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सवा करोड़ की जॉब छोड़ गांव पहुंचा ये IITian, ऐसे बदल रहा लोगों की लाइफ

राहुल एक मोबाइल ऐप के जरिए गांव के युवाओं को नौकरी दिलाने का काम कर रहे हैं।

Danik Bhaskar | Jan 13, 2018, 05:48 PM IST
राहुल ने IIT गुवाहाटी से कैमिकल ट्रेड में बीटेक किया है। राहुल ने IIT गुवाहाटी से कैमिकल ट्रेड में बीटेक किया है।

कानपुर. हर इंसान का सपना होता है कि वो जिंदगी में एक अच्छा मुकाम हासिल कर अपना और अपने परिवार की जरूरतों और सपनों को पूरा करे। इसके लिए इंसान दिन-रात मेहनत करता है। लेकिन, कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जिन्हें अपने सपनों से ज्यादा दूसरों की जरूरतों का ख्याल रखने का जुनून होता है। इन्हीं में से एक हैं 26 साल के राहुल पटेल, जिन्होंने सवा करोड़ रुपए का पैकेज छोड़ समाज के कमजोर तबके के लोगों की मदद को ही अपना करियर बना लिया। इसके लिए खुद को समर्पित किया...

DainikBhaskar.com से खास बातचीत में राहुत ने बताया, आज के समय में हर इंसान अपने लिए करता है, लेकिन उनके लिए कोई कुछ नहीं करता जो सही जानकारी न मिल पाने की वजह से पीछे रह जाते हैं, इसलिए मैंने खुद को उन लोगों की मदद के लिए समर्पित कर दिया।

सवा करोड़ की नौकरी छोड़ लौटे घर

- बता दें कि यूपी के बांदा जिले में जन्में राहुल पटेल ने बताया कि वो बचपन से ही समाज के लिए कुछ करना चाहते थे।
- राहुल बचपन से ही ब्राइट स्टूडेंट रहे हैं, इसलिए इनके पिता रणधीर सिंह बांदा छोड़कर कानपुर के नौबस्ता में शिफ्ट हो गए।
- राहुल की स्कूलिंग कानपुर से ही हुई। इसके बाद उन्होंने 2013 में IIT गुवाहाटी से कैमिकल ट्रेड में बीटेक की पढ़ाई पूरी की।
- इसके बाद राहुल ने हैदराबाद में करीब डेढ़ साल नौकरी की, लेकिन इस दौरान भी उनका मन कमजोर समाज के उत्थान के लिए ही लगा रहा।
- नतीजा ये हुआ कि राहुल ने सवा करोड़ रुपए पैकेज वाली जॉब छोड़ दी और कानपुर वापस आ गए।

लोगों के लिए कर रहे ऐसा

- राहुल ने बताया कि 'मेरे बचपन का कुछ समय गांव में ही बीता, मैंने देखा कि वहां के लोग जानकारी के अभाव में पीछे रह जाते हैं।'
- 'अगर ग्रामीणों को सही समय पर सही गाइडेंस मिल जाए तो उनका भविष्य सुधर सकता है।'
- 'आजकल सब कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध है। जब मैं यहां आया तो गांव के लोग इंटरनेट के बारे में कुछ खास नहीं जानते थे।'
- 'तब मैंने सोचा कि अगर यहां के लोगों को मोबाइल पर नौकरी के बारे में जानकारी मिल जाए तो उनको आसानी से नौकरी मिल सकती है।'

3 दोस्तों के साथ मिलकर बनाया ऐप

- इसके बाद राहुल ने अपने कॉलेज के 3 दोस्तों के साथ मिलकर 2016 में 'EezyNaukari' नाम से एक मोबाइल ऐप बनाया।
- राहुल ने बताया कि 'इस ऐप के जरिए कोई भी युवा अपनी योग्यता अनुसार नौकरी आसानी से सर्च कर सकता है।'
- उन्होंने कहा कि 'ऐप लॉन्चिंग के बाद मैंने कानपुर, बांदा, फतेहपुर और बुंदेलखंड में जाकर कई ग्रामीणों को बेरोजगार होने से बचाया।'

'600 युवाओं को मिली नौकरी'

- 'हमने गांव-गांव जाकर लोगों को ऐप के बार में जानकारी दी।'
- 'लोगों को जॉब सर्च करना, फॉर्म भरना, डाटा अपलोड करना सिखाया।'
- 'इस ऐप के माध्यम से अब तक 600 से ज्यादा युवाओं को नौकरी मिली है।'

सरकार से सहयोग की दरकार

- इसके खर्च पर पूछे गए सवाल को लेकर राहुल ने बताया कि 'जॉब के दौरान हम दोस्तों ने जो सेविंग की थी, उसी से अभी तक काम चल रहा है।'
- 'हम इसके लिए सरकार से भी बात कर रहे हैं कि वो इसमें अपना सहयोग करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को बेरोजगार होने से बचाएं।

सवा करोड़ रुपए की जॉब छोड़कर राहुल कानपुर वापस लौट आए और यहां लोगों की मदद में जुट गए। सवा करोड़ रुपए की जॉब छोड़कर राहुल कानपुर वापस लौट आए और यहां लोगों की मदद में जुट गए।
राहुल ने हैदराबाद में करीब डेढ़ साल नौकरी भी की। राहुल ने हैदराबाद में करीब डेढ़ साल नौकरी भी की।
मोबाइल ऐप 'EezyNaukari' के जरिए राहुल युवओं को नौकरी दिलाने में मदद करते हैं। मोबाइल ऐप 'EezyNaukari' के जरिए राहुल युवओं को नौकरी दिलाने में मदद करते हैं।
'इस ऐप के माध्यम से अब तक 600 से ज्यादा युवाओं को नौकरी मिली: राहुल 'इस ऐप के माध्यम से अब तक 600 से ज्यादा युवाओं को नौकरी मिली: राहुल
राहुल ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर मोबाइल ऐप बनाया। राहुल ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर मोबाइल ऐप बनाया।