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'हर मनोकामना पूरी करती हैं कुतिया महारानी', 2 गांवों के बीच बना है ऐसा मंदिर

झांसी के मऊरानीपुर इलाके में रेवन और ककवारा गांव के बीचोबीच कुतिया महारानी का मंदिर है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 09, 2018, 04:18 PM IST

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    स्थानीय लोगों के मुताबिक- दीपावली और दशहरा पर इनकी पूजा का महत्व है।

    झांसी. हिंदू धर्म में यूं तो 33 करोड़ देवी-देवताओं का जिक्र मिलता है, लेकिन झांसी के एक गांव में जिस देवी की पूजा की जाती है उनका नाम आपने यकीनन नहीं सुना होगा। झांसी के मऊरानीपुर इलाके में रेवन और ककवारा गांव है। दोनों गांवों के बीचोबीच कुतिया महारानी का मंदिर है। यहां रोजाना पूरे नियम से पूजा-पाठ भी होती है। यही हुई थी कुतिया की मौत...

    - यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि जब कुतिया की मौत हुई तो लोगों ने उसको उसी जगह दफना दिया। इसके बाद वो जगह पत्थर के रूप में तब्दील हो गया। जहां लोगों ने कुतिया का मंदिर बना कर उसकी प्रतिमा भी लगा दी।

    यहां जल चढ़ाती हैं महिलाएं

    - मंदिर में एक चबूतरे पर काले रंग की कुतिया की मूर्ति लगाई गई है। यहां महिलाएं पूजा-अर्चना कर जल चढ़ाती हैं। रेवन गांव की कुसुमलता बताती हैं कि कुतिया का मंदिर श्रद्धा का केंद्र है। कुतिया महारानी हर मनोकामना पूरी करती हैं। यहां कई सालों से कुतिया की पूजा की जाती है।

    आगे की स्लाइड्स में जानें यहां कैसे बना कुतिया महारानी का मंदिर....

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    ऐसे हुई थी भूखी कुतिया की मौत

    - बताया जाता है कि काफी समय पहले एक दिन ही दोनों गांवों में दावत थी। दावत के दौरान रमतूला बजाया जाता था, जिससे लोगों को पता चल जाता था कि दावत शुरू हो गई।

    - इस दौरान रेवन गांव से रमतूला बजा और कुतिया वहां पहुंची, लेकिन उसके पहुंचने से पहले दावत खत्म हो गई। थोड़ी देर में ककवार गांव से रमतूला बजा, लेकिन वहां भी वहीं हुआ।

    - गांव के बुजुर्ग श्याम लाल बताते हैं कि कुतिया बीमार और भूखी थी। दोनों गांवों के बीच दौड़ने के कारण वह थक कर बीच में बैठ गई। भूख और बीमारी के कारण वहीं उसकी मौत हो गयी। इसके बाद कुतिया को वहीं दफना दिया गया।

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    ये चमत्कार देख लोगों ने बनवाया मंदिर

    - लोगों का कहना है कि कुतिया को दफनाए जाने वाला स्थान पत्थर में तब्दील हो गया। लोगों ने यह चमत्कार देख एक छोटा सा मंदिर बनावा कर कुतिया की प्रमिता लगा दी। इस मंदिर को लोग कुतिया देवी के नाम से जानते हैं।

    - ककवारा गांव की महिला रामवती बताती हैं कि दीपावली और दशहरा पर इनकी पूजा का महत्व है। क्योंकि माना जाता है कि कुतिया की मौत इन्ही दिनों हुई थी। उनका कहना है कि कुतिया महारानी सबकी मनोकामना पूरी करती हैं। कुतिया को धैर्य का प्रतीक भी माना जाता है।

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