उप्र / एक साल से जीबी सिंड्रोम से जूझ रहा इटावा का स्टेट एथलीट अंश, इलाज पर खर्च हो चुके हैं एक करोड़

अंश यादव। अंश यादव।
up news etawah athlete ansh yadava suffering from gb syndrome hospitlized in max hospital delhi since one year
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अंश यादव।अंश यादव।
up news etawah athlete ansh yadava suffering from gb syndrome hospitlized in max hospital delhi since one year

  • दिल्ली के मैक्स अस्पताल में चल रहा इलाज, पिता ने सरकार से मांगी मदद
  • एशिया में करीब 30 फीसदी लोग इस बीमारी की चपेट में

दैनिक भास्कर

Aug 06, 2019, 06:19 PM IST

इटावा. सैफई के मेजर ध्यानचंद्र स्पोर्ट्स कॉलेज का एथलीट अंश यादव दिल्ली के मैक्स अस्पताल में बीते एक साल से जिंदगी-मौत से जूझ रहा है। उसे जीबी सिंड्रोम (गुलियन बैरे सिंड्रोम) घातक बीमारी है। अब तक उसके इलाज पर एक करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इलाज में सरकार ने तीन किस्तों में 25 लाख की मदद की है। कई स्वयं सेवी संस्थाओं ने भी अंश के लिए अंशदान जुटाया है। लेकिन अब परिवार के हाथ खाली हो चुके हैं। ऐसे में हर दिन मौत से जूझते बेटे को देखकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट रहा है। एशिया में करीब 30 फीसदी लोग और मध्य व दक्षिण अमेरिका में 65 फीसदी लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं।  

वेंटिलेटर पर अंश
जसवंतनगर के रहने वाले अंश के पिता राजीव यादव वार्ड सभासद हैं। वे बेटे के इलाज में मदद के लिए इन दिनों इटावा में हैं। उन्होंने बताया कि, उनका बेटा अंश यादव उत्तर प्रदेश स्टेट एथलीट चैंपियन रहा है। सरकार ने इलाज के लिए मदद किया था, सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अभियान चलाकर बेटे के इलाज के लिए राशि जुटाई। बेटा वेंटिलेटर पर है। अब कुछ रुपए भी नहीं बचे हैं। पिता ने सोमवार को डीएम से मुलाकात कर मदद की मांग की है। आने वाले समय में भी इलाज के लिए बड़ी रकम चाहिए होगी।

 

अक्टूबर माह से कोमा में अंश
पिता ने बताया कि, 19 जुलाई 2018 को पता चला कि, बेटा अंश जीबी सिंड्रोम से ग्रसित है। उसे सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती करवाया गया। यहां राहत न मिलने पर उसे छह अगस्त 2018 को मैक्स हॉस्पिटल रेफर कर दिया। तीन महीने यहां इलाज चला। 23 अक्टूबर 2018 को अंश की सेहत में आंशिक रूप से सुधार आया। डॉक्टर ने फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी और अस्पताल से हटा दिया। इसके बाद 30 अक्टूबर 2018 को परेशानी बढ़ गई तो पता लगा कि, उसे ब्रेन हैमरेज हो गया है। तब से अंश कोमा में है। 

 

डीएम बोले- मदद के लिए शासन को लिखा पत्र
जिला अधिकारी जेबी सिंह ने कहा कि, यह एक लाइलाज बीमारी है और सरकार द्वारा 25 लाख रुपए की रकम दी जा चुकी है। लेकिन अभी उनके बच्चे के इलाज के लिए पैसे की और आवश्यकता है। जिसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। 

 

क्या है बीमारी?
केजीएमयू के सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर जियाउद्दीन ने बताया कि, गुलियन बैरे सिंड्रोम एक ऐसा विकार है, जिसमें रोगी के शरीर में पहले सिहरन या दर्द होने लगता है और फिर उसके बाद उसकी मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। लक्षण पता लगते ही इलाज न होने पर ब्रीदिंग मसल्स तक कमजोर हो जाती है। कई बार मरीज को लकवा तक हो जाता है।

 

यह हैं लक्षण
इस बीमारी के होने पर सर्वप्रथम रोगी के शरीर, खासकर हाथों व पैरों में सुन्नपन, सिहरन, अंगुलियों में सुई-सी चुभन महसूस होना, दर्द होना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जहां तक दर्द की बात है तो लगभग आधे से ज्यादा रोगी शरीर में दर्द को महसूस करते हैं। इसके बाद रोगी अपने हाथ और पैरों में कमजोरी महसूस करने लगता है। रोग के ये लक्षण शरीर के दोनों तरफ बराबर से नजर आते हैं और समय के साथ ये बदतर होते जाते हैं।

 

यह है उपचार
इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। प्लाज्माफेरेसिसर उपचार की इस विधि के तहत हमारे रक्त में मौजूद एंटीबॉडीज जो इस बीमारी के होने पर बाहरी पदार्थों पर आक्रमण करने की बजाए शरीर में स्थित नर्व्स पर ही आक्रमण करने लगती हैं को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। इसके तहत रोगी के शरीर के रक्त को एक मशीन के द्वारा बाहर निकाला जाता है। जब मशीन रक्त से एंटीबॉडीज को बाहर निकाल देता है तब निकाले गए रक्त को रोगी के शरीर में वापस चढ़ा दिया जाता है।

 

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