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अब जीना नहीं चाहतीं ये मां-बेटी, जानिए क्यों चाहती हैं मनमर्जी से मौत

कानपुर में मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित मां-बेटी को जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी हुई, तो उनके चेहरे खिल उठे।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 06:33 PM IST
supreme court verdict on right to passive euthanasia

नई दिल्ली/कानपुर। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इच्छामृत्यु पर एक अहम फैसला सुनाया। कहा है कि कोमा में जा चुके या मौत की कगार पर पहुंच चुके लोगों के लिए Passive Euthanasia (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) और इच्छामृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत (Living Will) कानूनी रूप से मान्य होगी। इस संबंध में कोर्ट ने डिटेल गाइडलाइन जारी की है। कोर्ट ने इस मामले में 12 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रखा था। आखिरी सुनवाई में केंद्र ने इसका दुरुपयोग होने की आशंका जताई थी। कानपुर में भी एक फैमिली है..


-कानपुर में मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित मां-बेटी को जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी हुई, तो उनके चेहरे ख़ुशी से खिल उठे। उन्होंने कहा यह बहुत ही पॉजिटिव फैसला है। इन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को खून से लेटर लिख कर की थी इच्छा म्रत्यु की मांग।
-शहर के शंकराचार्य नगर की रहने वाली शशि मिश्र के पति की 15 साल पहले मौत हो चुकी है। शशि मस्कुलर डिस्ट्राफी नाम की बीमारी से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। वह बीते 27 साल से बेड पर हैं। 6 साल पहले इकलौती बेटी अनामिका मिश्रा (33) भी इसी बीमारी की चपेट में आकर लाचार हो गई। शशि के मुताबिक बेटी के इलाज में घर में रखी जमापूंजी भी खत्म हो गई। रिश्तेदारों ने मदद की, लेकिन बाद में उन्होनें भी किनारा कर लिया।
-अब स्थिति यह है कि बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया है।
-बीकॉम अनामिका ने बताया कि उसके पिता बिजनेसमैन थे। मां की अचानक 1985 में तबियत ख़राब हुई थी। तब पता चला था कि इनको मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक बीमारी है। जब तक पिता जी थे, उन्होंने इलाज कराया। उनके निधन के बाद घर की जमा पूंजी और जमीन बेच कर इलाज कराते रहे।
-अनामिका के मुताबिक, उसने स्कूल में और कोचिंग में पढ़ाकर मां का इलाज कराया। लेकिन अब इस बीमारी ने उसे भी अपनी चपेट में ले लिया।

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