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प्रिंसिपल मर्डर केस की जांच के लिए कानपुर पहुंची NIA की टीम, पढ़े पूरा मामला

पिछले साल 24 अक्टूबर 2016 को एक स्कूल के प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ल की हत्या की गई थी।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Dec 19, 2017, 06:02 PM IST

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nia team in kanpur after terrorist saffulla encounter
प्रिंसिपल मर्डर केस की जांच करने के लिए NIA की टीम ने मंगलवार को पहुंची।

कानपुर. आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर से पहले प्रिंसिपल मर्डर केस की जांच करने के लिए NIA की टीम ने मंगलवार को पहुंची। एनआईए की टीम ने उस जगह भी गई, जहां प्रिंसिपल की हत्या की गई थी। बता दें कि मुठभेड़ में मारे गए सैफुल्लाह और गिरफ्तार किए फैसल का घर भी जाजमऊ में ही है इस हिसाब से संवेदनशील इलाकों में एनआईए पहुंचकर चप्पे चप्पे की निगरानी में जुटी हुई है। हो सकती है पूछताछ

 

- माना जा रहा है कि एनआईए सैफुल्लाह और फैसल के घर भी पूछताछ के लिए जा सकती है। इसी वजह से किसी तरीके की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। इस वक्त एनआईए के साथ सर्कल का फ़ोर्स भी मौजूद है। NIA की टीम ने जाजमऊ इलाके में वाजिदपुर में घटनास्थल पर पहुंचकर लोगों से इस बारे में पूछताछ कर रही है।

 

 2016  में हुई थी प्रिंसिपल की हत्या

 

- पिछले साल 24 अक्टूबर 2016 को एक स्कूल के प्रिंसिपल रमेश चंद्र शुक्ल की वाजिदपुर के पास स्कूल से लौटते वक्त उनकी हत्या कर दी थी। इस मामले में कानपुर के चकेरी थाने में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
- उसके कुछ दिन बाद आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल से जुड़े आतंकी फैसल के बारे में पता चला था। उसके बाद कानपुर में हुई मुठभेड़ में आतंकी सैफुल्लाह मारा गया।

- जांच में पता चला था कि आतंकी सैफुल्लाह ने हथियारों की टेस्टिंग के लिए प्रिसिंपल की हत्या की थी। इसके बाद एनआईए की टीम ने प्रिंसिपल मर्डर केस में नई  रिपोर्ट दर्ज की थी। 

 

कौन था सैफुल्लाह 


-सैफुल्लाह कानपुर के जाजमऊ इलाके के मनोहर नगर का रहने वाला था। सैफुल्लाह ने ढाई महीने पहले घर छोड़ दिया था। विस्फोट के पहले घर पर फोन कर जल्द ही सऊदी अरब जाने की बात कही थी।  उसके पिता सरताज अहमद खान ने बताया था कि 24 साल सैफुल्लाह ने बीकॉम तक की पढ़ाई की थी। वो अकाउंटिंग का काम सीखकर प्राइवेट लोगो के यहाँ पार्ट टाइम काम करता था।


-उसका काम में मन नहीं लगता था। सैफुल्लाह अकाउंटिंग का काम सीखकर सउदिया जाना चाहता था। सैफुल्लाह की मां का देहांत करीब ढाई साल पहले हो गया था, उसके बाद वो घर में जल्दी किसी की नहीं सुनता था। मुठभेड़ से पहले सैफुल्लाह घर में कम रहता था, सुबह दस बजे तक वो घर से निकल जाता था, और देर रात घर वापस लौटता था। 

 

- सैफुल्लाह एक दिन अचानक घर से चला गया था। वो अपने साथ अपना पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधारकार्ड और अपने सारे शैक्षिक प्रमाणपत्र भी लेकर चला गया था।  इनके मुताबिक़ करीब साल भर पहले सैफुल्लाह ने एक लैपटॉप खरीदा था, मगर वो अपने लैपटॉप को किसी को छूने नहीं देता था। करीब छह महीने से उसका ज्यादा समय लैपटॉप पर ही गुजरता था। 


-मुठभेड़ से पहले सैफुल्लाह और उसका दोस्त आतिस काम की तलाश में दो तीन बार मुम्बई भी जा चुके था।  सैफुल्लाह ने बीकॉम सेकेंड ईयर का पेपर दिया था, तब उसको दो हज़ार रुपये का एक साधारण फोन खरीद कर पिता ने दिया था। उसके ठीक आठ महीने पहले सैफुल्लाह ने महंगा एंड्रॉयड लिया था, पूछे जाने पर कहता था-पार्ट टाइम जो काम करता हूं, उसी के पैसे से खरीदा है। उसके मौत के बाद पिता सरताज ने सैफुल्लाह के डेड बॉडी को लेने से मना कर दिया था।


 

 

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NIA की टीम उस जगह पर भी गई, जहां
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जांच में पता चला कि जिस हथियार से प्रिंसिपल की हत्या हुई थी। वो आतंकियों के पास होती है।
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