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हाथ-पांव में कीलें ठोकी फिर भी इस शख्स ने नहीं बताया था चंद्रशेखर का पता

झांसी. यूपी के झांसी के सीताराम चंद्रशेखर आजाद के बेहद करीबियों में से थे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 27, 2018, 11:10 AM IST

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    झांसी के सीताराम चंद्रशेखर से इतने प्रभावित हुए थे कि अपने नाम के आगे आजाद लगाने लगे थे।

    झांसी. यूपी के झांसी के सीताराम चंद्रशेखर आजाद के बेहद करीबियों में से थे। देश की आजादी के लिए इन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी उनकी फैमिली गुमनामी की जिंदगी जी रही है। हालत ये है कि बहू और 2 पोतियों की मौत पर कफन के लिए भी उधार पैसे मांगने पड़े थे।

    कफन खरीदने के लिए जब मांगने पड़े उधार पैसे

    - आजादी के दीवाने सीताराम आजाद के बेटे राजगुरु परिवार की हालत के बारे में कहते हैं, "मेरी पत्नी और 2 जुड़वां बेटियों की एक साथ मौत हुई थी। उस समय मेरे पास कफन के पैसे तक नहीं थे। बड़ी मुश्किल से रिश्तेदारों से उधार पैसे मांगकर कफन खरीदा। किसी के लिए इससे बड़ी विपदा और क्या हो सकती है।"

    - "जिसने देश की आजादी में अपना घर-बार नहीं देखा, उसके परिवार के पास कफन के पैसे न हो, तो ऐसी आजादी किस काम की। स्वतंत्रता के 70 साल बाद भी एक छत तक नसीब नहीं हुई। इससे अच्छा तो अंग्रेजों की गुलामी ही थी।"
    - "70 साल में कई सरकार आईं और चली गईं। लेकिन किसी को हमारी याद नहीं आई।"

    - बता दें, सीताराम के 3 बेटे और 4 बेटी थीं। सबसे बड़े बेटे लल्लूराम की कर्फ्यू में मौत हो गई थी। छोटा बेटा बाबू नामदेव ग्वालियर में रहता है और सबसे छोटा बेटा राजगुरु झांसी में अपनी बेटी और दामाद के साथ रहता है।

    चंद्रशेखर आजाद का पता पूछने के लिए ऐसे टॉर्चर करते थे अंग्रेज

    - इतिहास के जानकार जानकी शरण वर्मा बताते हैं, ''जब चंद्रशेखर आजाद झांसी आए तो उनकी मुलाकात सीताराम से हुई। सीताराम उनसे इतने प्रभावित हुए कि अपने नाम के आगे आजाद लिखने लगे और गांधी जी के नमक आंदोलन में खुलकर साथ दिया।''

    - ''चंद्रशेखर आजाद की खोज में अंग्रेज दिन-रात एक कर रहे थे। उस समय सीताराम ने उनकी बहुत मदद की थी।''

    - ''कई फ्रीडम फाइटरों ने आजाद के साथ मिलकर हथियारों की फैक्ट्री लगाई थी। आजाद को कुछ समय के लिए झांसी छोड़ना पड़ा था, लेकिन सीताराम वहीं डटे रहे और अंग्रेजों से लगातार लड़ाई करते रहे।''
    - ''चंद्रशेखर का पता पूछने के लिए उनके हाथ-पैरों में अंग्रेज कीलें ठोक देते थे, फिर भी सीताराम ने उनका पात नहीं बताया। इस बीच वे 6 बार जेल भी गए।''

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    चंद्रशेखर आजाद की खोज में अंग्रेज दिन-रात एक कर रहे थे। उस समय सीताराम ने चंद्रशेखर की बहुत मदद की थी।
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    फ्रीडम फाइटर सीताराम के बेटे राजगुरु।
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    इस किराए के मकान में फ्रीडम फाइटर सीताराम की बिताई पूरी जिंदगी।
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    जब चंद्रशेखर आजाद झांसी आए थे तो उनकी मुलाकात सीताराम से हुई थी।
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Web Title: The Freedom Fighter Living In Jhansi Had Given Gandhi Ji Support
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