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जब माया को बचाने लोगों से भि‍ड़ गया था ये शख्स, जानें पूरा किस्सा

DainikBhaskar.com ने ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे मेजर सुनील दत्त द्व‍िवेदी से बात की और पूरी घटना जानी।

Danik Bhaskar | Jan 14, 2018, 09:00 PM IST

फर्रुखाबाद. यूपी की पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती एक ऐसी ​राजनीति‍क हस्ती हैं, जिनकी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने फैक्ट्स हैं​। ​15 फरवरी को माया का 62वां जन्मदिन है। उनके साथ एक ऐसी घटना घटी, जिसे खुद मायावती भी नहीं भूल सकीं। 2 जून 1995 को माया को एक हादसे का शिकार होने से तत्कालीन भाजपा विधायक-पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बचाया था। हालांकि वो अब इस दुनिया नहीं हैं। DainikBhaskar.com ने ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे मेजर सुनील दत्त द्व‍िवेदी से बात की और पूरी घटना जानी। ये थी पूरी घटना...

- मेजर सुनील दत्त द्व‍िवेदी के मुताबिक, ''2 जून 1995 में मायावती लखनऊ में मीराबाई स्टेट गेस्ट हाउस में थीं। लोगों की भीड़ ने गेस्ट हाउस को घेरकर जमकर हंगामा कर रही थी।''
- ''भीड़ में सपा से जुड़े कई चेहरे थे, जिनके सामने पुलिस भी मूकदर्शक बनी हुई थी। इस पर मायावती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया तो लोगों ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। मौके पर पहुंचकर मेरे पिता BJP नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने रिस्क लेकर उन्हें बचाया था और अकेले ही भीड़ से भ‍िड़ गए।''
- ''उस समय मैं फौज में था, जब मैं आया तो उन्होंने मुझे पूरी घटना बताई। इस घटना के बाद वो पिता जी को बहुत सम्मान देने लगी थीं। दिन भर में उनके पास करीब 8-10 फोन आया करते थे।''

इसलिए हुआ था माया पर हमला
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय पंचायतों के चुनाव के जरिए मुलायम सूबे में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते थे।
- कांशीराम की इच्छा सत्ता में भागीदारी के सहारे पंचायतों में भी जमीन तलाशने की थी। उस समय कांशीराम काफी बीमार थे तो उन्होंने ये काम मायावती को सौंपा। तभी लखनऊ में जिला पंचायत के चुनाव में दलित वर्ग की एक महिला प्रत्याशी को नामांकन भरने से रोकने का मामला तूल पकड़ गया।
- मायावती ने मुलायम को चेतावनी दी, लेकिन मुलायम भी अपनी बात पर अडिग रहे। इस पर बसपा ने मुलायम से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया। इसी के बाद से सपा के लोग मायावती से नाराज थे।
- अजय बोस की किताब 'बहनजी' में उस दिन की पूरी घटना की डीटेल है।

नहीं खड़ा किया अगेंस्ट में कोई कैंडीडेट
- गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती को आरएसएस से जुड़े और बीजेपी के विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बचाया था। ब्रह्मदत्त द्विवेदी के इस एहसान को मायावती कभी भूल नहीं पाई। उन्होंने कभी भी ब्रह्मदत्त द्विवेदी के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा नहीं किया। ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के बाद वे उनके घर पहुंची और फूट-फूटकर रोई थीं।
- जब ब्रह्मदत्त की पत्नी ने चुनाव लड़ा तो मायावती ने अपील की थी- ''मेरे लिए अपनी जान देने वाले मेरे भाई की पत्नी को वोट दें।''
- सुनील दत्त के मुताबिक, ''जब तक पिता जी जिंदा थे, तब तक उनसे संबंध थे। वो मेरी बहन की शादी में भी आई थीं। मां की तबीयत खराब रहती थी, तो उन्हें देखने भी आ जाया करती थीं।''
- ''जब से मैं फौज से रिटायर होकर भाजपा की धारा से जुड़ा तब से हमारी कोई बातचीत नहीं हुई है। उनकी विचारधारा दूसरी है और हमारी दूसरी।''

मायावती का रानीतिक करियर
- मायावती पहली बार 13 जून 1995 से 18 अक्टूबर 1995 तक मुख्यमंत्री रहीं। वो देश की पहली दलित महिला हैं, जो भारत के किसी राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।
- उनका दूसरा कार्यकाल 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक रहा। इस दौरान बीजेपी के समर्थन से उन्होंने सरकार बनाई और दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली।
- सीएम के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल पिछले दोनों कार्यकाल की अपेक्षा लंबा रहा और वे 3 मई 2002 से 29 मई 2003 तक सीएम रहीं।
- 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत मिल और वे 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक पूरे पांच साल तक यूपी की सीएम रहीं।

गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती को बीजेपी के तत्कालीन विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बचाया था। गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती को बीजेपी के तत्कालीन विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बचाया था।