पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करें
नई दिल्ली. दिल्ली के कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर और उनके भाई अतुल सेंगर समेत सभी सात दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी दोषियों पर 10-10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह रकम पीड़ित के परिवार को दी जाएगी। इससे पहले पीड़ित से दुष्कर्म मामले में सेंगर को उम्रकैद हो चुकी है। वह तिहाड़ जेल में बंद है। 4 मार्च को कुलदीप सेंगर, उसके भाई अतुल सेंगर, दो पुलिसकर्मियों और तीन अन्य आरोपियों को कोर्ट ने दोषी ठहराया था।
ये भी पढ़े
योगी सरकार ने नहीं हटाए वसूली वाले पोस्टर; जवाब में सपा नेता ने लगाए चिन्मयानंद और कुलदीप सेंगर के बैनर
सजा पर बहस हुई तो गिड़गिड़ाता रहा सेंगर
इस मामले में सजा तय करने के लिए गुरुवार को अदालत में बहस हुई तो सेंगर कोर्ट में गिड़गिड़ाता नजर आया था। दरअसल, सीबीआई ने इस मामले को वीभत्स बताते हुए कठोर सजा देने की मांग की थी। इसके बाद सेंगर ने जिला जज धर्मेश शर्मा से कहा, ''मुझे इंसाफ दिया जाए या फिर फांसी पर लटका दिया जाए। अगर मैंने कुछ गलत किया है, तो मेरी आंखें तेजाब से जला दी जाएं।'' इस पर जज ने जवाब दिया, ''सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही फैसला (दोषी ठहराने) किया गया है।''
साल 2018 में पुलिस हिरासत में हुई थी मौत
उन्नाव दुष्कर्म पीड़ित के पिता की 9 अप्रैल 2018 को ज्यूडिशियल कस्टडी के दौरान मौत हो गई थी। पिछले हफ्ते इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने कहा था- घटनाक्रम से स्पष्ट हो जाता है कि कुलदीप सिंह सेंगर के संरक्षण में ही पुलिस ने पीड़ित को राइफल की बैरल से पीटा और उसके साथ हैवानियत की गई। इसलिए इसका दोष साबित होता है। कोर्ट में सीबीआई के वकील ने कहा था- पीड़ित के पिता बीमार थे, इसके बावजूद उन्हें बुरी तरह से पीटा गया। आरोपी पुलिसकर्मी वहीं मौजूद थे। ये लोग उसकी मदद कर सकते थे, लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया
तीन साल पहले नाबालिग ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था
उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में नाबालिग को अगवाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। दिल्ली कोर्ट ने दोषी कुलदीप सिंह सेंगर (53) को 20 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए उसे मृत्यु तक जेल में रखने के आदेश दिए थे। सेंगर पर 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया था। कुलदीप सेंगर की विधानसभा सदस्यता भी रद्द की जा चुकी है।
कांग्रेस से बसपा-सपा में होते हुए भाजपा में आया कुलदीप
कुलदीप सेंगर की गिनती उत्तर प्रदेश के दलबदलू नेताओं में होती है। 4 बार से लगातार विधायक रहा कुलदीप कभी चुनाव नहीं हारा। उसने उन्नाव जिले की अलग-अलग सीटों से 3 बार चुनाव जीता। वह 2002 में पहली बार बसपा से सदर, 2007 में सपा से बांगरमऊ और 2012 में भगवंतनगर से चुनाव जीता था। 2017 में उसने भाजपा से बांगरमऊ सीट से चुनाव जीता था।




Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.