--Advertisement--

पुलिस वाले ने दी मुखग्न‍ि, मौत से पहले बोला था- साब! बचा लो मुझे

झांसी के इलाइट चौराहे पर करीब 20- 25 दिन से एक लावारिस व्यक्ति बीमार हालत में रह रहा था।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 04:12 PM IST
शहर के इलाइट चौराहे पर करीब 20-25 दिन से एक लावारिस व्यक्ति बीमार हालत में रह रहा था। शहर के इलाइट चौराहे पर करीब 20-25 दिन से एक लावारिस व्यक्ति बीमार हालत में रह रहा था।

झांसी. यूपी के झांसी में टीवी की बीमारी के चलते लावारिस व्यक्ति की मौत के बाद एक पुलिस वाले ने पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं कुछ दिन पहले जब वो बीमारी से झांसी के एक चौराहे पर तड़प रहा था, उस समय इसी कॉन्स्टेबल ने उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया था और अपने खर्चे से उसका इलाज करवाया था। मृतक ने सिपाही से कहा था- साब! बचा लो मुझे...

- डीआईजी ऑफिस में सोशल साइट्स का काम देख रहे कॉन्स्टेबल जितेंद्र यादव ने बताया, ''शहर के इलाइट चौराहे पर करीब 20- 25 दिन से एक लावारिस व्यक्ति बीमार हालत में रह रहा था।''

- ''करीब 10 दिन पहले मेरी उस पर नजर पड़ी तो मैंने उससे कहा कैसे हो भाई? उसने मुझे अपना नाम बिहारी(39) बताया और मुझसे कहा- साब बचा लो मैं मर जाऊंगा।''
- ''मैं समझ गया इसे कोई गंभीर बीमारी है और मैंने आनन-फानन में उसे ऑटो पर बैठा कर जिला अस्पताल में भर्ती करवा दिया। वहां डॉक्टर्स ने बताया कि इसे टीवी की बीमारी है। फिर मुझसे जो बन सका मैंने उसका इलाज करवाया।''

आप आते हो तो अच्छा लगता है
- ''इलाज के दौरान जब मैं उससे मिलने जाता था, तो वो मुझसे कहता था- आप यहां आते हो तो बहुत अच्छा लगता है। 14 जनवरी की रात उसकी इलाज के दौरान डेथ हो गई। बिहारी का कोई रिश्तेदार नहीं था।''
- ''मुझे इलाज कराते-कराते उससे अपनापन महसूस होने लगा था। इसलिए मैंने मंगलवार को पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ बिहारी का अंतिम संस्कार किया।''

कौन हैं जितेंद्र यादव?
- झांसी में डीआईजी ऑफिस की सोशल मीडिया सेल में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव को कुछ दिन पहले में रहे प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद की ओर से प्रशस्ति पत्र दिया गया था।
- जितेंद्र पिछले कई महीनों से झांसी के प्रदर्शनी ग्राउंड के झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं।
- इसके अलावा उन्होंने लावारिस बुजुर्गों का अंतिम संस्कार भी किया था। वो समय-समय पर जरूरतमंदों की मदद करते रहते हैं।

'इलाज के दौरान जब मैं उससे मिलने जाता था, तो वो मुझसे कहता था- आप यहां आते हो तो बहुत अच्छा लगता है। 'इलाज के दौरान जब मैं उससे मिलने जाता था, तो वो मुझसे कहता था- आप यहां आते हो तो बहुत अच्छा लगता है।
14 जनवरी की रात उसकी इलाज के दौरान डेथ हो गई। 14 जनवरी की रात उसकी इलाज के दौरान डेथ हो गई।
मुझे इलाज कराते-कराते उससे अपनापन महसूस होने लगा था। मुझे इलाज कराते-कराते उससे अपनापन महसूस होने लगा था।
इसलिए मैंने मंगलवार को पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ बिहारी का अंतिम संस्कार किया। इसलिए मैंने मंगलवार को पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ बिहारी का अंतिम संस्कार किया।