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पिता ने रोकी वायसराय की ट्रेन- बेटे ने बनाया बम, ऐसी थी इस शख्स की Life

पं. कृष्ण चंद्र शर्मा 4 बार विधायक रहे थे। पढ़ाई के दौरान ये बम बनाया करते थे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 27, 2018, 09:51 AM IST

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    झांसी (यूपी). बुंदेलखंड की गलियों से लेकर देश की संसद तक का सफर तय करने वाले आजादी के प्रखर योद्धा पंडित कृष्ण चंद्र शर्मा संघर्ष के पर्याय थे। आजादी के दिनों में वे पढ़ाई छोड़कर बम बनाते थे। पिता ने वायसराय की ट्रेन रोक कर कहा था- देश को गुलामी पसंद नहीं है।

    वायसराय की रोकी थी स्पेशल ट्रेन...

    - वरिष्ठ पत्रकार मोहन नेपाली ने कहा, ''बुंदेली माटी में 4 अगस्त 1914 को पंडित कृष्ण चंद्र शर्मा जन्में थे। इन्होंने 1948 में देश की संविधान सभा का सदस्य बन कर ना सिर्फ बुंदेलखंड क्षेत्र का मान बढ़ाया बल्कि देश के संविधान निर्माण में उन्होंने अहम योगदान दिया।''
    - ''देश प्रेम के संस्कार उन्हें बचपन से ही अपने स्टेशन मास्टर पिता लक्ष्मीनारायण से मिले थे। 1924 में झांसी से बल्लभगढ़ के मध्य वायसराय की स्पेशल ट्रेन पहुंची तो स्टेशन मास्टर लक्ष्मी नारायण ने लाल झंडी दिखाकर रोक दी।''
    - ''जब उनसे इस बात का स्पष्टीकरण मांगा गया तो उन्होंने कहा- यदि आप वायसराय हैं तो मैं इस स्टेशन का वासी वायसराय हूं। इस देश को अंग्रेजों की गुलामी मंजूर नहीं है।''
    - ''उनके इस निर्भीक बयान के बाद उन्हें शारीरिक पीड़ा झेलने के साथ अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। इसके बाद वे बल्लभगढ़ से झांसी आ गए। इस घटना के बाद उनके पूरे परिवार में आजादी का ऐसा जज्बा कायम हुआ कि पूरी फैमिली जेल जाने से भी नहीं कतराई।''

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    पढ़ाई के दौरान बनाते थे बम


    - ''उस समय पंडित कृष्ण चंद्र जीआईसी के छात्र थे और झांसी के जार पहाड़ के पीछे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर बम बनाते थे। झांसी में ख्याति प्राप्त सेनानी कामरेड रुस्तम लैट्रिन के साथ मिलकर सिग्नल के तार काटना, प्रभात फेरी निकालना, घोड़े पर बैठकर आजादी के लिए प्रचार करना उनके प्रमुख कार्यों में से थे।''
    - ''1930 में उनकी विचारधारा में परिवर्तन आया और महात्मा गांधी, पंडित नेहरु के विचारों से प्रभावित होकर भी कांग्रेस के सक्रिय सदस्य बन गए। संघर्ष के दिनों में कई बार उन्हें शारीरिक और आर्थिक दंड के साथ जेल भी जाना पड़ा।''
    - ''1942 में जब देश 'करो या मरो' के नारे पर मचल रहा था और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजादी की हुंकार भर रहे थे, उस समय कृष्णचंद्र झांसी के बाजारों में गरज रहे थे।''

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    ऐसा था उनका पॉलिटिकल करियर

    - ''पं. कृष्ण चंद्र के पोते कुशाग्र शर्मा के मुताबिक, ''दादाजी 1948 में प्रथम स्वतंत्र भारत की संविधान सभा के सदस्य बने। भारत के संविधान पर पंडित कृष्ण चंद्र शर्मा के सिग्नेचर हैं।''
    - ''सांसद के रूप में पंडित कृष्ण चंद्र ने अपनी अमिट छाप छोड़ी। वह संसद में प्रखर व ओजस्वी वक्ता के रूप में जाने जाते थे। एक बार संसद में उनके भाषण पर पाकिस्तान के दूतावास ने उस समय विरोध प्रकट किया था, जब संसद सत्र चल रहा था।''
    - ''संसद में कीर्तिमान स्थापित करने के बाद उन्हें विधानसभा में भेजा गया। वह 4 बार विधायक रहे विधानसभा में भी उनकी धाक रहती थी।''
    - ''अपनी दलीलों से विरोधियों को परास्त कर देते थे, चाहे टीएन सिंह की सरकार हो या चौधरी चरण सिंह की सरकार हो, उपमंत्री संकेतक के रूप में उन्होंने अपनी दलीलों से विरोधियों के छक्के छुड़ा दिए।''
    - ''कृष्ण चंद शर्मा ललितपुर और महरौनी से लगभग 20 सालों तक विधायक रहे। 2 जुलाई 1993 में उनकी मृत्यु हो गई थी।''

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Web Title: Special Story Of Republic Day In Jhansi
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