति की इस बात से अंजान थी पत्नी, जब पता चला तो बोली- अजीब लगा

एक लावारिस शव का अंतिम संस्कार करने में करीब 2000 रुपए का खर्च आता है।

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 09:50 AM IST
अजीत जैन बोले- मुझे ये सब काम करने की प्रेरणा अपने पिताजी मिली है। अजीत जैन बोले- मुझे ये सब काम करने की प्रेरणा अपने पिताजी मिली है।

ललितपुर. यूपी के ललितपुर का रहने वाला एक व्यक्ति अपने साथियों की मदद से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करता है। अब तक वह करीब 500 शवों को पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ दाह संस्कार कर चुका है। पत्नी इस बात से अंजान थी। जब उसको ये बात पता चली तो उसे अजीब लगा, लेकिन अब पति का पूरा साथ देती है। 1 शव में आता है 2000 रुपए का खर्च...

- रेडीमेड कपड़े के शो रूम संचालक नझाई बाजार थाना क्षेत्र के रहने वाले अजीत जैन (अज्जू बाबा) ने बताया, ''मुझे ये सब काम करने की प्रेरणा अपने पिताजी मिली है। वो भी इसी तरह गरीब और निर्धन व्यक्तियों की मदद किया करते थे।''
- ''एक लावारिस शव का अंतिम संस्कार करने में करीब 2000 रुपए का खर्च आता है। धन की व्यवस्था के लिए बहुत सारे हमारे ऐसे दोस्त हैं जो हमेशा मदद करते रहते हैं।''
- ''मैं और मेरी टीम में जितने भी मेरे सहयोगी साथी है, वो निस्वार्थ भावना से इस कार्य को करते हैं।''
- ''मेरा मानना है, जब हमारे परिवार से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो हम उसका पूरी विधि-विधान से अंतिम संस्कार करते हैं। जो लावारिस शव होता है वह भी किसी न किसी परिवार का सदस्य होता है, लेकिन उसके साथ दुर्भाग्य इस बात का होता है कि उसके परिवार को उसकी मौत की सूचना नहीं मिलती है।''
- ''ऐसे लावारिस शवों को हम अपने परिवार का सदस्य मान कर उनका अंतिम संस्कार करते हैं।''

पत्नी थी इस काम से अनजान
- पत्नी अंजली ने बताया, ''शुरुआत में मेरे पति ने मुझे इस बात का पता नहीं चलेने दिया कि वो ऐसा काम करते हैं। जब मैंने पहली बार सुना तो मुझे कुछ अजीब सा लगा। बाद में मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरे पति इतने उपकार का काम करते हैं।''
- ''जिन लोगों का दुनिया में कोई नहीं है, उनका अंतिम संस्कार कर जो पुण्य का काम होता है, मैं उनको अपने शब्दों में बयां नहीं कर पा रही हूं।''

पत्नी अंजली ने बताया- शुरुआत में मेरे पति ने मुझे इस बात का पता नहीं चलेने दिया कि वो ऐसा काम करते हैं। पत्नी अंजली ने बताया- शुरुआत में मेरे पति ने मुझे इस बात का पता नहीं चलेने दिया कि वो ऐसा काम करते हैं।
मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरे पति इतने उपकार का काम करते हैं। मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरे पति इतने उपकार का काम करते हैं।
Man funeral of unclaimed dead bodies
Man funeral of unclaimed dead bodies
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अजीत जैन बोले- मुझे ये सब काम करने की प्रेरणा अपने पिताजी मिली है।अजीत जैन बोले- मुझे ये सब काम करने की प्रेरणा अपने पिताजी मिली है।
पत्नी अंजली ने बताया- शुरुआत में मेरे पति ने मुझे इस बात का पता नहीं चलेने दिया कि वो ऐसा काम करते हैं।पत्नी अंजली ने बताया- शुरुआत में मेरे पति ने मुझे इस बात का पता नहीं चलेने दिया कि वो ऐसा काम करते हैं।
मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरे पति इतने उपकार का काम करते हैं।मुझे बहुत खुशी हुई कि मेरे पति इतने उपकार का काम करते हैं।
Man funeral of unclaimed dead bodies
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