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मूवी से इंस्पायर्ड होकर शख्स ने खड़ी कर दी ये कंपनी, लोग बुलाते है किंग

मसाला किंग के नाम से फेमस इस शख्स का नाम है ओम प्रकाश डालमिया।

Danik Bhaskar | Jan 21, 2018, 12:08 PM IST
1994 में आई सर मूवी से इंस्पायर्ड होकर अपने कंपनी का नाम सर रखा था। 1994 में आई सर मूवी से इंस्पायर्ड होकर अपने कंपनी का नाम सर रखा था।

कानपुर. हर किसी के जीवन में इंस्पिरेशन का अहम रोल होता है। वहीं, एक शख्स ऐसा हैं जो 1993-94 में आई सर मूवी से प्रेरणा लेकर उसी नाम से अपना बिजनेस शुरू किया और देश के कोने-कोने में अपने बिजनेस को फैला दिया। मसाला किंग के नाम से फेमस इस शख्स का नाम है ओम प्रकाश डालमिया। इनके पिता जी कभी 100 रुपए सैलरी में घर का खर्चा चलाते थे। लेकिन आज इनकी कंपनी करोड़ों कारोबार करती है। DainikBhaskar.com से बातचीत करते हुए ओम प्रकाश डालमिया ने अपनी लाइफ से जुड़े कुछ इंटरेस्टिंग बातें शेयर की। गरीबी में बीता था बचपन...

- ओम प्रकाश डालमिया सिविल लाइंस में पत्नी गीता डालमिया और बेटा पुलकित डालमिया के साथ रहते हैं।
- मसाला किंग ओम प्रकाश डालमिया ने बताया कि 1954 में पिता जी रघुनाथ प्रसाद डालमिया हरियाणा से काम के सिलसिले से कानपुर आए थे। जहां उन्होंने स्वदेशी कॉटन मिल में नौकरी करनी शुरू की।
- उस वक्त का दौर बड़े ही गरीबी में बीता था। पिता जी ने महज़ 100 रुपए की नौकरी करते हुए हम तीनों भाइयों को पढ़ाया-लिखाया। फिर कुछ समय बाद जनरलगंज इलाके में एक दुकान खोली और उससे परिवार की भरण-पोषण करने लगे।

पिता जी से किया था ये वादा
- ओम प्रकाश अक्सर पिताजी के साथ पनकी मंदिर जाते थे। एक वाक्यां याद करते हुए बताया कि पिताजी के साथ रिक्शे से जा रहा था। पनकी एरिया के बीच पड़ने वाली फैक्ट्रीज को अक्सर देखा करता था और पिताजी से कहता कि एक दिन इससे भी बड़ी फैक्ट्रियां और जगह बनाऊंगा।
- आज पनकी बाबा के आशीर्वाद से हम तीनों भाई जय प्रकाश डालमिया और श्री प्रकाश डालमिया ने मिलकर अपने व्यवसाय को बढ़ाकर उसे इस मुकाम तक पहुंचा दिया।

आगे पढ़िए क्यों रखा ब्रांड का नाम सर...

- 1993-94 में सर नाम की एक मूवी आयी थी। उसमें नसरुद्दीन शाह ने एक टीचर की भूमिका में थे, जिन्हें सभी स्टूडेंट्स सर कहते थे।
- उनके इस रोल से प्रभावित होकर सर चीज़ का मतलब उस मूवी से समझ आया। इसके बाद अपने बिजनेस और कम्पनी का नाम सर रख दिया।
- आज उनकी कम्पनी केवल पान मसाले में नही बल्कि एफएमसीजी सेक्टर में भी कदम रख दिया है। कंपनी द्वारा बनाए गए माउथफ्रेशनर, हर्बल लोशन ,टॉफी और डियो जैसे कई प्रोडक्ट देश के कोने-कोने में ब्रांड बने हुए है, जिनका रिस्पॉन्स भी अच्छा मिल रहा है।

- ओम प्रकाश डालमिया शहर की हस्ती होने के साथ-साथ समाज सेवा में भी आगे रहते है।
- साथ ही, गरीब बच्चे जो सिविल सर्विसेज (IAS-PCS) की तैयारियां करते हैं। लेकिन पैसे के अभाव में कोचिंग नहीं कर पाते हैं उनके लिए ओम प्रकाश एक निशुल्क इंस्टीट्यूट चलाते है। जिनमें बच्चे फ्री में कोचिंग करते हैं। इतना ही नहीं संस्था की ओर से विद्यार्थियों को कॉपी-किताब भी मुहैय्या कराई जाती है।

 

 
- उनकी तैयारी करवाने के लिए वह इलाहबाद से सिविल सर्विसेज के फैकल्टी को भी बुलाते हैं।
- कोचिंग में प्रत्येक वर्ष दाखिले के लिए प्रदेश भर के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों से आवेदन मांगे जाते हैं। इसके बाद एक प्रवेश परीक्षा होती है। परीक्षा में सफल होने वाले टॉप-70 मेधावियों का चयन कोचिंग में पढ़ने के लिए किया जाता है।
- ओम प्रकाश का मानना है कि काम तो हर कोई करता है लेकिन कुछ प्रयास समाज के लिए भी करना चाहिए। जो भी बच्चे आज एक मुकाम तक पहुंचे है उनसे एक ही बात कहता हूं कि ज़िन्दगी में कुछ बनने के बाद समाज के लिए ज़रूर कुछ न कुछ करें।