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अन्ना प्रथा को खत्म करने के लिए सरकार ने दिए थे 100 करोड़, हालात में नहीं हुआ सुधार

बुंदेलखंड में खुले पशुओं के लिए दिए थे 100 करोड़। फ‍िर भी नहीं हुआ सुधार।

राम नरेश यादव | Last Modified - Nov 13, 2017, 05:19 PM IST

झांसी.बुंदेलखंड के पिछड़े जिलों के लिए 7700 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज दिया गया था। इस पैकेज में एक अरब रुपए सिर्फ अन्ना प्रथा को खत्म करने के लिए थे। पूरे 1 अरब रुपए खर्च भी हो गए लेकिन अन्ना प्रथा कोई सुधार नहीं हुआ। सदियों से चली आ रही अन्ना प्रथा अब किसी विपदा से कम नहीं हैं। केंद्र में रही कांग्रेस सरकार ने दिया था बजट...
- कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भानू सहाय ने बताया, जब 2009-10 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी उस समय 7700 करोड़ रुपए का बुंदेलखंड विशेष पैकेज दिया गया था जिसमें 100 करोड़ रुपए अन्ना प्रथा के लए दिए गए थे। लेकिन अब आलम यह है कि मौजूदा स्थिति में अन्ना प्रथा और इजाफा हो गया है।
- सरकारी आकड़े बतातें है कि झांसी मंडल में 5 लाख अन्ना पशु है जिनमें से 1.65 लाख तो गाए हैं। चित्रकूटधाम मंडल का हाल तो इससे कहीं ज्यादा चौकाने वाला है पूरे मंडल में कुल 19.49 लाख मवेशी हैं। इनमें 12.90 लाख गायें दर्ज हैं।
- बुंदेलखंड में लगातार पड़ने वाले सूखे और अनाज की कमी की वजह से हजारों लोगों ने यहां से पलायन तो किया ही है साथ ही चारे की कमी की वजह से जानवरों को भी जान गंवानी पड़ रही है।
- डिमरौनी के रहने वाले हरगोविंद बताते हैं, "हमारे गांव से लगा हुआ वन विभाग का जंगल है। आसपास के जितने भी गांव वाले हैं वे सभी इसी जंगल में गायों को छोड़ जाते हैं। ये गायें हर साल हमारी 30-35% फसल बर्बाद कर देती हैं। हाईवे पर प्रतिदिन 3-4 गायों के एक्सिडेंट हो जाते हैं। जिनमें से ज्यादातर गायों की मौत हो जाती है।"
गौशाला में सुरक्षित नहीं है गायें
- बीते साल मोठ तहसील की गौशाला में 60 गायों की मौत हो गई थी। अफसरों के सामने ही दो गायों ने दम तोड़ा दिया था। ललितपुर के तालबेहट की डेयरी में भी गायों की मौत हुई थी।
- ललितपुर शहर की गौशाला से भी आए दिन गायों के मरने की सूचनाएं आती रहती हैं। ऐसे ही सेकड़ों मामले हर महीने बुंदेलखंड से आते हैं। एक साल पहले झांसी के मऊरानीपुर में एक खेत में 10 गायें मरी मिली थी।
क्या कहते हैं पशु डॉक्टर
- मुख्य पशु डॉक्टर योगेन्द्र सिंह तोमर ने बताया, बुंदेलखंड में ज्यादातर गायों की मौत का कारण ‘एनिमिक’ है। एनिमिक गायों में तब होता है जब उन्हें पर्याप्त भूसा और पानी न मिले। अभी सरकार की ओर से जनपद की किसी भी डेरी में कोई सुविधा नहीं किया गया है। कई पशु राहत केंद्र खुलने के बाद भी हालातों में सुधार नहीं आया है।
- बीते सालों में सूखा पड़ने की वजह से बुंदेलखंड में गौशालाओं की बाढ़ आ गई है। सातों जनपदों में 150 से ज्यादा पशु राहत केंद्र खोले गए लेकिन गायों के हालात नहीं सुधरे।
- झांसी में 15000, ललितपुर 100000, जालौन 60000, बांदा 81495, चित्रकूट 110000, हमीरपुर 70450 और महोबा 85000 गायों की संख्या है।
क्या है अन्ना प्रथा
- रिटायर प्रिंसिपल भईयालाल के अनुसार, यहां चैत्र महीने में फसलों की कटाई के बाद अन्ना प्रथा का चलन सदियों पहले से था। लेकिन बीते 20 साल से किसानों ने इसे हमेशा के लिए अपना लिया है।
- पहले इसका चलन इसलिए था कि मार्च-अप्रैल तक सभी की फसलें कट जाती थी उसके बाद खेत खाली हो जाते थे। खाली खेतों में किसान जानवरों को छोड़ दिया करता था।
- इसकी एक टेक्निकल वजह यह थी कि खुले खेतों में जानवरों के घूमनें से उनके द्वारा खेतों में किया गया गोमूत्र और गोबर खाद का काम करता था। जिससे खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती थी।
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