कानपुर

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यहां महिलाओं ने ऐसे दिया लाशों को कंधा, लोग बोले- आखि‍र ऐसा क्यों ?

कानपुर में पांच दिवसीय लावारिस लाशों को कंधा देने का कार्यक्रम पोस्टमॉर्टम हाउस में किया जा रहा था।

Danik Bhaskar

Jan 09, 2018, 03:55 PM IST

कानपुर. यूपी के कानपुर में पोस्टमॉर्टम हाउस में उस समय लोगों की भीड़ जुट गई, जब महिलाएं लावारिस लाशों को कंधे देने लगीं। ये मंजर देख लोग जहां के तहां रुक गए। सभी के मन में बस एक सवाल था कि आखिर ये अर्थी किसकी है और महिलाएं क्यों कंधा दे रही हैं? लाशों पर की गई फूलों की वर्षा...


- बता दें, समाज कल्याण सेवा समिति भारतीय दलित पैंथर दवारा पांच दिवसीय लावारिस लाशों को कंधा देने का कार्यक्रम पोस्टमॉर्टम हाउस में किया जा रहा था।
- इसी कार्यक्रम के तहत मंगलवार को पोस्टमॉर्टम हाउस में लावारिस लाशों को समिति की महिलाओं ने कंधा दिया। इस दौरान दो लावारिश लाशों को दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने कंधा देकर समाज को जागरूक करने का काम किया।
- इस दौरान लावारिश लाशों पर फूलों की वर्षा भी की गई।
- ये देख उधर से गुजरने वाले लोग वहीं रुक गए। सभी के मन में बस एक सवाल था कि आखिर ये अर्थी किसकी है और महिलाएं क्यों कंधा दे रही हैं।
- जब लोगों को इसकी जानकारी हुई की ये लावारिस लाशें हैं, तो लोग महिलाओं के जज्बे और हौंसले को सलाम करने लगे।

महिलाएं नहीं हैं किसी से कम
- कंधा देने वाली सीमा संखवार महिला ने बताया, ''जिनका कोई नहीं होता, उनका खुदा होता है। इसी कहावत को हम लोग सच कर रहे हैं। हमारी संस्था द्वारा 'लावरिस को वारिस' कार्यक्रम किया जा रहा है। इसमें हम महिलाओं ने लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के लिए पोस्टमॉर्टम हाउस से उन्हें भैरव घाट तक कंधा दिया।''
- समिति के अध्यक्ष धनीराम ने बताया, ''हम लोग 9 साल से लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। जिसको लेकर आज भी ये काम किया गया। हम लोगों की संस्था ने मंगलवार को दो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया। जिसे महिलाओ ने कंधा देकर समाज को आइना दिखाने का काम किया है कि आज के युग में महिलाएं किसी से काम नहीं हैं।''

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