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  • Uttar Pradesh Kanpur News in hindi: Dacoit Malkhan Singh Says He want to teach Pakistan a lesson for Pulwama Terror Attack, If Government allow him to do so
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बीहड़ के 'शेर' डाकू मलखान सिंह का ऐलान, 700 बागियों के साथ पाकिस्तान को धूल चटा दूंगा; जिले का बागी रहा हूं, देश का नहीं

Dainikbhaskar.com

Feb 20, 2019, 02:24 PM IST

सरकार चाहे तो बिना वेतन बॉर्डर पर भेज दे, PAK को उसकी औकात दिखा देंगे

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कानपुर. चंबल के शेर कहे जाने वाले दस्यु सरगना मलखान सिंह ने पुलवामा आतंकी हमले से आहत होकर पाकिस्तान को ललकारा है। डाकू मलखान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में 700 बागी बचे हैं। अगर सरकार चाहे तो बिना शर्त, बिना वेतन हम बॉर्डर पर देश के लिए मर मिटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, 15 साल बीहड़ों में कथा नहीं बांची है। मां भवानी की कृपा रही, तो मलखान सिंह का कुछ नहीं बिगड़ेगा। हां, पाकिस्तान को जरूर धूल चटा दूंगा। उसको उसकी औकात दिखा दूंगा। गांव व जिले का बागी रहा हूं। देश का नहीं।

चुनाव लड़ने की जताई इच्छा


मंगलवार को डाकू मलखान सिंह पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने कानपुर आए हुए थे। बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, जब वादे पूरे नहीं करोगे तो हारोगे ही। मप्र में हार गए। मलखान सिंह ने कहा, अगर लोकसभा चुनाव में टिकट मिलती है, तो जरूर लड़ूंगा। साथ ही कहा, चुनाव होंगे और होते रहेंगे लेकिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला जरूर लेना चाहिए। अगर कश्मीर पर फैसला नहीं लिया गया तो कोई भी राजनीती पर विश्वास नहीं करेगा। पाकिस्तान में घुस कर उसकी धज्जिया उड़ाने का वक्त आ गया है। एक या दो आतंकियों को मारने में हमारे देश 5 जांबाज शहीद हो गए।

'अन्याय के खिलाफ राजनीति करेंगे'

मलखान सिंह ने कहा, मैंने 1982 में आत्मसमर्पण किया था। तब अर्जुन सिंह मप्र के मुख्यमंत्री थे। यह आत्मसमर्पण इंदिरा गांधी की परमीशन पर हुआ था। मैंने मंच से ऐलान किया था कि यदि कोई महिला शिनाख्त कर दे कि मलखान सिंह ने चांदी की भी अंगूठी उतारी हो तो इसी मंच के सामने फांसी पर लटका दिया जाए। हम अन्याय के खिलाफ राजनीति करेंगे। हम राजनीती पेट भरने के लिए नहीं करेंगे। पहली प्राथमिकता विकास है, जनता की समस्याओं को हल करना।

देश के बागी नहीं हैं हम: मलखान सिंह

मलखान ने कहा कि, बीहड़ में मेरा इतिहास बहुत ही साफ सुथरा रहा है। महात्मा बहुत सच्चे होते हैं, लेकिन बागियों का इतिहास ठोस रहा है, इतना तो साधु संतो का भी नहीं रहा है। साधू तो घेरे में आ चुके हैं। जेल में पड़े हैं। कुकर्म में पड़े हुए हैं। लेकिन बागियों के विषय में कोई बता दे? हम गांव और जिले के बागी रहे पर देश के बागी कभी नहीं हुए।

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