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39 की उम्र में भी इस लेडी ने नहीं की शादी, एक इंसिडेंट ने बदल दी लाइफ

DainikBhaskar.com एक ऐसी लेडी के बारे में बता रह है, जिसने 39 की उम्र में भी शादी नहीं की।

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2018, 11:31 AM IST
ममता बताती हैं- पापा चाहते थे की मैं टीचर बनू, लेकिन मुझे उसमें इंटरेस्ट नहीं था। उनका मान रखने के लिए जॉब की। ममता बताती हैं- पापा चाहते थे की मैं टीचर बनू, लेकिन मुझे उसमें इंटरेस्ट नहीं था। उनका मान रखने के लिए जॉब की।

जालौन(यूपी). 12 जनवरी को यूथ डे है। DainikBhaskar.com एक ऐसी लेडी के बारे में बता रह है, जिसने 39 साल की उम्र में भी शादी नहीं की। 7 साल पहले हुए एक इंसीडेंट ने लाइफ को अलग ही मोड़ दे दिया। पूरी बॉडी डोनेट कर चुकी डॉक्टर ममता स्वर्णकार ने साल में 3 बार ब्लड डोनेट भी करती हैं। पिता की ख्वाहिश के चलते कई बार सपनों से समझौता करन पड़ा। 39 साल की उम्र में भी नहीं की शादी...


- जिले स्थित उरई के स्टेशन रोड के पास रहने वाली डॉ. ममता स्वर्णकार(39) के पिता मिश्रीलाल एक कवि हैं।
- मां शकुंतला सिंह हाउस वाइफ हैं। तीन भाई और दो बहनों के बीच पली बड़ी ममता बचपन से ही पढ़ने में अव्वल रही हैं।
- डॉ. ममता बताती हैं, ''मैंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से किया है। संस्कृत सब्जेक्ट से 1999 में एमए के दौरान गोल्ड मैडल मिला। 2005 में शिक्षा शास्त्र से पीएचडी कम्पलीट किया।''

- ''मिडिल क्लास फैमिली होने के बावजूद मम्मी-पापा ने हम सभी भाई-बहनों की अच्छी परवरिश और एजुकेशन में पूरा योगदान दिया है।''

- ''मेरी दोनों बहनों की शादी हो गई, लेकिन मेरे अंदर हमेशा से कुछ करने की ललक थी। इसलिए मैंने शादी करने से मना कर दिया।''
- ''एक बार एसआई के लिए सिलेक्शन हुआ था, लेकिन पापा ने ट्रेनिंग के लिए जाने नहीं दिया। फिर जीआईसी रामपुर में टीचिंग के लिए सिलेक्शन हुआ।''
- ''उसके बाद पीडब्लूडी में स्टेनों के लिए सिलेक्शन हुआ, लेकिन पापा की वजह से मैंने ये सब जॉब नहीं की। पापा हमेशा कहते थे कि बेटी कुछ भी काम करना इज्जत और नाम रखना।''

- ''मैंने हमेशा उनका मान रखा। उन्हें टीचिंग लाइन बहुत पसंद थी, लेकिन मुझे बिल्कुल नहीं अच्छी लगती थी। फिर भी उनके मन को रखने के लिए टीचिंग जॉब की।''
- ''लाइफ में लगातार स्ट्रगल की वजह से मैंने कभी शादी करने के बारे में नहीं सोचा। अब मुझे सोशल वर्क में इतना अच्छा लगता है कि फ्यूचर में भी शादी करने का कोई इरादा नहीं है।''

स्पोर्ट्स में है रुचि
- इनके मुताबिक, ''इन्हें स्पोर्ट्स बचपन से ही पसंद था। 8 साल में डिस्ट्रिक्ट जालौन से चैंपियन रही।''
- ''रेस लगाना इनका फेवरेट गेम है। साथ ही फुटबॉल और वॉलीबॉल खेलना पसंद करती हैं।
- ''पढ़ाई के दौरान इन्हें तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान द्वारा 4 गोल्ड मेडल भी मिल चुके हैं। वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट पीटीआई की पोस्ट पर हैं।''

बॉडी डोनर कर 31 बार कर चुकी हैं ब्लड डोनट

- ममता ने बताया, ''पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने नारी सम्मान के दौरान फर्स्ट बॉडी डोनर और ब्लड डोनर के लिए मुझे अवॉर्ड भी मिल चुका है।''

- ''5 साल पहले मैं अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेज को डोनेट कर चुकी हूं। 31 बार ब्लड डोनेट भी किया है। हर साल 12 जनवरी युवा दिवस, 14 जून और 1 अक्टूबर इसके बाद इमरजेंसी में 4 बार भी ब्लड डोनेट किया है।''
- ''अब डॉक्टर मुझे इतनी जल्दी-जल्दी ब्लड देने पर मना करते हैं तो मैं इमरजेंसी में ऑन कॉल ब्लड दे देती हूं।''
- ''मेरा एक संकल्प है कि इस जनपद में किसी भी व्यक्ति की मौत खून की कमी से नहीं होने दूंगी।''

इसलिए लिया ऐसा फैसला

- साल 2001 से मैंने ब्लड डोनेट करने का संकल्प लिया था तब से यह लगातार ब्लड डोनेट करती आ रही हैं।
- यह बताती हैं, ''इसी साल(2001) जब मेरी भाभी को बेटी हुई। उनके पास वाले बेड पर एक महिला दर्द से तड़प रही थी, उसे ब्लड की जरूरत थी।''
- ''ब्लड न मिलने पर उसकी मौत हो गई। मुझे बड़ा अफसोस हुआ कि वहां मौजूद होने के बावजूद मैं उसकी मदद नहीं कर पाई।''

