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यहां आज भी मौजूद है 'स्वर्ग की सीढ़ी', कभी यहीं लिखी गई थी रामायण

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 'बिठूर गंगा महोत्सव' का शुभारंभ किया।

Dainik Bhaskar

Dec 20, 2017, 08:35 PM IST
Special Story on Valmiki Bithoor Ashram of Kanpur

कानपुर. यहां के बिठूर क्षेत्र में बुधवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने 'बिठूर महोत्सव' का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने बिठूर घाट पर गंगा आरती भी की। लेकिन इस स्थान का अपना ही अलग ऐतिहासिक महत्व है। यहां कुछ ऐसे भी पौराणिक काल के साक्ष्य मौजूद हैं, जिनकी कहानी काफी दिलचस्प है। DainikBhaskar.com आपको बताने जा रहा है बिठूर घाट के इतिहास के बारे में जहां माना जाता है कि आज भी स्वर्ग की सीढ़ियां मौजूद हैं...

भगवान राम और श्रीकृष्ण को धरती पर आए भले ही लाखों साल बीत गए हों, लेकिन धरती पर सतयुग की सीढ़ियां आज भी मौजूद हैं। ऐसा मानना है कि ये सीढ़ियां सीधे स्वर्ग तक ले जाती हैं। सेंट्रल रेलवे स्टेशन से 30 किलोमीटर दूर एक छोटी सी जगह 'बिठूर' है। यहीं पर वाल्‍मीकि का आश्रम है, जहां बैठकर उन्होंने रामायण की रचना की थी। इसी आश्रम में सीता ने लव-कुश नाम के दो बेटों को जन्म दिया था।

यहां से दिखता है पूरा बिठूर

ये आश्रम काफी ऊंचाई पर बना हुआ है। इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। इन सीढ़ियों को स्‍वर्ग जाने की सीढ़ी कहा जाता है। स्‍थानीय लोग इसे 'सरग नशेनी' भी कहते हैं। बताया जाता है कि इस आश्रम की आखिरी सीढ़ी से पूरे बिठूर का सुंदर नजारा देखा जा सकता है।

सीता की रसोई के पास बनी हैं स्वर्ग की सीढ़ियां
यहां के पंडित नंदकिशोर दीक्षित बताते हैं कि जब भगवान राम के आदेश पर लक्ष्मण ने सीता को जंगल में छोड़ दिया था तो वो भटकती हुईं यहां पहुंची थीं। यहीं पर उनकी मुलाकात वाल्‍मीकि से हुई थी। इसके बाद वो उन्‍हें बिठूर के आश्रम में लेकर गए। उनका आश्रम आज भी यहां पर बना हुआ है। इस आश्रम का मुख्य द्वार काफी ऊंचाई पर स्‍थित है। इसके पास ही सीता की रसोई भी है, जिसके पास स्वर्ग की सीढ़ियां बनी हुई हैं।

नाना पेशवा ने बनवाई थी सीढ़ियां
पंडित नंदकिशोर दीक्षित बताते हैं कि इसमें 65 सीढ़ियां और सात फेरे बने हुए हैं। पहले यहां दीपक जलाकर रखा जाता था, जिन्‍हें 'दीप मालिका' भी कहा जाता है। नंद किशोर दीक्षित की मानें तो इन सीढ़ियों को नाना पेशवा ने बनवाया था। इसके बगल में एक घंटा भी लगा है। कहा जाता है कि जब इस घंटे को बजाया जाता था तो तात्या टोपे को पता चल जाता था कि उन्हें बुलाया जा रहा है।

यहीं पर रहकर वाल्‍मीकि ने की थी रामायण की रचना
वाल्मीकि आश्रम में तीन मंदिर हैं। इनमें से एक मंदिर खुद वाल्मीकि का है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। वे पद्मासन की मुद्रा में बैठे हुए हैं और दाएं हाथ में लेखनी लिए हुए हैं। यहीं पर रहकर उन्‍होंने रामायण की रचना की थी। उनके पास ही भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है, जहां भगवान विष्णु शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए मुद्रा में हैं।

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