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बड़ी-बड़ी सेना नहीं हिला सकीं ये चट्टान, 1 उंगली से हिलती है वो, सामने आया सच

झांसी में अठौंदना पहाड़ है। इस पहाड़ पर एक ऐसी रहस्यमई चट्टान है, जिसे अंग्रेजों ने गिराने की कोश‍िश की थी।

Danik Bhaskar | Dec 06, 2017, 10:00 PM IST
झांसी शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर जंगल के किनारे अठौंदना पहाड़ पर यह चट्टान मौजूद है। झांसी शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर जंगल के किनारे अठौंदना पहाड़ पर यह चट्टान मौजूद है।

झांसी. शहर से महज कुछ किलोमीटर दूर अठौंदना पहाड़ है। इस पहाड़ पर एक ऐसी रहस्यमई चट्टान है, जिसे अंग्रेजों से लेकर औरंगजेब की सेना तक ने हिलाने की कोश‍िश की, लेकिन सफल नहीं हुए। गौर करने वाली बात ये है कि एक भक्त के अंगूठे से चट्टान हिल जाती है। जमीन से करीब 600 फीट ऊंचाई पर इस चट्टान का DainikBhaskar.com की टीम ने रियलिटी चेक किया।

जब माता ने भक्त के बेटे का मांगा था सिर...

- झांसी शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर जंगल के किनारे इस पहाड़ के पास टीम पहुंची तो वहां अपना आश्रम बनाकर रह रहे महंत राम कुमार गिरी से मुलाकात हुई।
- महंत और उनके अन्य साथी के साथ हम पहाड़ की ओर चल दिए। रास्ते में महंत राम कुमार गिरी ने हमें मंदिर की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया, "डुगडुगी माता मंदिर बहुत ही प्राचीन है। बताया जाता है कि कई साल पहले पहाड़ के नीचे पहुज नदी ने अपना विकराल रुप दिखाया था। ऐसी बाढ़ आई थी कि आसपास कुछ भी नहीं बचा।"
- "एक गडरिया (चरवाहा) के पास उसका बेटा और 6-7 बकरियां बची थीं। वो बेटे के साथ इसी पहाड़ के नीचे बकरियां चरा रहा था। उसी समय चरवाहा को एक शिला दिखी और आवाज आई...मुझे उठाओ और पहाड़ी पर स्थापित करो। जब वह पास में गया तो माता ने उसे कन्या रूप में दर्शन दिए।"
- "माता ने उससे कहा, तू मुझे पहाड़ के ऊपर ले चल। चरवाहा उनका हाथ पकड़कर पहाड़ पर ले आया, इस दौरान उसका बेटा भी उसके साथ था।"
- "पहाड़ के ऊपर माता ने चरवाहा की परीक्षा ली और कहा- तू अपने बेटे का शीश काटकर मुझे चढ़ा दे। उसने पूरी भक्ति के साथ माता को अपने बेटे का सिर काटकर चढ़ा दिया।"
- "बेटे की मौत से दुखी चरवाहा से माता ने कहा अब तू वापस जा। जब वो पहाड़ से नीचे उतर रहा था, तभी रास्ते में उसका बेटा जिंदा मिल गया। तभी से इस जगह की महत्ता बढ़ गई, लोग अपनी मनोकामना लेकर दूर-दूर से आने लगे।"

गुस्साए अंग्रेजों ने मूर्ति पर बारूद के गोलों से किया था हमला

- मंदिर के पुजारी बृजलाल ने बताया, "100 पहले से हमारे बुजुर्ग बताते चले आए हैं, लेकिन यह कंफर्म नहीं है कि इस मंदिर को बने कितने साल बीत गए। जो भक्त सच्ची मनोकामना लेकर आता है, उससे यह पत्थर हिल जाता है।''

- पहले औरंगजेब की सेना ने यहां हमला किया, लेकिन वे इस चट्टान को नहीं हिला सके। इसके बाद अंग्रेजी सेना ने इस पत्थर को हटाने की कोशिश की, वो भी सफल नहीं हुए। पत्थर न हटा पाने से गुस्साए अंग्रेजों ने माता की मूर्ति को बारूद के गोलों से खंडित कर दिया।"

चट्टान के हिलने के रियलिटी चेक में हुआ ये खुलासा

- मंदिर के ऊपर मौजूद चट्टान को पहले दोनों पुजारियों ने हिलाया। उन्होंने अपने दोनों हाथ के अंगूठे एक जगह लगाए और चट्टान हिलने लगी।

- इसके बाद dainikbhaskar.com के रिपोर्टर ने खुद दम के साथ चट्टान को हिलाया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। फिर पुजारी की तरह एक प्वाइंट पर अपने दोनों हाथ के अंगूठे लगाए, तो चट्टान हिलने लगी।

- रियलटी चेक में सामने आया कि चट्टान में ऐसा कोई विशेष चमत्कार नहीं है। बस उसका बेलेंस है, जो सिर्फ एक प्वाइंट से हिलती है।

रियलिटी चेक में रिपोर्टर ने खुद चट्टान को हिलाने की कोश‍िश की। रियलिटी चेक में रिपोर्टर ने खुद चट्टान को हिलाने की कोश‍िश की।
कभी औरंगजेब की सेना ने यहां हमला किया, लेकिन वे इस चट्टान को नहीं हिला सके। कभी औरंगजेब की सेना ने यहां हमला किया, लेकिन वे इस चट्टान को नहीं हिला सके।
अंग्रेजी सेना ने भी इस पत्थर को हटाने की कोशिश की, लेकिन वो भी सफल नहीं हुए। अंग्रेजी सेना ने भी इस पत्थर को हटाने की कोशिश की, लेकिन वो भी सफल नहीं हुए।
जमीन से करीब 600 फीट ऊंचाई पर मौजूद है ये चट्टान। जमीन से करीब 600 फीट ऊंचाई पर मौजूद है ये चट्टान।
पहाड़ पर डुगडुगी माता का मंदिर है, जिसके ऊपर वो विशाल चट्टान है। पहाड़ पर डुगडुगी माता का मंदिर है, जिसके ऊपर वो विशाल चट्टान है।