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गरीबों के लिए ऐसा कर चर्चा में आया ये IAS, कभी खुद देखी थी ऐसी गरीबी

शुक्रवार को कानपुर के DM सुरेंद्र सिंह ने सड़कों पर घूमकर लोगों को कंबल बांटे।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Dec 30, 2017, 01:39 PM IST

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कानपुर. कड़ाके की ठंड के बीच शहर के कई इलाकों में शुक्रवार देर शाम अचानक उस समय हलचल तेज हो गई, जब जिले के डीएम खुद सड़कों पर उतरकर गरीबों को कंबल बांटने लगे। इतना ही नहीं डीएम ने खुद अपने हाथों से लोगों को शॉल और कंबल भी उढ़ाया। 5 हजार कंबल बांटे...

 

बता दें कि योगी सरकार की तरफ से गरीबों को कंबल बांटने की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार की शाम जिले के डीएम सुरेंद्र सिंह ने चुन्नीगंज बस अड्डे, स्वरूपनगर समेत कई होम शेल्टर में जाकर कंबल और शॉल बांटे। इस दौरान उन्होंने बताया कि अब तक शहर में सरकार की तरफ से 5 हजार कंबल और सामाजिक संस्थाओं की ओर से डेढ़ हजार कंबल बांटे गए हैं।

 

मां-बाप ने संघर्ष कर बनाया DM

बता दें कि गरीबों की मदद को आगे आए डीएम सुरेंद्र सिंह की भी आर्थिक स्थिति पहले काफी खराब हुआ करती थी। हाल ही में DainikBhaskar.com को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपनी लाइफ के स्ट्रगल को शेयर किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे उनके माता-पिता ने गरीबी में दिन-रात संघर्ष करके सुरेंद्र सिंह को डीएम बनाया था।

 

पापा के लिए ये बने IAS अफसर

- मथुरा जिले के सैदपुर गांव के रहने वाले सुरेन्द्र सिंह के पिता हरी सिंह किसान थे। खेती ही फैमिली की आय का मुख्य जरिया था।

- सुरेंद्र कहते हैं, शुरुआती दौर में परेशानियां कुछ ज्यादा थीं। गांव के प्राथमिक स्कूल में मेरी शुरुआती पढ़ाई हुई। मैं रोज देखता था कि मुझे स्कूल जाते देख पैरेंट्स की आंखों में एक अजीब सी ललक रहती थी।

- वो ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन मेरी पढ़ाई उनके लिए काफी मायने रखती थी। यह बात मैं बचपन से ही महसूस करने लगा था।

- मेरे फैमिली की आय का मुख्य जरिया खेती ही था। मैं अक्सर स्कूल से आने के बाद खेतों में पहुंच जाता और पिता जी का काम में हाथ बंटाता। हालांकि, वो मुझे काम करने से मना कर देते थे, क्योंकि वो चाहते थे कि मेरा ध्यान कभी पढ़ाई से न भटके।

- मैं 8वीं क्लास तक गांव के ही स्कूल में पढ़ा। उसी दौरान मेरे बड़े भाई जीतेंद्र को दिल्ली में प्राथमिक स्कूल में टीचर की जॉब मिल गई। मैं भी उनके साथ दिल्ली चला गया। वहां इंटर करने के बाद मैं BSC और MSC के लिए राजस्थान चला गया।

- वहां मैंने Msc में टॉप किया, मुझे गोल्ड मेडल भी मिला। पढ़ाई के दौरान मैं कई गवर्मेंट जॉब के लिए एग्जाम देता रहता था। इस बीच मेरा सिलेक्शन एयरफोर्स में हो गया। वहां ज्वाइन करने से पहले ही मेरा सिलेक्शन ONGC में जियोलॉजिस्ट के पद पर हो गया।"

- मैं ONGC में नौकरी तो करने लगा था, लेकिन दिल में हमेशा यही ख्याल आता कि शायद अभी पिता जी का सपना अधूरा है। मैंने 3 बार PCS का एग्जाम क्वालीफाई किया, लेकिन ज्वाइन नहीं किया। क्योंकि दिल में IAS बनने का ख्वाब था। साल 2005 में IAS क्वालीफाई किया, देश में 21वीं रैंक हासिल की।

 

पत्नी का मिलता है साथ

- करीब 10 साल पहले सुरेन्द्र सिंह की शादी मेरठ की गरिमा से हुई थी। इनकी 2 बेटियों हैं। सुरेन्द्र कहते हैं, डीएम के पद पर काफी सारी जिम्मेदारियां होती हैं, जिसमें कभी-कभी फैमिली और बच्चों के लिए भी टाइम निकालना मुश्किल हो जाता है।

- लेकिन पत्नी का पूरा सहयोग रहता है, जिसकी वजह से मैं समाज के लिए बेहतर काम कर पा रहा हूं।

- सुरेन्द्र छोटे से गांव से निकलकर भले ही IAS बन गए हों, लेकिन आज भी उन्हें मिट्टी के चूल्हे की बनी रोटियां सबसे ज्यादा पसंद है।

- बता दें, इस IAS अफसर को साल 2012 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद में तैनाती के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा बेस्ट इलेक्शन प्रैक्टिस के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसके आलावा मनरेगा योजना में बेहतरीन कार्यवहन के लिए इन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

DM Surendra Singh distributed blankets to poor people in Kanpur
शुक्रवार रात डीएम ने सड़कों पर घूमकर गरीबों को कंबल बांटे।
DM Surendra Singh distributed blankets to poor people in Kanpur
होम शेल्टर्स में भी जाकर डीएम ने शॉल वितरित किए।
DM Surendra Singh distributed blankets to poor people in Kanpur
इनके मां-बाप ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। जीवन-यापन के लिए रोज संघर्ष करते थे।
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सुरेंद्र कहते हैं, शुरुआती दौर में परेशानियां कुछ ज्यादा थीं। गांव के प्राथमिक स्कूल में मेरी शुरुआती पढ़ाई हुई।
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सुरेंद्र कहते हैं, मैं रोज देखता था कि मुझे स्कूल जाते देख पैरेंट्स की आंखों में एक अजीब सी ललक रहती थी।
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सुरेंद्र की मां।
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सुरेन्द्र सिंह के पिता हरी सिंह।
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