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आरोप / झांसी के डीएम एससी-एसटी कोर्ट बरेली में तलब, बतौर मुल्जिम हाजिरी देंगे



शिवसहाय अवस्थी वर्ष 2011 बैच के आईएएस हैं। शिवसहाय अवस्थी वर्ष 2011 बैच के आईएएस हैं।
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शिवसहाय अवस्थी वर्ष 2011 बैच के आईएएस हैं।शिवसहाय अवस्थी वर्ष 2011 बैच के आईएएस हैं।
  • एपीओ को मानदेय दिलाने की बजाय जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल और धमकी देने पर परिवाद

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2018, 12:08 AM IST

झांसी.  डीएम शिवसहाय अवस्थी और संभल के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक हरेंद्र कुमार सिंह को एससी-एसटी कोर्ट ने तलब किया है। वे बतौर मुल्जिम हाजिरी देने 25 सितंबर को बरेली पहुंचेंगे। यह मामला एपीओ को मानदेय दिलाने की बजाय जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल और धमकी देने के आरोप से जुड़ा है।

 

बता दें कि बरेली में तैनाती के दौरान शिवसहाय अवस्थी सीडीओ और हरेंद्र कुमार सिंह मनरेगा के डीसी पद पर कार्यरत थे। अधिवक्ता गौरव सिंह ने एडीजे द्वितीय-विशेष न्यायधीश एससी-एसटी एक्ट रविनाथ की अदालत में उनके खिलाफ परिवाद दाखिल किया है । इसमें बताया कि उनकी बहन गरिमा सिंह संयुक्त विकास आयुक्त कार्यालय बरेली में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी थी। जिसे सात मई 2012 से मानदेय नहीं मिल रहा था।

 

शिकायत के बाद भी राहत नहीं मिली : शासन व प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जिस पर आदेश हक में आए लेकिन अफसरों ने सुनवाई नहीं की। अवमानना दायर करने पर सीडीओ शिवसहाय अवस्थी ने अपूर्ण मानदेय भुगतान कराया।

 

इसकी शिकायत करने दोनों भाई-बहन 23 मई 2015 को सीडीओ अवस्थी के चैंबर में पहुंचे तो वहां पहले से डीसी हरेंद्र कुमार भी मौजूद थे। आरोप है कि दोनों अफसरों ने जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर भाई-बहन को अपमानित किया। जान से मारने की धमकी देकर चैंबर से निकाल दिया। शिकायत के बाद भी जब पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो कोर्ट में परिवाद दाखिल किया।

 

झांसी में तैनात हैं आईएएस अवस्थी : शिवसहाय अवस्थी वर्ष 2011 बैच के आईएएस हैं। वह बरेली में मुख्य विकास अधिकारी पद पर तैनात रहे हैं। वहां से स्थानांतरित होकर रामपुर में डीएम तैनात किए गए थे। जिसके बाद झांसी भेजकर डीएम के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।

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