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पति ने 60 हजार में बेच दिया डकैत को, ऐसे एक मासूम बनी खौफ का दूसरा नाम

दस्यु सुंदरी सीमा यादव ने खुद बताई डकैत बनने की कहानी।

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 06:39 PM IST

कानपुर. क्राइम की दुनिया में महिलाओं का भी दबदबा रहा है। खासकर 80-90 के दशक में कई लड़कियों को किडनैप कर डकैत बनाया गया। मजबूरी में क्राइम का दामन थामने वाली लड़कियां खौफ का चेहरा बनकर उभरीं। DainikBhaskar.com देश की सबसे डेंजरस वुमन की सीरीज चला रहा है। पहली कड़ी में जानते हैं बीहड़ की दस्यु सुंदरी सीमा यादव की कहानी।

12 साल की उम्र से डकैतों के बीच रही दस्यु सुंदरी सीमा यादव अब सोशल वर्कर बन गई हैं। 2017 के यूपी चुनाव में उन्होंने निर्धन समाज पार्टी ऑफ इंडिया से प्रत्याशी बनकर कंटेस्ट किया। अब उनका टारगेट 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव हैं। DainikBhaskar.com से बातचीत के दौरान उन्होंने बीहड़ में बिताए दिनों की बातें शेयर कीं।

14 साल बड़े आदमी से कर दी गई शादी

- कानपुर देहात के सिकंदरा थाना अंतर्गत महरूपुर गांव की रहने वाली पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा यादव ने बताया, "मेरे 11 साल के होते ही मेरे पिता जुलुम सिंह की बुआ शादी करवाने की बात करने लगी थीं। उस जमाने में 10 साल की होते ही लड़की के हाथ पीले कर दिए जाते थे। अक्टूबर 1998 में इटावा के भवानीपुर गांव निवासी कल्लू सिंह से मेरी शादी कर दी गई। वो 25 साल का था और मैं 11 की। दहेज में एक साइकिल, 25 हजार रु. कैश और एक रिस्टवॉच समेत घर के सारे सामान दिए गए थे।"

घर पर आते थे डकैत

- सीमा ने बताया, "शादी के बाद एक हफ्ते बाद मेरे घर दर्जनभर बंदूकधारी पति और ससुर से मिलने आए। मैं हैरान थी कि ये डकैत यहां क्या कर रहे हैं। मैंने डरते हुए पूछा तो मुझे चुप करवा दिया गया। मैं जब मायके गई और यही बात पिता को बताई तो उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया।"
- "ससुराल में आए दिन डकैत आते-जाते थे। एक रात दो दर्जन से ज्यादा डकैत आए। मेरे पति ने मुझसे सभी के लिए खाना पकाने को कहा तो मैंने मना कर दिया। इसी बात पर उसने मुझे इतना मारा कि मैं बेहोश हो गई। घर का कोई सदस्य मुझे बचाने नहीं आया।"
- "मुझे डकैतों का आना पसंद नहीं था। मैंने पति से कहा कि उन्होंने ये सब नहीं रुकवाया तो मैं पुलिस कंप्लेंट कर दूंगी। इस बात पर उसने मुझे बहुत मारा। अगर उस दिन मुझसे मिलने मेरा मुंह बोला भाई गंभीर सिंह नहीं आता तो मैं मर ही जाती। गंभीर थोड़ा दबंग था और मेरे ससुरालवाले भी उससे डरते थे। उसकी धमकी पर मेरे साथ मारपीट बंद हुई।"

60 हजार में बेच दिया डकैत को

- "शादी के करीब सात महीने बाद ही मेरे पति ने मेरा सौदा सलीम गैंग के मुखिया से पक्का कर दिया था। जब उसने मेरे भाई गंभीर के बारे में सुना तो खरीदने से मना कर दिया। 1999 में पुलिस एन्काउंटर में मेरा भाई मारा गया और मेरे बुरे दिन शुरू हो गए।"
- "एक दिन मेरे पति ने सारी हदें पार करते हुए मुझे जहर मिली दाल पिलाने की कोशिश की। मेरे शोर मचाने पर पड़ोसी इकट्ठा तो हुए, लेकिन तब तक मैं बेहोश हो चुकी थी। होश आया तो मैं किसी चंदन यादव के घर थी। चंदन उस समय का नामी डकैत था। उसने बताया कि मेरे पति ने मेरा सौदा 60 हजार रुपए में कर दिया है। 12 साल की उम्र में मैं डकैतों के बीच फंस चुकी थी।"
- "मैंने उसके हाथ पैर-जोड़े तो उसने मेरे पिता से 5 लाख रुपए और 5 बीघा जमीन की मांग की, लेकिन उन्होंने देने से मना कर दिया। इसके बाद उसने मेरे हाथ में भी हथियार पकड़ा दिए और मुझसे डकैती करवाने लगा।"

आगे जानें, कैसे एक मासूम लड़की से खूंखार डाकू बनी थी सीमा यादव...