दो बेटियों को किया है अडॉप्ट
- इन्होंने दो बेटियों को अडॉप्ट किया है। दोनों कस्तूरबा कॉलेज में पढ़ती हैं।
- इनका कहना है, ''जालौन में कुछ वृद्ध आश्रम है, जिनमें मैं बराबर योगदान करती हूं और इस समय विश्व मानव अधिकार से भी जुड़ी हुई हूं।''
- ''आने वाले दिनों में जितनी भी लावारिस लाशें मिलेंगी उनका अंतिम संस्कार मेरी महिला टीम करेगी।''
- ''6 साल से लगातार पुलिस परामर्श केंद्र में घरोलू समस्याओं पर समझौता करा रही हूं, जिसके लिए हर रविवार पुलिस के साथ बैठती हूं।''


क्यों मनाते हैं यूथ डे ?
- इंडिया में स्वामी विवेकानंद की बर्थ एनवर्स‍िरी 12 जनवरी को पहला साल राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णय के मुताबिक, 1984 को 'अंतरराष्ट्रीय युवा ईयर' घोषित किया गया था। इसके महत्व का विचार करते हुए भारत सरकार ने घोषणा की कि सन 1984 से 12 जनवरी यानि स्वामी विवेकानंद के बर्थडे का दिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में देशभर में मनाया जाए।
- भारत सरकार का विचार था- ''स्वामी जी का दर्शन-स्वामी जी के जीवन में निहित उनका आदर्श, यही भारतीय युवकों के लिए प्रेरणा का बहुत बड़ा स्रोत हो सकता है।''

5 साल पहले अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेज को डोनेट कर चुकी हैं। 31 बार ब्लड डोनेट भी किया है। 5 साल पहले अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेज को डोनेट कर चुकी हैं। 31 बार ब्लड डोनेट भी किया है।
पढ़ाई के दौरान इन्हें तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान द्वारा 4 गोल्ड मेडल भी मिल चुके हैं। वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट पीटीआई की पोस्ट पर हैं। पढ़ाई के दौरान इन्हें तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान द्वारा 4 गोल्ड मेडल भी मिल चुके हैं। वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट पीटीआई की पोस्ट पर हैं।
यह बताती हैं- साल 2001 में भाभी को बेटी हुई। उनके पास वाले बेड पर एक महिला की ब्लड न मिलने पर मौत हो गई। फिर फैसला लिया कि अब जनपद में किसी भी व्यक्ति की मौत खून की कमी से नहीं होने दूंगी। यह बताती हैं- साल 2001 में भाभी को बेटी हुई। उनके पास वाले बेड पर एक महिला की ब्लड न मिलने पर मौत हो गई। फिर फैसला लिया कि अब जनपद में किसी भी व्यक्ति की मौत खून की कमी से नहीं होने दूंगी।
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने नारी सम्मान के दौरान फर्स्ट बॉडी डोनर और ब्लड डोनर के लिए इन्हें अवॉर्ड भी दे चुके हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने नारी सम्मान के दौरान फर्स्ट बॉडी डोनर और ब्लड डोनर के लिए इन्हें अवॉर्ड भी दे चुके हैं।
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ममता बताती हैं- पापा चाहते थे की मैं टीचर बनू, लेकिन मुझे उसमें इंटरेस्ट नहीं था। उनका मान रखने के लिए जॉब की।ममता बताती हैं- पापा चाहते थे की मैं टीचर बनू, लेकिन मुझे उसमें इंटरेस्ट नहीं था। उनका मान रखने के लिए जॉब की।
5 साल पहले अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेज को डोनेट कर चुकी हैं। 31 बार ब्लड डोनेट भी किया है।5 साल पहले अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेज को डोनेट कर चुकी हैं। 31 बार ब्लड डोनेट भी किया है।
पढ़ाई के दौरान इन्हें तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान द्वारा 4 गोल्ड मेडल भी मिल चुके हैं। वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट पीटीआई की पोस्ट पर हैं।पढ़ाई के दौरान इन्हें तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान द्वारा 4 गोल्ड मेडल भी मिल चुके हैं। वर्तमान में डिस्ट्रिक्ट पीटीआई की पोस्ट पर हैं।
यह बताती हैं- साल 2001 में भाभी को बेटी हुई। उनके पास वाले बेड पर एक महिला की ब्लड न मिलने पर मौत हो गई। फिर फैसला लिया कि अब जनपद में किसी भी व्यक्ति की मौत खून की कमी से नहीं होने दूंगी।यह बताती हैं- साल 2001 में भाभी को बेटी हुई। उनके पास वाले बेड पर एक महिला की ब्लड न मिलने पर मौत हो गई। फिर फैसला लिया कि अब जनपद में किसी भी व्यक्ति की मौत खून की कमी से नहीं होने दूंगी।
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने नारी सम्मान के दौरान फर्स्ट बॉडी डोनर और ब्लड डोनर के लिए इन्हें अवॉर्ड भी दे चुके हैं।पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने नारी सम्मान के दौरान फर्स्ट बॉडी डोनर और ब्लड डोनर के लिए इन्हें अवॉर्ड भी दे चुके हैं।
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