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ऐसे बनती है कानपुर के फेमस गजक-चिक्की, आप भी कर सकते हैं ट्राई

कानपुर के हुलागंज की मंडी में गजक बनाने का पुश्तैनी काफी सालों से चलता आ रहा है।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 12:10 PM IST
कानपुर गजक बनाने का गढ़ भी कहा जाता है। कानपुर गजक बनाने का गढ़ भी कहा जाता है।

कानपुर. सर्दियां में यहां स्वाद के दीवानों के लिए कुछ खास रहता है। ऐसा में सर्दी से बचने के लिए लोगों को गजक की याद आती है, क्योंकि यह सर्दियों की मेवा कही जाती है। इस समय मार्केट में गजक की कई वैरायटी आ गई हैं, जिनके स्वाद का लोग जमकर लुत्फ उठाते हैं। कानपुर के हुलागंज की मंडी में गजक बनाने का पुश्तैनी काम काफी सालों से चलता आ रहा है। इसकी सप्लाई भारत के कई राज्यों में की जाती है। एेसे बनाई जाती है गजक...

- दुकानदार पिंटू गुप्ता ने बताया की उनकी दुकान बाप-दादाओं के समय से चली आ रही है। यहां गजक का काम पुश्तैनी से करते चले आ रहे हैं।
- गजक बनाने के लिए पहले तिल को शक्कर की चासनी में भिगोकर उसे कढ़ाई में पकाया जाता है। फिर उसे कूटा जाता है, उसके बाद गजक गुथा हुआ आटा नुमा आकार में परिवर्तित हो जाता है।
- फिर उसके बाद पैरलल कर कई भाग किए जाते हैं। काटने वाले औजार से उन स्लाइसों को अलग कर दिया जाता है। इस तरह गजक बनकर तैयार हो जाती है।
- इसके बाद उसकी पैकिंग की जाती है। कई और वैरायटी के हिसाब से गजक को अलग-अलग शेप दिए जाते हैं, क्योंकि मार्केट में लोगों की डिमांड कुछ हटकर भी होती है।
- उन्होंने बताया कि ये हमारा पुश्तैनी काम है और कानपुर गजक बनाने का गड़ भी है। सर्दियों में गजक के कई फायदे है, जिससे शरीर तरोताज़ा और गर्म बना रहता है। यह सर्दियों के लिए मेवा है।
- हमारे यहां गजक की 17 वैरायटी तैयार की जाती हैं। जैसे तिल लट्ट, मूंगफली लट्ठा, गुड़ पट्टी, रोल गजक, शक्कर गजक और चिक्की जैसी कई प्रकार की गजक तैयार की जाती है। वही, इनकी सप्लाई आल इंडिया में की जाती है।

गजक बनाने की विधि
- गजक को तैयार करने के लिए गुड़ और दामन लेते है। शक्कर का जिससे इसकी चाशनी बनाते है, चासनी जब बन जाती है फिर इसे पट्टी में डालते हैं।
- पट्टी जब सूखती है फिर उसे चढ़ाते हैं एक बरतन में डालकर फेंटते है।
- इसके बाद इसमें तिल्ली मिलाकर इसे कूटते हैं। कुटाई हो जाने के बाद उसे कई भागों में अलग कर काटते हैं, एसके बाद गजक बनकर तैयार हो जाती है।

सर्दियों में गजक के कई फायदे है, जिससे शरीर तरोताज़ा और गर्म बना रहता है। सर्दियों में गजक के कई फायदे है, जिससे शरीर तरोताज़ा और गर्म बना रहता है।
फिर उसे कूटा जाता है, उसके बाद गजक को गुथा हुआ आटा नुमा आकार में परिवर्तित हो जाता है। फिर उसे कूटा जाता है, उसके बाद गजक को गुथा हुआ आटा नुमा आकार में परिवर्तित हो जाता है।
गजक बनाने के लिए पहले तिल को शक्कर की चासनी में भिगोकर उसे कढ़ाई में पकाया जाता है। गजक बनाने के लिए पहले तिल को शक्कर की चासनी में भिगोकर उसे कढ़ाई में पकाया जाता है।
इस समय मार्केट में गजक की कई वैरायटियां आ गई हैं, जिनके स्वाद का लोग जमकर लुत्फ उठाते हैं। इस समय मार्केट में गजक की कई वैरायटियां आ गई हैं, जिनके स्वाद का लोग जमकर लुत्फ उठाते हैं।
काटने वाले औजार से उन स्लाइसों को अलग कर दिया जाता है। काटने वाले औजार से उन स्लाइसों को अलग कर दिया जाता है।
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कानपुर गजक बनाने का गढ़ भी कहा जाता है।कानपुर गजक बनाने का गढ़ भी कहा जाता है।
सर्दियों में गजक के कई फायदे है, जिससे शरीर तरोताज़ा और गर्म बना रहता है।सर्दियों में गजक के कई फायदे है, जिससे शरीर तरोताज़ा और गर्म बना रहता है।
फिर उसे कूटा जाता है, उसके बाद गजक को गुथा हुआ आटा नुमा आकार में परिवर्तित हो जाता है।फिर उसे कूटा जाता है, उसके बाद गजक को गुथा हुआ आटा नुमा आकार में परिवर्तित हो जाता है।
गजक बनाने के लिए पहले तिल को शक्कर की चासनी में भिगोकर उसे कढ़ाई में पकाया जाता है।गजक बनाने के लिए पहले तिल को शक्कर की चासनी में भिगोकर उसे कढ़ाई में पकाया जाता है।
इस समय मार्केट में गजक की कई वैरायटियां आ गई हैं, जिनके स्वाद का लोग जमकर लुत्फ उठाते हैं।इस समय मार्केट में गजक की कई वैरायटियां आ गई हैं, जिनके स्वाद का लोग जमकर लुत्फ उठाते हैं।
काटने वाले औजार से उन स्लाइसों को अलग कर दिया जाता है।काटने वाले औजार से उन स्लाइसों को अलग कर दिया जाता है।
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