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6 बेजुबान जानवरों को ऐसे दी गई सजा-ए-मौत, आखिर क्या था इनका कसूर?

कानपुर देहात में 6 जानवरों को ग्लैंडर्स बीमारी की वजह से इंजेक्शन लगाकर मौत दे दी गई।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 08, 2018, 11:02 AM IST

    • 6 जानवरों को इंजेक्शन लगाकर दर्दरहित मौत दी गई।

      कानपुर. यहां शनिवार को जिला प्रशासन ने 6 बेजुबान जनवरों को इंजेक्शन लगाकर मौत की नींद सुला दिया। आप सोच रहे होंगे शायद इन जनवरों ने कोई अपराध किया होगा। लेकिन, इन मासूम जानवरों ने कोई गुनाह नहीं किया था। बस इनको एक ऐसी गंभीर बीमारी हो गई थी, जो इंसानों के लिए खतरा पैदा कर सकती थी, इसलिए इन्हें दर्दरहित मौत दे दी गई। वहीं, अपने जानवरों को मरता देख इन जानवरों के मालिक भी खुद को रोक नहीं पाए और फूट-फूटकर रोने लगे। ऐसा दृश्य देख वहां मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गईं। 10 जानवरों को देनी थी मौत, लेकिन मिली 6 को...

      बता दें कि कानपुर देहात के सिकंदरा इलाके में शुक्रवार को जिला प्रशासन ने 10 जानवरों (2 घोड़े और 8 खच्चरों) को मौत देने का एलान किया था। इसके बाद कागजी कार्रवाई को पूरा करते हुए 2 घोड़ों और 4 खच्चरों को शनिवार दोपहर इंजेक्शन लगाकर दर्दरहीत मौत दे दी गई। वहीं, एक किसान का खच्चर लापता है और 3 खच्चर उन्नाव चले गए थे, जिन्हें वापस लाया जा रहा है।

      ये थी वजह

      कानपुर देहात के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. केएस यादव के मुताबिक, इन जानवरों में फार्सी (ग्लैंडर्स) नाम की बीमारी के लक्षण पाए गए थे। वहीं, इस बीमारी के इंसानों में फैल जाने की बात भी कई जगह से सामने आ चुकी है। इसके चलते हमें ऐसे कदम उठाने के निर्देश मिले थे।

      'पॉजिटिव आई थी रिपोर्ट'

      उन्होंने बताया कि यूपी के सभी जिलों में घोड़ों और खच्चरों का परीक्षण कराने के निर्देश मिले थे। इसी के चलते पिछले साल नवंबर में कानपुर देहात से जांच के लिए 219 घोड़े और खच्चर के ब्लड सैम्पल हरियाणा के सिरसा स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र भेजे गये थे।

      'DM से मांगी गई थी परमिशन'

      डॉ. केएस यादव ने बताया कि रिर्पोट आने के बाद हमें पता चला कि यहां के 10 जानवरों में ग्लैंडर्स के लक्षण मौजूद हैं। इसके बाद फिर से ब्लड सैंपल लेकर अनुसंधान केंद्र भेजा गया और क्रॉस चेक कराया गया। जब दोबारा रिर्पोट में पोजिटिव लक्षण मिले तो पशु चिकित्सा विभाग ने इन 10 जानवरों को मौत देने के लिए जिलाधिकारी से परमिशन मांगी क्योंकि इसका इलाज हमारे देश में नहीं है। परमिशन मिलने के बाद इन्हें मौत दे दी गई।

      खास तरह के इंजेक्शन का किया इस्तेमाल

      बता दें कि इन जानवरों को मौत देने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया। इस इंजेक्शन की खासियत ऐसी थी कि इसकी वजह से जानवरों को किसी भी प्रकार से दर्द नहीं हुआ और उनकी मौत हो गई।

      अब क्या होगा इनके रोजी-रोटी का?

      वहीं, एक तरफ लोगों का मानना है कि मानवहित में इन जनवरों को मौत की सजा देना प्रशासन द्वारा ठीक कदम था। लेकिन, इन जानवरों के मालिक की बात की जाए तो उनके लिए ये जानवर रोजी-रोटी का सहारा थे और परिवार के सदस्य की तरह थे। इसलिए शायद जानवरों की मौत पर उनके मालिक खुद के आंसुओं को रोक नहीं सके।

      ये है बड़ा सवाल

      वहीं, जिला प्रशासन द्वारा इन जानवरों के मालिक को मुआवजा देने की बात कही जा रही है। लेकिन, बड़ा सवाल ये उठता है कि ऐसी गंभीर बीमारी के रोकथाम के लिए क्या विभाग द्वारा कोई कदम वक्त रहते ही नहीं उठाया जाना चाहिए था। और क्या अब कोई ठोस कदम विभाग द्वारा उठाया जा रहा है?

      क्या है ग्लैंडर्स

      ग्लैंडर्स बरखेलडेरिया मेलिआई जीवाणु जनित रोग है। ये घोड़ों के बाद मनुष्यों, स्तनधारी पशुओं में पहुंचता है। इस बीमारी की वजह से पूरे शरीर में गांठें होने लगती हैं। नाक और मुंह से लगातार पानी बहता रहता है और धीरे-धीरे ये गांठें जानलेवा बन जाती हैं। सबसे खतरनाक बात ये है कि इस रोगी के सम्पर्क में आने वाला हर जानवर और यहां तक कि इंसान भी इसका शिकार बन जाता है।

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      इन जानवरों में ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण पॉजिटिव पाए गए थे।
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      मौत देने के बाद इन जानवरों को दफनाया गया।
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      इन जानवरों के मालिक खुद के आंसुओं को रोक नहीं पाए।
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    Web Title: District Administration Killed 6 Animals After Positive Report Of Glanders Disease
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