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झांसी: एमआरआइ इंचार्ज की पत्नी के हत्यारे गिरफ्तार, घटना के 2 माह 20 दिन बाद पकड़े गए आरोपी

घटना को कालोनी की रहने वाली एक महिला और उसके रिश्तेदारों ने अंजाम दिया था।

Danik Bhaskar | Aug 07, 2018, 12:33 PM IST

झांसी. यहां बीते ढाई महीने पहले दिनदाहाड़े महिला की हत्याकाण्ड का पुलिस ने खुलासा किया है। घटना को मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित कॉलोनी में अंजाम दिया गया था। घटना को कालोनी की रहने वाली एक महिला और उसके रिश्तेदारों ने अंजाम दिया था। पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन हर बार निराशा हाथ लग रही थी। लम्बा समय बीतने पर पुलिस ने आरोपियों पर 25-25 ह़जार रुपए का इनाम घोषित कर दिया था। सोमवार की शाम पुलिस ने आरोपियों को रेलवे स्टेशन के बाहर से पकड़ लिया।

क्या है पूरा मामला: मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित कर्मचारियों की कॉलोनी में एमआरआइ विभाग के इंचार्ज वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव अपनी पत्नी आशा श्रीवास्तव और पुत्री खुशी श्रीवास्तव के साथ रहते थे। 17 मई की सुबह वीरेन्द्र अपनी ड्यूटी पर चले गए थे, पुत्री खुशी स्कूली चली गयी थी। पुत्री स्कूल से वापस लौटी, तो उसने अपनी मां को आवाज दी, लेकिन जब दरवाजा नहीं खुला, तो उसने पिता के साथ काम करने वाले एक अंकल को बताया। उन्होंने दीवार फांदकर अन्दर जाकर देखा, तो आशा का शव खून से लथपथ पड़ा था। पास में ही अलमारी खुली पड़ी थी और जेवर गायब थे। वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर पुलिस ने पहले तो हत्या का मामला दर्ज किया, जांच में लूट सामने आयी, तो धाराओं में बढ़ोत्तरी कर दी थी।

लूट के लिए हुई थी हत्या: जांच के दौरान पुलिस ने 24 मई को एक आरोपी को पकड़ लिया था। उसने अपना नाम रवि अहिरवार उर्फ बण्टी निवासी ग्राम जरयाई, थाना चिरगांव बताया था। आरोपी ने स्वीकार किया था कि कॉलोनी में रहने वाली उसकी मौसी सास पुष्पा देवी, जो कि मेडिकल कॉलिज में सफाई कर्मी के पद पर पदस्थ है, उनके क्वॉर्टर में उसके साले अर्जुन उर्फ बण्टी, गोलू और रिश्ते में मामा लगने वाले धनराज उर्फ मक्कड़ निवासी हड्डीघर, थाना सीपरी बा़जार ने आशा श्रीवास्तव के घर में लूट की योजना बनायी थी। घटना वाले दिन उसको क्वॉर्टर के बाहर देखरेख के लिए खड़ा कर दिया था और क्वॉर्टर के अन्दर अर्जुन, गोलू व धनराज एक सरिया लेकर गए थे। इसके बाद मौसी पुष्पा और तीन लोग उसको लूट का एक मंगलसूत्र देकर भाग गए थे। तभी से पुलिस आरोपियों की लगातार तलाश में थी। आरोपियों ने बताया कि वे पिछले ढाई माह से इधर से उधर भागते फिर रहे थे। लूट के सारे जेवर बेच दिए। इस दौरान वे भोपाल, नागपुर, लखनऊ, दिल्ली आदि जगहों पर भागते रहे हैं और कोई स्थायी काम नहीं मिलने तथा लूट के पैसे खत्म हो जाने पर वह रुपए की व्यवस्था के लिए झांसी आए थे और स्टेशन के बाहर पकड़े गए।