ललितपुर / केंद्रीय मंत्री उमा भारती के खिलाफ करणी सेना में उबाल; पुतला फूंक कर जताया विरोध



करणी सेना ने किया प्रदर्शन। करणी सेना ने किया प्रदर्शन।
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करणी सेना ने किया प्रदर्शन।करणी सेना ने किया प्रदर्शन।

  • करणी सेना के युवाध्यक्ष ने कहा- माफी मांगे उमा भारती, वरना देश में होगा आंदोलन
  • उमा भारती ने कहा- मेरा बयान किसी जाति के खिलाफ नहीं

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 01:54 PM IST

ललितपुर. केंद्रीय मंत्री उमा भारती के बयान पर करणी सेना व क्षत्रिय समाज में आक्रोश है। लोगों ने सोमवार की शाम सड़कों पर उतरकर उमा भारती का पुतला फूंका और नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है। आरोप लगाया कि, उमा भारती अपने चेहेते को टिकट दिलाना चाहती थीं, लेकिन उसे टिकट नहीं मिला तो ऐसी बयानबाजी कर रही हैं। उमा भारती भाजपा के प्रत्याशी को हराना चाहती हैं। 

 

यह कहा था उमा भारती ने
उमा भारती ने बीते रविवार को महरौनी कस्बे में सद्भावना सम्मेलन में कहा कि, हर गांव में एक राजा साहब होते हैं। जब वे निकलते हैं तो सभी लोग हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं। उनके सामने कोई चप्पल नहीं पहन सकता है। कोई साइकिल पर नहीं बैठ सकता है। उनके सामने कोई दूल्हा घोड़े पर नहीं बैठ सकता है। उन्होंने क्षत्रिय समाज को भूखा और बेहद गरीब करार दिया। 

 

उमा भारती के इस बयान से क्षत्रिय समाज में आक्रोश फैल गया। करणी सेना के युवा अध्यक्ष ध्रुव प्रताप सिंह के नेतृत्व में लोगों ने राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा। ध्रुव प्रताप सिंह कहा कि उमा भारती ने क्षत्रिय समाज का अपमान किया है। मांग है कि उमा भारती 5 दिन के अंदर माफी मांगे, नहीं तो पूरे प्रदेश में प्रर्दशन किया जाएगा। 

 

उमा भारती ने ट्विट कर कांग्रेस, सपा, बसपा पर बोला हमला
उमा भारती ने कहा कि, उन्होंने कांग्रेस की सामंतवादी सोच पर टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी किसी जाति के खिलाफ नहीं थी, एक व्यवस्था के खिलाफ थी जो कि हमारे देश में खत्म हो गई है। लेकिन कांग्रेस में यह आज भी नेहरू-गांधी परिवार के रूप में विद्यमान है। जब बुंदेलखंड सामंती शोषण का शिकार था, तब गरीब ठाकुरों के परिवार भी शोषण के शिकार हुए थे। इसके कई उदाहरण हैं। इसको किसी एक जाति से जोड़कर समाजवादी पार्टी इसका लाभ उठाने की कोशिश न करें। क्योंकि मैं अखिलेश यादव और मुलायम के परिवार के व्यवस्था को भी सामंतवादी व्यवस्था मानती हूं। सामंतवाद का सबसे ज्वलंत उदाहरण तो स्वयं मायावती जी भी हैं। वह भी ठाकुर जाति से नहीं है। जिनके हाथ में सत्ता की शक्ति होती थी, उनमें से कुछ लोग सत्ता के अहंकार में डूबकर लोगों पर अन्याय करते थे। 
 

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