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लोग इस IITian को कहते हैं पागल, 10Lac की जॉब छोड़ कर रहा ये काम

मोहित की टीम ने 2016 में 'इजी नौकरी' नाम की एक कंपनी खोली।

Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 12:14 PM IST

लखनऊ. आईआईटी गुवाहाटी से बीटेक और आईआईएफटी दिल्ली से एमबीए पास आउट चार दोस्तों ने सलाना 10 से 15 लाख रुपये की जॉब छोड़कर ‘इजी नौकरी’ नाम से एक ऐसी कम्पनी बनाई है, जो ग्रामीण युवाओं को घर–घर जाकर उनके पसंद के हिसाब से नौकरी उपलब्ध करा रही है। खास बात ये है कि इस काम के लिए युवाओं से कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। लेकिन, मोहित को उनके आस-पड़ोस के लोग ताने देते हैं कि वो अपनी जॉब छोड़ गांव-गांव घूमकर बेरोजगारों को नौकरी दिलाने का काम करते हैं। ‘इजी नौकरी’ के फाउंडर मेम्बर मोहित सचान ने DainikBhaskar.com से बात की और अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। 2013 में IIT गुवाहाटी से किया BTech...

- कानपुर के रहने वाले 26 साल के मोहित सचान बताते हैं- मेरे साथ राहुल पटेल (24), निपुन सरीन (25) और हेमंत वर्मा (24) ने आईआईटी गुवाहाटी से 2013 में बीटेक और आईआईएफटी दिल्ली से एमबीए किया है।

- "मेरे पिता ताराचंद सचान पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर हैं और मां पुष्पा सचान हाउस वाइफ हैं। मेरा एक बड़ा भाई भी है। मैंने पढ़ाई पूरी करने के बाद विविगो कंपनी में जॉब भी किया।"

- "मेरा सलाना पैकेज 10 लाख रुपए था। इसी तरह मेरे बाकी तीनों दोस्त भी 10 से 15 लाख रुपए के सलाना पैकेज पर अलग–अलग कम्पनियों में जॉब कर रहे थे।"

आगे की स्लाइड्स में जानें मोहित ने क्यों छोड़ दी नौकरी और कैसे दिला रहे बेरोजगार युवाओं को नौकरी...

ऐसे छोड़ दी जॉब

 

- राहुल ने बताया कि वो 2015 में ओयो कम्पनी में जॉब कर रहे थे और अपने गांव छुट्टी बिताने के लिए पहुंचे थे। तभी यहां के युवाओं ने उनसे नौकरी दिलाने की गुजारिश की।

 

- इसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि वो अब ग्रामीण युवाओं को नौकरी दिलाने के लिए कुछ करेंगे। ये बात उन्होंने अपने बाकी दोस्तों को बताई। सभी ने अपनी सहमति दे दी और सभी ने अपनी जॉब छोड़ दी।

12 दिन में बाइक से 3 हजार किमी का सफर तय किया

 

- मोहित ने बताया- "हमारा गांव में पहले भी आना-जाना लगा रहता था इसलिए हमारे पास गांव के लोगों से कैसे बात करना है। उन्हें अपने काम के बारे में कैसे समझना है ये सब हम पहले से ही जानते थे।"

 

- सचान के मुताबिक, चारों दोस्तों ने 12 दिन में बाइक से 3 हजार किमी का सफर तय किया, जिसमें चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, जिले शामिल थे। उन्होंने गांव-गांव जाकर युवाओं से मुलाकात की और घर–घर जाकर सर्वे किया।

"लोग हमें पागल कहते हैं"

 

- उन्होंने बताया- "जॉब छोड़ शहर से गांव में जाकर काम करने पर लोगों ने हमें पागल कहकर मजाक भी उड़ाया था, लेकिन तब हमने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। इस बात की शिकायत हमारे घर तक भी पहुंची थी।"

 

- "लोगों ने हमारे पैरेंट्स से शिकायत करते हुए हमें समझाने की भी कोशिश की थी, लेकिन हमने घर वालों की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।"

12 लाख रूपये में खड़ी कर दी ये कम्पनी

 

- मोहित बताते हैं- जॉब के दौरान हम चारों दोस्तों ने कुछ पैसे सेव किए थे। 2016 में हम सभी ने 12 लाख रुपये से "इजी नौकरी" नाम से अपनी एक कंपनी शुरू कर दी।

 

- "हमने ‘नौकरी मित्र’ नाम से एक एप्लीकेशन तैयार कराया। साथ ही ‘नौकरी मित्र’ नाम से हर गांव में पढ़े-लिखे लोगों को भी जोड़ा। जो नौकरी मित्र बनकर बेरोजगारों युवाओं का सर्वे रिपोर्ट तैयार कर कंपनी को भेजते हैं।"

 

- "इस रिपोर्ट के आधार पर हम शहरों में स्थित कंपनियों से संपर्क करते हैं और उनकी जरूरत के हिसाब से योग्य बेरोजगारों युवाओं को नौकरी उपलब्ध कराने का काम करते हैं।"

ऐसे काम करती है ये कम्पनी

 

- मोहित ने कहा- हमारी टीम ने देश की 30 से ज्यादा कम्पनियों, रेस्टोरेंट्स और होटल्स के कान्टेक्ट में हैं। ये कम्पनियां "इजी नौकरी" के माध्यम से ही अपने यहां पर युवाओं को काम पर रखती हैं।

 

- उन्होंने बताया- "इस काम के लिए हमारी कंपनी बेरोजगारों से एक भी पैसा नहीं लेती है। लेकिन, जब युवाओं को नौकरी मिल जाती है तब तय करार के मुताबिक, रोजगार देने वाली कंपनी से एक फिक्स रकम ली जाती है।"

 

- सचान के मुताबिक, उनकी कंपनी बांदा, हमीरपुर, देवरिया, सहित यूपी के लगभग 50 जिलों में काम कर रही है और इसमें लगभग 500 से ज्यादा नौकरी मित्र काम कर रहे हैं। एक साल के अंदर उनकी कंपनी ने 600 से ज्यादा पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार मुहैया कराया है।