बांदा लोकसभा सीट / तीनों दलों से दलबदलू पूर्व सांसद मैंदान में; पटेलों के वर्चस्व की जंग के बीच त्रिकोणीय संघर्ष



banda seat patels significance will make competition triangle affair
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banda seat patels significance will make competition triangle affair

  • वर्तमान में भाजपा के भैरों प्रसाद मिश्रा हैं इस सीट से सांसद
  • कांग्रेस ने डकैत ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल को दिया है टिकट

Dainik Bhaskar

May 04, 2019, 10:45 PM IST

बांदा. बुंदेलखंड की इस लोकसभा सीट पर इस बार काफी रोचक समीकरण बना हुआ है। तीनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशी दलबदलू हैं। तीनों ही पूर्व सांसद हैं और पिछली बार अलग अलग दलों से चुनाव लडे़ थे। इस सीट पर अब तक कांग्रेस ने चार बार, भाजपा को तीन बार, सीपीआई-बसपा-सपा ने दो-दो बार अपनी जीत का परचम इस सीट पर लहराया है। फिलहाल इस लोकसभा सीट पर इस वक्त भाजपा के भैरों प्रसाद मिश्रा सांसद हैं, जिनका टिकट इस बार कट गया है।

 

भाजपा ने इस बार मौजूदा सांसद भैरों प्रसाद मिश्र की जगह पर पूर्व मंत्री आरके सिंह पटेल को टिकट देकर बांदा में बैकवर्ड कार्ड खेला है। वहीं सपा ने श्यामा चरण गुप्ता को मैदान में उतारा है। वह वर्तमान में इलाहाबाद से भाजपा के सांसद हैं। जबकि कांग्रेस ने डकैत ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है। लेकिन इस बार यहां काटें की टक्कर देखने को मिलेगी। क्योंकि सपा और बसपा के एक जुट होने पर चुनावी समीकरण में बदलाव हो सकता है। 

 

बांदा लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

बांदा लोकसभा सीट पर पहली बार 1957 में लोकसभा चुनाव हुए और राजा दिनेश सिंह सांसद चुने गए। इसके बाद 1962 में हुए चुनाव में सावित्री निगम कांग्रेस से सांसद बनीं। बांदा में कांग्रेस के विजयी रथ पर 1967 में ब्रेक लगा और यहां से वामपंथी दल सीपीआई के जागेश्वर सांसद चुने गए। इसके बाद 1971 में हुए चुनाव में जनसंघ अपना खाते खोलने में कामयाब रहा।

 

1977 में यहां फिर से उलटफेर देखने को मिला और लोकदल के अंबिका प्रसाद ने जीत हासिल की। हालांकि 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की और रामनाथ दुबे सांसद बने। इसके बाद 1984 में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की, लेकिन इसके बाद से अभी तक कांग्रेस वापसी नहीं कर सकी है। 1989 में सीपीआई जीत हासिल करने में कामयाब रही।

 

बांदा लोकसभा सीट पर भाजपा का कमल पहली बार 1991 में खिला था। प्रकाश नारायण यहां से सासंद चुने गए, लेकिन 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा के राम सजीवन सिंह सांसद बने। इसके बाद 1998 में भाजपा ने रमेश चंद्र द्विवेदी को मैदान में उतारकर वापसी की, लेकिन एक साल के बाद ही 1999 में हुए चुनाव में बसपा ने भाजपा को मात देकर यह सीट छीन ली।

 

इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा ने श्यामाचरण गुप्ता को मैदान में उतारा और चुनाव जीतकर वो संसद तक पहुंचे। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के आरके पटेल सांसद बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा के टिकट पर भैरो प्रसाद मिश्रा यहां से सांसद चुने गए।

 

बांदा संसदीय सीट की पांच विधानसभा सीटें
इस लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें बाबेरु, नारैनी, बांदा, चित्रकूट और माणिकपुर विधानसभा सीटें शामिल हैं। नरैनी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। मौजूदा समय में सभी पांचों सीटों पर भाजपा का कब्जा है।

 

लोकसभा वर्ष  जीता हुआ प्रत्याशी
2014 भैरों प्रसाद मिश्रा, भाजपा
2009 आर के सिंह पटेल, सपा
2004 श्यामा चरण गुप्ता, सपा
1999 राम सजीवन, बसपा
1998 रमेश चंद्र दिवेदी, भाजपा
1996 राम सजीवन सिंह, बसपा
1991 प्रकाश नारायण, भाजपा
1989 राम सजीवन,कम्युनिस्ट पार्टी
1984 भीष्म देव दुबे, कांग्रेस
1980 राम नाथ दुबे, कांग्रेस
1977 अंबिका प्रसाद, भारतीय लोकदल
1971 राम रतन शर्मा, भारतीय जनसंघ
1967 जगेश्वर, कम्युनिस्ट पार्टी 
1962 सावित्री निगम, कांग्रेस
1957 राजा दिनेश सिंह, कांग्रेस
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