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ये है रानी लक्ष्मीबाई बनकर अंग्रेजों से लड़ने वाली की 5th जनरेशन, शेयर की ऐसी बातें

टीवी स्‍टार अंकिता लोखंडे को आने वाली फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' में एक अहम रोल मिला है।

राम नरेश यादव | Last Modified - Dec 16, 2017, 07:00 AM IST

    • 27 अप्रैल 2018 में रिलीज होने वाली 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' में अंकिता लोखंडे झलकारीबाई का रोल निभा रही हैं।

      झांसी. टीवी स्‍टार अंकिता लोखंडे को आने वाली फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' में एक अहम रोल मिला है। वो इस फिल्म में झलकारीबाई की भूमिका में नजर आएंगी। झलकारीबाई, रानी लक्ष्मीबाई की सेना में एक महत्वपूर्ण योद्धा थीं। DainikBhaskar.comआपको झलकारीबाई और उनकी पांचवी पीढ़ी के बारे में बता रहा है। पांचवी पीढ़ी का झलक उठा दर्द...

      - झलकारी बाई की पांचवी पीढ़ी के सदस्य दम्में और मंगल से मिलने के लिए दैनिकभास्कर डॉट कॉम की टीम उनके भोजला गांव पहुंची।

      - दम्मे ने बताया, हमारी बाईजू बुंदेलखंड की असली वीरांगना थी। झांसी की रानी उनपर खुद से ज्यादा विश्वास करती थीं। जिस घर में हम लोग रहते हैं, उसी में 5 पीढ़ी पहले बाईजू का जन्म हुआ था।''

      - ''जिस परिवार के पूर्वजों का इतना सौर्य रहा हो आज उनको पूछने वाला कोई नहीं है। मेरे परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी और गैर सरकारी नौकरी में नहीं है।''

      - ''बच्चे मिलाकर 50 आदमी का परिवार है सभी खेती पर आश्रित हैं और बुंदेलखंड में खेती के हालात किसी से नहीं छुपे हैं।''

      आज भी महफूज है झलकारी की तलवार

      - मंगल ने बताया, ''आज भी हमारे पास वीरांगना झलकारी बाई की पहचान स्वरूप एक तलवार रखी हुई है। हमने सुना है उनके जीवन पर आधारित एक फिल्म भी बन रही है। लेकिन हमारे पास फिल्ममेकर रिसर्च करने के लिए नहीं आए हैं।''
      - ''आज कल तो इतिहास के साथ छेड़छाड़ करना आम बात हो गई है। ऐसे ही झलकारीबाई के जीवन के साथ भी फिल्मों में छेड़छाड़ की जाएगी।''

      कौन थी झलकारीबाई ?

      - इतिहासकार जानकी शरण वर्मा बताते हैं, ''महारानी लक्ष्मीबाई की विश्वासपात्र सिपाही झलकारीबाई का जन्म भोजला गांव (झांसी) में 22 नवंबर 1830 को हुआ था। इनके पिता मराठाओं के सैनिक थे, इसीलिए इन्हें बचपन से ही हथियारों के साथ खेलना पसंद था।''

      - ''एक बार झलकारी के गांव में डाकुओं ने हमला कर दिया था। उन्होंने गांववालों के साथ मिलकर हमलावरों को ऐसा खदेड़ा कि उनके बहादुरी के चर्चे महल तक पहुंच गए।''

      - ''इसके बाद झलकारी की शादी एक सैनिक के साथ हो गई। एक बार झलकारीबाई मंदिर में लक्ष्मीबाई को बधाई देने गई तो रानी उन्हें देख हैरान रह गईं, क्योंकि झलकारी की शक्ल रानी से मिलती थी। फिर दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।''

      तोप के मुंह में झलकारीबाई को बांधकर अंग्रेजों ने उड़वा दिया था

      - 1857 में अंग्रेजों ने झांसी किले पर हमला कर दिया। रानी का एक सेनानायक गद्दार निकला, उसकी मदद से अंग्रेज किले तक पहुंचने में कामयाब हो गए।
      - रानी जब चारों तरफ से घिर गईं, तो झलकारी ने उनसे कहा- आप जाइए, मैं आपकी जगह लड़ती हूं। रानी किले से निकल गईं और झलकारी उनके वेश में लड़ती रहीं।

      - इसी बीच, अंग्रेज सरकार के मुखबिर ने जनरल रोज को पूरा रहस्य बताया और झलकारी पकड़ी गईं। रोज ने झलकारी से कहा- तू पागल है, अगर ऐसे पागल लोग हो जाएं तो हिंदुस्तान में हमारा रहना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद, अंग्रेजों ने झलकारीबाई को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया।

      राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्ता ने झलकारी बाई के बारे में ये लिखा था...

      जाकर रण में ललकारी थी,
      वह तो झांसी की झलकारी थी,
      गोरों से लड़ना सिखा गई,
      है इतिहास में झलक रही,
      वह भारत की ही नारी थी।

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      झलकारी बाई की पांचवी पीढ़ी के सदस्य दम्मे ने बताया- झांसी की रानी लक्ष्मीबाई इनपर खुद से ज्यादा विश्वास करती थी।
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      दम्मे ने बताया- जिस घर में हम लोग रहते हैं, उसी में 5 पीढ़ी पहले बाईजू (झलकारी बाई)का जन्म हुआ था।
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      इतिहासकार जानकी शरण वर्मा बताते हैं- अंग्रेजों ने जब रानी को चारों तरफ से घेर लिया था, तो झलकारी ने उनसे कहा- आप जाइए, मैं आपकी जगह लड़ती हूं।
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    Web Title: Story About Jhalkari Bai Fifth Generation
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